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Punjab News: राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित बोले- वीसी की नियुक्ति में सरकार ने यूजीसी के नियम नहीं माने

Wed, 21 Jun 2023 11:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 21 Jun 2023 11:51 PM IST
सार

राज्यपाल ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक स्तर पर उनके खिलाफ कोई शब्द कहा तो फिर इस बार मेरे वकील भी तैयार हैं। राज्यपाल ने कहा कि पीटीयू के वीसी की नियुक्ति के मामले में फाइल पढ़ने पर सरकार की धांधली सामने आई।

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Punjab Governor Banwari Lal Purohit said Govt did not follow UGC rules in appointment of PTU VC
पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

पंजाब के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच विवाद और गहरा गया है। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने कहा है कि पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति (वीसी) की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के तहत नहीं की गई है लेकिन अगली बार से सरकार ने अगर नियमों का पालन नहीं किया तो मंजूरी नहीं दी जाएगी। 

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मंगलवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से राज्यपाल की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों का बुधवार को पुरोहित ने न सिर्फ जवाब दिया, बल्कि राज्य सरकार के कामकाज पर भी गंभीर टिप्पणियां कीं। राज्यपाल ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक स्तर पर उनके खिलाफ कोई शब्द कहा तो फिर इस बार मेरे वकील भी तैयार हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि पीटीयू के वीसी की नियुक्ति के मामले में फाइल पढ़ने पर सरकार की धांधली सामने आई। उन्होंने वीसी की नियुक्ति के लिए यूजीसी के मापदंड के अनुसार पैनल भेजने को कहा था। फाइल पढ़ने पर पता चला कि नियमों का पालन ही नहीं किया गया। सरकार ने तीन नाम चुनने के लिए जो पैनल बनाया, उसमें मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और यूजीसी के एक सदस्य का नाम था लेकिन यूजीसी के सदस्य को बुलाया ही नहीं गया। इसके अलावा वीसी पद के लिए सरकार ने जो विज्ञापन निकाला, उसके आधार पर 40 आवेदन प्राप्त हुए लेकिन सरकार ने किसी को भी इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया और अपनी तरफ से तीन नाम भेज दिए।

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राज्यपाल पुरोहित मुख्यमंत्री के सदन में उनके प्रति कहे गए शब्दों के काफी आहत दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के प्रति ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। वह राज्य के मुखिया होने के नाते सांविधानिक नियमों से बंधे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस आरोप का तीखे शब्दों में खंडन किया, जिसमें उन्होंने राज्यपाल पर सरकार को काम नहीं करने देने का आरोप लगाया था। राज्यपाल ने कहा- 'मैं चैलेंज करता हूं कि वह कोई एक भी काम गिना दें, जिसमें मैंने सरकार को काम करने से रोका हो।'

सदन में मेरा मजाक उड़ाया, मेरे पत्रों को लव-लेटर कहा: राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी गरिमा का ख्याल नहीं रख रहे। वह मेरे प्रति निम्न भाषा का इस्तेमाल करते हैं। क्या यह राज्यपाल के प्रति मुख्यमंत्री के शब्द होते हैं? उन्होंने कहा- विधानसभा में मेरा मजाक उड़ाया गया। मेरे भेजे गए पत्रों को सदन में लव-लेटर बताया गया। मैं मुख्यमंत्री वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करूंगा लेकिन मेरे पत्रों का जवाब तो देना ही पड़ेगा। मेरा काम संविधान की रक्षा करना है और मैं सरकार से जवाब मांगता रहूंगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार और सांविधानिक रूप से मुख्यमंत्री राज्यपाल की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य हैं। अगर वह कुछ असंवैधानिक करते हैं तो मैं इसे रोक दूंगा। मैंने मुख्यमंत्री से कोई निजी जानकारी नहीं मांगी थी।

जब तक पंजाब में हूं, सरकारी हेलिकॉप्टर नहीं लूंगा

पुरोहित ने कहा कि सीएम मान कहते हैं कि पंजाब सरकार के दिए गए हेलिकॉप्टर से मैं इधर-उधर घूम रहा हूं। वह मुझ पर बेवजह के आरोप लगाते हैं, इसलिए मैं एलान करता हूं कि जब तक पंजाब में हूं, सरकार के हेलिकॉप्टर का कभी इस्तेमाल नहीं करूंगा। मैंने सीमावर्ती जिलों में जाने के लिए तीन-चार बार हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया लेकिन अकेला नहीं गया। पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी भी थे। अब गाड़ी से ही जाऊंगा। मैं तो पहले ही लग्जरी से दूर रहता हूं। जहाज में भी इकोनॉमी क्लास में सफर करता हूं।

सदन में पारित बिल मुझ तक नहीं पहुंचेः राज्यपाल

पंजाब विधानसभा में मंगलवार को पारित विभिन्न बिलों पर राज्यपाल ने कहा कि उनके पास अभी कोई बिल नहीं पहुंचा है। बिल आने दीजिए, उन पर सांविधानिक नियमों के तहत ही फैसला लिया जाएगा। कोई भी काम संविधान से बाहर जाकर नहीं होगा।

शिअद ने की जांच की मांग

वरिष्ठ अकाली दल के नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का राज्य के संवैधानिक प्रमुख के साथ टकराव, पंजाब और लोगों के लिए खतरनाक सिद्ध होगा। बुधवार को पार्टी मुख्यालय में बुलाई प्रेस वार्ता में डॉ. चीमा ने कहा कि पंजाबियों के हितों का समाधान करने और उनके प्रमुख मुददों और शिकायतों को हल करने के बजाय मुख्यमंत्री, राज्यपाल के साथ टकराव में उलझे हैं और इस तरह उन्होंने ‘अपने उच्च पद की गरिमा को भी कम किया है।’ 

उन्होंने कहा कि ऐसे मुख्यमंत्री से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं, जिसने लोकतंत्र के पवित्र मंदिर विधानसभा का इस्तेमाल सिख धर्म के प्रतीकों का अपमान करने, यहां तक कि ‘कीर्तनियों’ को अपमानित करने के लिए किया है। डॉ. चीमा ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अब यह स्पष्ट हो गया है कि पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (पीटीयू) के वाइस चांसलर के पद के लिए आवेदकों की स्क्रीनिंग कमेटी का गठन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार नहीं किया गया। 

राज्यपाल ने यह भी खुलासा किया कि 40 लोगों ने आवेदन किया था लेकिन उन्हे साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने बताया कि हालांकि नियुक्ति यूनिवर्सिटी के हित में ध्यान में रखते हुए की गई क्योंकि यह पद दो साल से खाली था। उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार द्वारा जानबूझकर की गई चूकों की एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

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