{"_id":"60e095108ebc3ed6662eaced","slug":"punjab-government-will-now-review-power-agreements-done-by-previous-badal-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब: बादल सरकार के किए बिजली समझौतों की समीक्षा करेगी कैप्टन सरकार, कानूनी रणनीति का एलान जल्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब: बादल सरकार के किए बिजली समझौतों की समीक्षा करेगी कैप्टन सरकार, कानूनी रणनीति का एलान जल्द
Sat, 03 Jul 2021 10:19 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 03 Jul 2021 10:19 PM IST
सार
पंजाब में पिछले सप्ताह 13500 मेगावाट की आपूर्ति के मुकाबले मांग 16000 मेगावाट तक पहुंच गई थी। पीएसपीसीएल ने तुरंत राज्य के बाहर से 7400 मेगावाट बिजली की खरीद शुरू कर दी, जो पिछले साल की गई खरीद से 1000 मेगावाट अधिक है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : twitter.com/capt_amarinder
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को कहा कि पिछली शिअद-भाजपा सरकार द्वारा हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) की समीक्षा की जा रही है। उनकी सरकार द्वारा राज्य पर बड़ा वित्तीय बोझ बने इन समझौतों से निपटने के लिए जल्दी ही कानूनी रणनीति का एलान किया जाएगा।
विज्ञापन
शनिवार को मुख्यमंत्री ने राज्य में बिजली की स्थिति की समीक्षा के लिए बुलाई एक बैठक की अध्यक्षता की। इसके बाद उन्होंने कहा कि बादलों द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान किए गए तर्कहीन बिजली खरीद समझौतों के कारण हो रहे वित्तीय नुकसान से पंजाब को बचाने के लिए कानूनी कार्रवाई की योजनाबंदी की जा रही है। अकाली-भाजपा सरकार द्वारा हस्ताक्षरित ऐसे 139 समझौतों में से केवल 17 ही राज्य की बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त थे जबकि शेष 122 समझौते बिना किसी कारण के 1314 मेगावाट क्षमता की महंगी बिजली खरीद के लिए किए गए थे, जिससे राज्य पर आर्थिक बोझ पड़ा।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने लोगों से बिजली का कम से कम इस्तेमाल करने और बिजली की अल्पकालीन कमी को पूरा करने में सरकार का सहयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछले सप्ताह 13500 मेगावाट की आपूर्ति के मुकाबले मांग 16000 मेगावाट तक पहुंच गई थी। पीएसपीसीएल ने तुरंत राज्य के बाहर से 7400 मेगावाट बिजली की खरीद शुरू कर दी, जो पिछले साल की गई खरीद से 1000 मेगावाट अधिक है। अगर खरीद की मात्रा तुरंत नहीं बढ़ाई जाती, तो राज्य को 1000 मेगावाट की एक और कमी का सामना करना पड़ता, जिससे बिजली संकट और गहरा जाता।
विज्ञापन
तलवंडी साबो प्लांट की इकाई ठप होने से पैदा हुआ संकट
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा संकट तलवंडी साबो पावर प्लांट की 660 मेगावाट बिजली पैदा करने वाली एक इकाई के ठप होने के कारण पैदा हुआ है। हालांकि पीएसपीसीएल द्वारा भारी जुर्माना लगाने के लिए प्लांट को नोटिस जारी कर दिया गया है, राज्य सरकार द्वारा भी बिजली की किल्लत से निपटने के लिए अपने स्तर पर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इन कदमों में 1 से 7 जुलाई तक लोहे की चादर बनाने वाली फैक्ट्रियों और बिजली की भट्ठियों वाले उद्योगों को सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी शामिल है। केवल आवश्यक सेवाओं और सतत प्रसंस्करण उद्योगों को ही इन नियमों से छूट दी गई है।
सभी कृषि खपतकारों को 8 घंटे बिजली सप्लाई : पीएसपीसीएल
पीएसपीसीएल के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के तहत सभी कृषि खपतकारों को 8 घंटे बिजली सप्लाई की जा रही है और प्रदेश के घरेलू, व्यापारिक, छोटे व मझले सप्लाई वाले औद्योगिक खपतकारों पर कोई निर्धारित बिजली कट नहीं लगाया जा रहा। प्रदेश में स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है।