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पंजाब सरकार की रिपोर्ट, पिछले साल के मुकाबले कम जली पराली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Oct 2017 09:14 AM IST
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- फोटो : File Photo
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पंजाब में धान की पराली खेतों में जलाने की घटनाओं में इस बार कमी आई है। पराली के मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रहे केस की सुनवाई के दौरान सोमवार को पंजाब सरकार ने यह रिपोर्ट दी है। केस की अगली सुनवाई आठ नवंबर को होगी।
ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार से कहा कि पराली जलाने की घटनाएं बदस्तूर जारी हैं, जिस पर पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाएं करीब तीस फीसदी कम हुई हैं। 2016 में पराली जलाने के 22269 मामले आए थे, जबकि इस साल 14432 शिकायतें आई हैं। ट्रिब्यूनल ने पूछा कि पराली के प्रबंधन के लिए सरकार ने और क्या कदम उठाए हैं।
इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि इंडस्ट्री को ज्यादा से ज्यादा पराली के उपयोग के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एनजीटी ने सरकार की ओर से अडॉप्ट किए गए पटियाला जिले के गांव कल्लर माजरी पर भी रिपोर्ट मांगी। खेतीबाड़ी विभाग की ओर से बताया गया कि वहां साठ प्रतिशत पराली का प्रबंधन हो चुका है। बाकी का प्रबंधन भी कुछ ही दिन में कर दिया जाएगा।
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सुनवाई के दौरान नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। एनटीपीसी को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई में वह बताएंगे कि कितनी पराली का वह उपयोग करेंगे। उसे कैसे लिया जाएगा।
वहीं, केंद्रीय खेतीबाड़ी मंत्रालय की ओर से भी पक्ष रखा जाएगा कि पंजाब सरकार को पराली प्रबंधन केलिए ग्रांट क्यों नहीं दी गई। गौरतलब है कि पंजाब ने केंद्रीय खेतीबाड़ी मंत्रालय को करीब 1100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भेजा था। इसे ग्रांट-इन-एड केरूप में देने की अपील की थी ताकि पूरे राज्य में पराली का प्रबंधन किया जा सके।
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ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार से कहा कि पराली जलाने की घटनाएं बदस्तूर जारी हैं, जिस पर पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाएं करीब तीस फीसदी कम हुई हैं। 2016 में पराली जलाने के 22269 मामले आए थे, जबकि इस साल 14432 शिकायतें आई हैं। ट्रिब्यूनल ने पूछा कि पराली के प्रबंधन के लिए सरकार ने और क्या कदम उठाए हैं।
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इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि इंडस्ट्री को ज्यादा से ज्यादा पराली के उपयोग के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एनजीटी ने सरकार की ओर से अडॉप्ट किए गए पटियाला जिले के गांव कल्लर माजरी पर भी रिपोर्ट मांगी। खेतीबाड़ी विभाग की ओर से बताया गया कि वहां साठ प्रतिशत पराली का प्रबंधन हो चुका है। बाकी का प्रबंधन भी कुछ ही दिन में कर दिया जाएगा।
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सुनवाई के दौरान नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। एनटीपीसी को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई में वह बताएंगे कि कितनी पराली का वह उपयोग करेंगे। उसे कैसे लिया जाएगा।
वहीं, केंद्रीय खेतीबाड़ी मंत्रालय की ओर से भी पक्ष रखा जाएगा कि पंजाब सरकार को पराली प्रबंधन केलिए ग्रांट क्यों नहीं दी गई। गौरतलब है कि पंजाब ने केंद्रीय खेतीबाड़ी मंत्रालय को करीब 1100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भेजा था। इसे ग्रांट-इन-एड केरूप में देने की अपील की थी ताकि पूरे राज्य में पराली का प्रबंधन किया जा सके।