हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 'कह दो पुलिस नहीं है, सड़क पर आप अपनी जान के खुद जिम्मेदार’
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साइकिल ट्रैक और फुटपाथ पर वाहन चलाने वालों और पार्किंग करने वालों पर तुरंत एफआईआर दर्ज करो। ऐसा करते हुए कोई झंडा या बत्ती मत देखना। अगर मेरी गाड़ी भी नियम के खिलाफ खड़ी मिले तो मेरा चालान करने से भी मत झिझकना। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो साइकिल ट्रैक और फुटपाथ हटा दो। लोगों से कह दो कि पुलिस नहीं है और आप सड़क पर अपने रिस्क पर निकलें। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अमोल रतन सिंह ने यह टिप्पणी एक मामले में सुनवाई के दौरान की।
मामले की सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासक के सलाहकार का हलफनामा पेश किया गया जिसमें बताया गया कि साइकिल ट्रैक को लेकर जिम्मेदारी तय की गई है। ट्रैक की सफाई की जिम्मेदारी एमसी कमिश्नर की, मेंटेनेंस की इंजीनियरिंग विभाग की और इस पर बाइक -कार आदि न चलने देने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की होगी।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि यूटी पुलिस के पदों की संख्या बढ़ाने का प्रपोजल केंद्र सरकार को भेजा गया है। 1355 पदों के भेजे गए प्रस्ताव में 457 पद ट्रैफिक पुलिस के लिए मांगे गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने डीजीपी व गृह सचिव को आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर इन पदों को लेकर क्या स्टेटस है, यह जानकारी दें। कोर्ट ने कहा कि या तो पार्किंग की व्यवस्था करो या फिर मोनो रेल जैसे कॉन्सेप्ट पर विचार करो जिससे लोगों को वाहन निकालने की जरूरत कम से कम पड़े।
एनसीआर की स्थिति में हैं चंडीगढ़, बाहरी लोग परेशानी का सबब
ट्रैफिक नियमों का पालन करवाने में अभी तक नाकाम रही चंडीगढ़ पुलिस ने नाकामी का ठीकरा मोहाली और पंचकूला वासियों पर फोड़ा है। यूटी पुलिस ने कहा कि चंडीगढ़ की स्थिति एनसीआर की तरह हो गई है। शहर के लोगों को तो जागरूक किया जा रहा है लेकिन बाहर से आने वाले लोग परेशानी का सबब बन रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि यह देखना पुलिस का काम है कि कैसे नियमों का पालन हो। ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड मिलकर इस स्थिति को संभालें।
मास्टर प्लान के माध्यम से बताएं कैसे निपटेंगे ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या से
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान चीफ आर्किटेक्ट को निर्देश दिए कि वे मास्टर प्लान के अनुरूप बताएं कि आने वाले वर्षों में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या से निपटने की क्या योजना है। साथ ही यह भी बताएं कि कुछ सरकारी इमारतों के आगे पार्किंग का स्थान दिया गया है और कुछ में नहीं। तो या तो सभी जगह पार्किंग दो या फिर सभी के लिए एक ही व्यवस्था लागू करो।
एक हफ्ते की मोहलत
हाईकोर्ट ने कहा कि अभी ट्रैफिक पुलिस को एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि साइकिल ट्रैक व फुटपाथ पर कोई वाहन न चले। कुछ वर्ष पहले इस शहर में ट्रैफिक पुलिस और वाहन अनुपात सबसे ज्यादा था, पर अब हालत बदतर है।
शून्य नागरिक भावना
हाईकोर्ट ने कहा कि एक ओर तो पुलिस अपनी ओर से कोशिश कर रही है लेकिन लोगों के बीच शून्य नागरिक भावना है। लोगों को चाहिए कि वे नियमों के अनुरूप चले और खुद को भी सुरक्षित रखें और दूसरों को भी। लोग लापरवाही बरतते हैं और इसके साथ ही पुलिस भी अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाने में कामयाब नहीं हुई है।
दिखावे का पालन
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस टोकन चालान में हीरो है जो केवल दिखावा है। असल में जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा है। अब कोई भी कार या बाइक प्रतिबंधित क्षेत्र में पार्क मिले तो तुरंत इसको टो करवाओ। लोगों के बीच संदेश जाना चाहिए कि नियम का पालन नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर हो सकता है।