आम आदमी पार्टी ने साधा निशाना, कहा- सत्र छोटा कर लोगों के मुद्दों से भाग रही सरकार
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आम आदमी पार्टी ने विधानसभा का शीतकालीन सत्र छोटा करने को लेकर सत्ताधारी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस लोगों के मुद्दों से भागना चाहती है। नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा और तमाम विधायकों ने विधानसभा में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पहले ही तीन सिटिंग का शीतकालीन सत्र एक मजाक था।
उसमें से भी शुक्रवार शाम और शनिवार सुबह की सिटिंग हटा दी गईं। गुरुवार को भी श्रद्धांजलि देने के बाद एक सिटिंग की जा सकती थी। अमन अरोड़ा ने कहा कि विधानसभा के रूल 14-ए के मुताबिक विधानसभा की साल में कम से कम 40 सिटिंग होनी चाहिए। लेकिन यहां पिछले 12 वर्षों से 18-19 से ज्यादा नहीं हुईं। आप लगातार स्पीकर से सिटिंग बढ़ाने की मांग करती आई है। क्योंकि लोगों के अनगिनत मुद्दों पर चर्चा के लिए यही प्लेटफार्म है।
अकाली सरकार के समय कांग्रेस खुद इसकी मांग करती थी, अब भाग रही है। पिछले साल केरल विधानसभा में 151 सिटिंग हुईं और पंजाब में सिर्फ 19। सीएम कहते हैं कि एक सिटिंग पर 70 लाख का खर्च आता है, आज सिर्फ 11 मिनट में सत्र निपटा दिया गया। लोगों का पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं। प्रिंसिपल बुद्धराम ने कहा कि इस सत्र में 250 स्टार्ड प्रश्न लगे थे, जिनमें से आधे आप विधायकों के थे। आम प्रश्न तो अनगिनत लगे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आप विधायकों के 23 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव मामूली एतराज लगा कर खारिज कर दिए गए।
एक सिटिंग में आप उठाएगी कई मुद्दे
नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने कहा कि पार्टी सिर्फ एक सिटिंग में लोगों से जुड़े ज्यादा से ज्यादा मुद्दे उठाने की कोशिश करेगी। गन्ना किसानों का मुद्दा पूरी तरह हल नहीं हुआ है, अन्य मसले भी हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के कई मुद्दे हैं। घर-घर रोजगार का वादा करके कांग्रेस सत्ता में आई थी। लेकिन कोई रोजगार नहीं दिया गया। आप ने एक दिन पहले इसे लेकर पटियाला में रोष प्रदर्शन भी किया था। 1984 के सिख कत्लेआम के आरोपी कमल नाथ को मध्य प्रदेश का सीएम बनाने का मुद्दा भी पार्टी उठाएगी।
कांग्रेस ने लोकतंत्र के साथ किया मजाक: सुखबीर
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा है कि कांग्रेस ने सत्र की सिर्फ एक बैठक रखने का सुझाव देकर लोकतंत्र के साथ क्रूर मजाक किया है। राज्य के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। कांग्रेस के विधायकों, जिनका बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में बहुमत है, ने शीतकालीन सत्र को दो दिन कम करके सिर्फ एक दिन रखने का सुझाव दिया है।
इस कदम ने लोकतांत्रिक मानदंडों को चोट पहुंचाई है। यह लोगों को धोखा देने और उनकी आवाज कुचलने के बराबर है। सत्र को सिर्फ एक बैठक तक सीमित कर कांग्रेस बहस से भाग रही है। लोगों के मुद्दे उठाने, बिल पास करवाने के लिए एक दिन बहुत कम है। परमिंदर ढींडसा ने बीएसी में इसका विरोध कर मांग की थी कि सत्र को एक सप्ताह का किया जाए। पार्टी शुक्रवार को स्पीकर के पास यह मुद्दा उठा कर सत्र को लंबा करने की मांग करेगी।