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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court clarified that Child Marriage Prohibition Act does not exempt any religion

हाईकोर्ट की टिप्पणी: मुस्लिमों में यौन परिपक्वता के बाद विवाह वैध, लेकिन यह बाल विवाह निषेध अधिनियम से बचने का आधार नहीं  

Tue, 14 Dec 2021 10:12 AM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Dec 2021 10:12 AM IST
सार

प्रेमी जोड़े में लड़के की आयु विवाह योग्य न होने पर हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जीवन और सुरक्षा का अधिकार प्रत्येक नागरिक को है। हाईकोर्ट ने जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। 

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Punjab-Haryana High Court clarified that Child Marriage Prohibition Act does not exempt any religion
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक प्रेमी जोड़े की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी अहम फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार यौवन परिपक्वता के बाद विवाह वैध होता है, लेकिन यह बाल विवाह निषेध अधिनियम से बचने का आधार नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम का कानून किसी भी धर्म को छूट नहीं देता है। हालांकि हाईकोर्ट ने विवाह योग्य आयु न होने पर भी प्रेमी जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

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याचिका दाखिल करते हुए जोड़े ने बताया कि वह मुस्लिम धर्म से हैं और विवाह कर चुके हैं। दोनों के घरवाले इस रिश्ते को तैयार नहीं हैं और ऐसे में उन्हें जान का खतरा है। अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर उन्होंने अमृतसर के एसएसपी को मांगपत्र भी सौंपा था। मुस्लिम धर्म के अनुसार यौवन परिपक्वता की स्थिति में विवाह वैध होता है। हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की की आयु 18 वर्ष है, लेकिन लड़के की आयु दस्तावेजों के अनुसार साढ़े 16 साल है। मुस्लिम धर्म के अनुसार भले ही उनका विवाह वैध हो, लेकिन जम्मू-कश्मीर में लड़की के घरवालों ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत शिकायत दी है और इस अधिनियम में किसी भी धर्म को कोई छूट नहीं है। 
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लड़के ने कहा कि उन्हें यहां सुरक्षा दी जाए और शिकायत के मामले में वह कानून के अनुरूप केस को लडे़ंगे। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन और सुरक्षा का अधिकार देता है। ऐसे में जोड़े को अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने अमृतसर के एसएसपी को जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

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