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आंगनबाड़ी में बच्चों को पंजाब सरकार नहीं दे सकती फल और देसी घी का हलवा, तंग हैं आर्थिक हालात
Fri, 05 Jul 2019 11:07 AM IST
खुशबू गोयल
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 05 Jul 2019 11:07 AM IST
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फाइल फोटो
पंजाब का वित्त विभाग अगर थोड़ी-सी भी दरियादिली दिखाता तो सूबे की आंगनबाड़ियों में बैठना सीख रहे नन्हें बच्चों को भोजन में ताजे फल और देसी घी का हलवा भी मिलता। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बनाए गए नए डाइट चार्ट संबंधी प्रस्ताव को वित्त विभाग ने सरकार का हाथ तंग होने का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है।
वित्त विभाग के इस रवैये को देखते हुए, आंगनबाड़ी वर्करों और अन्य कर्मचारियों को समय पर वेतन और वेतन वृद्धि के मामले भी लटक जाने की आशंका बढ़ गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सूबे की 26656 आंगनबाड़ियों में बच्चों को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नया डाइट प्लान तैयार किया था।
अब तक निर्धारित डाइट प्लान के तहत मीठा दलिया, खीर, पंजीरी, हलवा आदि बच्चों व महिलाओं को उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2016-17 में इसके लिए 16 हजार लाख रुपये का बजट में प्रावधान किया गया था, लेकिन 11755.82 लाख रुपये ही खर्च हुए।
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यह सारा खर्च सप्लीमेंटरी न्यूट्रिशियन प्रोग्राम (एसएनपी) के तहत केंद्र और राज्य द्वारा 50:50 के अनुपात में किया जाता है, हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि 2009-10 से इस अनुपात को 90:10 कर दिया गया है।
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वित्त विभाग के इस रवैये को देखते हुए, आंगनबाड़ी वर्करों और अन्य कर्मचारियों को समय पर वेतन और वेतन वृद्धि के मामले भी लटक जाने की आशंका बढ़ गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सूबे की 26656 आंगनबाड़ियों में बच्चों को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नया डाइट प्लान तैयार किया था।
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अब तक निर्धारित डाइट प्लान के तहत मीठा दलिया, खीर, पंजीरी, हलवा आदि बच्चों व महिलाओं को उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2016-17 में इसके लिए 16 हजार लाख रुपये का बजट में प्रावधान किया गया था, लेकिन 11755.82 लाख रुपये ही खर्च हुए।
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यह सारा खर्च सप्लीमेंटरी न्यूट्रिशियन प्रोग्राम (एसएनपी) के तहत केंद्र और राज्य द्वारा 50:50 के अनुपात में किया जाता है, हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि 2009-10 से इस अनुपात को 90:10 कर दिया गया है।
इस संबंध में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अरुणा चौधरी का कहना है कि उनके विभाग द्वारा तैयार किए नए डाइट प्लान को वित्त विभाग ने मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ियों में लंबे समय से चल रहे डाइट प्लान को बदलकर उसे और पौष्टिक बनाने का फैसला लिया गया था लेकिन यह प्रस्ताव सिरे नहीं चढ़ सका।
दूसरी ओर, प्रदेश की आंगनबाड़ी मुलाजिम समय पर वेतन मिलने और पूरा वेतन दिए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं। दो दिन पहले ही विभाग की मंत्री ने आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियनों के साथ बैठक कर उन्हें समय पर वेतन देना यकीनी बनाने का वादा किया है।
दरअसल सितंबर 2018 में मोदी सरकार की तरफ से 1500 रुपये वर्कर, 1250 मिनी वर्कर और 750 रुपये हेल्पर के मान भत्ते में वृद्धि करने का ऐलान किया था जोकि अक्तूबर 2018 से लागू होना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद पंजाब सरकार ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों के वेतन में डाले जाने वाला 40 प्रतिशत शेयर न डालकर केवल 900 रुपये देने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
दूसरी ओर, प्रदेश की आंगनबाड़ी मुलाजिम समय पर वेतन मिलने और पूरा वेतन दिए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं। दो दिन पहले ही विभाग की मंत्री ने आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियनों के साथ बैठक कर उन्हें समय पर वेतन देना यकीनी बनाने का वादा किया है।
दरअसल सितंबर 2018 में मोदी सरकार की तरफ से 1500 रुपये वर्कर, 1250 मिनी वर्कर और 750 रुपये हेल्पर के मान भत्ते में वृद्धि करने का ऐलान किया था जोकि अक्तूबर 2018 से लागू होना था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद पंजाब सरकार ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों के वेतन में डाले जाने वाला 40 प्रतिशत शेयर न डालकर केवल 900 रुपये देने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।