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पंजाब सरकार की आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया...एक साल में नहीं बढ़ा राजस्व
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Jun 2018 02:15 PM IST
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पंजाब सरकार
- फोटो : File Photo
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पंजाब सरकार की आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया...कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के हाथ एक साल के कार्यकाल के बाद भी काफी तंग हैं। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद राजस्व उगाही में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही, वहीं सरकारी खर्चों पर भी अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो रहा। रियल इस्टेट के कारोबार में आई भारी गिरावट ने सूबे में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर भी ब्रेक लगा दिया है, जिसके चलते रजिस्ट्री का काम लगभग ठप होकर रह गया है। दूसरी ओर, प्रदेश सरकार को जीएसटी में स्टेट शेयर का हिस्सा भी केंद्र सरकार द्वारा समय पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
केंद्र सरकार ने प्रति दो माह पर जीएसटी के स्टेट शेयर की अदायगी का नियम बनाया हुआ है, जिससे सरकार को अपनी योजनाओं के बारे में फैसला दो माह की देरी के हिसाब से लेना पड़ रहा है। कमजोर आमदनी के मौजूदा हालात में संपत्तियों की रजिस्ट्री के काम में इतनी गिरावट आ गई है कि अप्रैल माह के दौरान राज्य सरकार को इस मद से केवल 177 करोड़ रुपये की आय हुई, जो इसी साल जनवरी माह में 1753 करोड़ रुपये हुई थी। हालांकि इस मद से आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि के क्लेक्टर रेट में कमी के अलावा स्टांप ड्यूटी में भी कटौती की गई है।
लेकिन इसका कुछ असर सरकार की आय बढ़ाने में नहीं दिख रहा। अप्रैल माह में देखा गया है कि सरकार के अपने टैक्सों से आमदनी नहीं बढ़ रही। वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते अप्रैल माह में राज्य सरकार को 3861 करोड़ की आमदनी हुई लेकिन सरकार का खर्च 4206 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अप्रैल माह में राज्य सरकार का राजस्व घाटा 261 करोड़ रुपये का रहा जबकि वित्तीय घाटा 341 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। राज्य सरकार को इस साल अपने संसाधनों से 3093 करोड़ रुपये की आय हुई जोकि पिछले साल के 3207 करोड़ रुपये की आमदन से कम है।
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इन मदों में सरकार की कमाई घटी
टैक्स अप्रैल जनवरी
स्टांप ड्यूटी 177 करोड़ 1753 करोड़
एक्साइज 372 करोड़ 4305 करोड़
अन्य कर 1988 करोड़ 18086 करोड़
नान टैक्स रेवन्यू 722 करोड़ 1768 करोड़
ग्रांट इन एड 44 करोड़ 2668 करोड़
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केंद्र सरकार ने प्रति दो माह पर जीएसटी के स्टेट शेयर की अदायगी का नियम बनाया हुआ है, जिससे सरकार को अपनी योजनाओं के बारे में फैसला दो माह की देरी के हिसाब से लेना पड़ रहा है। कमजोर आमदनी के मौजूदा हालात में संपत्तियों की रजिस्ट्री के काम में इतनी गिरावट आ गई है कि अप्रैल माह के दौरान राज्य सरकार को इस मद से केवल 177 करोड़ रुपये की आय हुई, जो इसी साल जनवरी माह में 1753 करोड़ रुपये हुई थी। हालांकि इस मद से आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि के क्लेक्टर रेट में कमी के अलावा स्टांप ड्यूटी में भी कटौती की गई है।
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लेकिन इसका कुछ असर सरकार की आय बढ़ाने में नहीं दिख रहा। अप्रैल माह में देखा गया है कि सरकार के अपने टैक्सों से आमदनी नहीं बढ़ रही। वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते अप्रैल माह में राज्य सरकार को 3861 करोड़ की आमदनी हुई लेकिन सरकार का खर्च 4206 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अप्रैल माह में राज्य सरकार का राजस्व घाटा 261 करोड़ रुपये का रहा जबकि वित्तीय घाटा 341 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। राज्य सरकार को इस साल अपने संसाधनों से 3093 करोड़ रुपये की आय हुई जोकि पिछले साल के 3207 करोड़ रुपये की आमदन से कम है।
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इन मदों में सरकार की कमाई घटी
टैक्स अप्रैल जनवरी
स्टांप ड्यूटी 177 करोड़ 1753 करोड़
एक्साइज 372 करोड़ 4305 करोड़
अन्य कर 1988 करोड़ 18086 करोड़
नान टैक्स रेवन्यू 722 करोड़ 1768 करोड़
ग्रांट इन एड 44 करोड़ 2668 करोड़