Highcourt: सहमति संबंध पर सामाजिक दृष्टिकोण जैसा भी हो, प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा देने का कर्तव्य न भूले पुलिस
हाईकोर्ट ने कहा कि मानव जीवन के अधिकार को सर्वोच्च दर्जा दिया जाना चाहिए और रिश्ता कैसा भी हो कानून के बाहर जाकर इसे छीना नहीं जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा के प्रति मौन रहने वाले पुलिस अधिकारियों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सहमति संबंधों पर सामाजिक दृष्टिकोण के कारण पुलिस अधिकारी कर्तव्य भूल रहे हैं। हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा को लेकर हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के गृह सचिवों व डीजीपी को आदेश दिया है कि वे सभी एसएचओ को इस संबंध में उचित निर्देश जारी करें।
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याचिका दाखिल करते हुए प्रेमी जोड़े ने बताया था कि वह विवाहित हैं, लेकिन अपने जीवन साथी के साथ न रहकर डेढ़ साल से अन्य के साथ सहमति संबंध में रह रहे हैं। दोनों को युवती के मायके वालों, पति व ससुराल वालों से खतरा है। सुरक्षा की मांग को लेकर उन्होंने अगस्त में नूंह पुलिस को मांगपत्र दिया था, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह देखने में आ रहा है कि पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई न होने पर प्रेमी जोड़ों को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ रही है। ऐसा लगता है कि पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों का सहमति संबंध में रहने वाले जोड़े के प्रति सामाजिक व व्यक्तिपरक दृष्टिकोण नागरिकों के जीवन की रक्षा करने के कर्तव्य पर हावी हो जाता है। इसी का नतीजा है कि उनकी ड्यूटी में निष्क्रियता आ जाती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि मानव जीवन के अधिकार को सर्वोच्च दर्जा दिया जाना चाहिए और रिश्ता कैसा भी हो कानून के बाहर जाकर इसे छीना नहीं जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा के प्रति मौन रहने वाले पुलिस अधिकारियों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश
- रिश्ते की वैधता को देखते हुए अपने कर्तव्यों का न भूलें। व्यक्तिगत पसंद भले ही सामाजिक मानदंडों या अन्य कानूनों का उल्लंघन हो, उन्हें सांविधानिक प्रावधानों द्वारा संरक्षित किया जाना चाहिए।
- जोड़ों को अक्सर खतरा परिवार वालों से होता है। ऑनर किलिंग के पिछले आंकड़ों को देखते हुए पारिवारिक दबाव और संभावित नुकसान को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
- रिश्ते की वैधता को अलग रखना चाहिए और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पवित्र अधिकार को संरक्षित रखा जाना चाहिए।
- राज्य का कर्तव्य व्यक्तियों को उनकी व्यक्तिगत पसंद के कारण होने वाले नुकसान से बचाना है। पुलिस का कर्तव्य है कि नागरिकों की रक्षा हो।