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हक के लिए हाइकोर्ट गया तो छिन गई नौकरी!

Thu, 21 Aug 2014 05:18 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 21 Aug 2014 05:18 PM IST
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Punjab government employee got justice from High Court

पंजाब स्वास्थ्य विभाग का अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। एक ड्राइवर ने तरक्की के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सरकार व विभाग को नोटिस जारी हो चुका था।

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इसी बीच ड्राइवर की हाजिरी बंद कर दी गई और उससे काम छीन लिया गया। ऐसा तथ्य सामने आने पर जस्टिस महेश ग्रोवर ने स्वास्थ्य विभाग एवं काम छीनने वाले संबंधित अफसरों पर ऐसा जुर्माना लगाने का संकेत दिया है, जो अपने आप में मिसाल हो।
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बलजीत सिंह ने एडवोकेट मोहिंदर सिंह जोशी के माध्यम से दायर याचिका में कहा था कि वह वर्ष 1998 में दिहाड़ीदार ड्राइवर के तौर पर भर्ती हुआ था और वर्ष 2002 तक नियमित होने तक उसे एक्सटेंशन भी मिलती रही।

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विभाग और सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस

Punjab government employee got justice from High Court

दायर याचिका के अनुसार वह ड्राइवर था और यह सेवा वर्ग तीन में आती है, लेकिन उसे चौथा दर्जा कर्मचारी के तौर पर ही माना जाता रहा है। लिहाजा, उसे दर्जा तीन की तरक्की दी जाए।

उसने हाईकोर्ट के छह अगस्त 2002 के फैसले का हवाला भी दिया था, जिसमें वर्ग दो से वर्ग तीन में तरक्की देने के लिए सरकार को बाध्य कर दिया गया था और इसके बाद ऐसे और फैसले भी हाईकोर्ट ने दिए।

इस दलील के साथ हाईकोर्ट ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी किया था। विभाग ने कहा था कि ड्राइवर को चौथा दर्जा में नहीं रखा जाता।

हालांकि इसके साथ ही विभाग ने यह भी कहा था कि अन्य विभागों में हाईकोर्ट के आदेश पर चौथा दर्जा को ड्राइवर की तरक्की दी, लेकिन कहा कि बलजीत सिंह के मामले में विभाग के नियम ऐसा करने की इजाजत नहीं देते।

न्याय से पहले अन्याय पर हाईकोर्ट सख्त

Punjab government employee got justice from High Court

इसी दौरान बलजीत सिंह ने हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित किया कि याचिका डालने के बाद उसकी हाजिरी लगाना बंद कर दी गई और उससे ड्राइविंग का काम छीन लिया गया।

इसे हाईकोर्ट ने कहा है कि विभाग बलजीत सिंह के साथ न्याय से पहले ही अन्याय कर रहा है और ऐसा करके उसने बेईमानी वाला व्यवहार तो किया ही है, बल्कि हाईकोर्ट के नोटिस के बावजूद ऐसा कर घोर उल्लंघन किया। बेंच ने बलजीत सिंह की याचिका मंजूर करते हुए विभाग को उसे तरक्की देने का निर्देश दिया है।

इसके साथ ही कहा है कि किसी कल्याणकारी राज्य से अपने कर्मचारियों के साथ ऐसे व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसलों और नोटिस के बाद सरकार को चाहिए था कि वह स्थिति संभालती, लेकिन यहां काम वापस लेकर गलत किया।

इस टिप्पणी के साथ कहा है कि प्रतिवादियों पर ऐसा जुर्माना लगाने की जरूरत है, जो अपने आप में मिसाल हो। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को भी तलब किया है।

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