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Punjab: ईडी की नजर अब पंजाब पर, सरकार ने रद्द किया शराब कंपनी का एल-1 लाइसेंस संबंधी आवेदन
Wed, 17 Apr 2024 09:24 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 17 Apr 2024 09:24 AM IST
सार
पंजाब आप सूत्रों के अनुसार दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप के प्रमुख नेताओं पर कार्रवाई के बाद ईडी अब पंजाब में आप के नेताओं को घेरने के प्रयासों में जुट गई है। इसके लिए ईडी ने हाल ही में पंजाब के एक्साइज कमिश्नर के आवास पर भी छापा मारा था, लेकिन ईडी के हाथ कुछ नहीं आया। इसके बाद से एक्साइज विभाग के कई अन्य अफसरों को भी ईडी ने अपने रडार पर लिया हुआ है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब सरकार ने नए वित्त वर्ष के लिए शराब की उस कंपनी को एल-1 लाइसेंस देने से इन्कार दिया है, जिसे बीते दो साल के दौरान लाइसेंस प्रदान किया जाता रहा था। यह कंपनी एक्साइज विभाग से एल-1 लाइसेंस हासिल करने वाली एकमात्र कंपनी रही है।
इस साल कंपनी के लाइसेंस संबंधी आवेदन को रद्द करते हुए केवल यही कहा गया है कि चूंकि कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है, लेकिन माना जा रहा है कि कथित शराब घोटाले को लेकर दिल्ली सरकार के खिलाफ जारी ईडी की जांच के मद्देनजर पंजाब सरकार भी सतर्क हो गई है।
दिल्ली सरकार द्वारा जो आबकारी नीति लागू की थी, उसे ही पंजाब में भी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने लागू किया था। दिल्ली सरकार ने पूरी दिल्ली के 32 जोनों के लिए एल-1 लाइसेंस केवल एक कंपनी को सौंपा था, ठीक उसी तरह पंजाब सरकार ने भी एक ही कंपनी को पूरे राज्य में शराब की सप्लाई का उक्त लाइसेंस जारी किया।
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इस कंपनी ने बीते साल करीब 10 हजार करोड़ रुपये की शराब राज्य में सप्लाई की। केवल एक कंपनी को लाइसेंस जारी करने के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य के वित्त मंत्री भी यह दावा कर चुके हैं कि वर्ष 2022-23 के दौरान पंजाब सरकार को शराब की बिक्री से 8841.40 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था और 2023-24 के लिए राजस्व का यह लक्ष्य 10145.95 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
पंजाब में शराब सप्लाई कर रही उक्त कंपनी द्वारा एल-1 लाइसेंस के लिए दोबारा किए गए आवेदन को पटियाला के एक्साइज उपायुक्त ने इस आधार पर रद्द कर दिया है कि कंपनी के दो निदेशकों बरिंदर पाल सिंह और अमनदीप सिंह ढल के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है, इस कारण कंपनी को दोबारा एल-1 लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता है। पटियाला के एक्साइज उपायुक्त द्वारा इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया गया है।
इसी कड़ी में ईडी ने बीते दिनों, पंजाब में एल-1 लाइसेंस हासिल करने वाली उक्त कंपनी के अधिकारियों के घरों पर भी छापे मारे थे। ईडी की तरफ से अब यह दावा किया जा रहा है कि कंपनी के अधिकारियों के घरों से उन्हें अहम दस्तावेज मिले हैं, जिससे पता चला है कि लाइसेंस देने में 100 करोड़ की रिश्वत दी गई।
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इस साल कंपनी के लाइसेंस संबंधी आवेदन को रद्द करते हुए केवल यही कहा गया है कि चूंकि कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है, लेकिन माना जा रहा है कि कथित शराब घोटाले को लेकर दिल्ली सरकार के खिलाफ जारी ईडी की जांच के मद्देनजर पंजाब सरकार भी सतर्क हो गई है।
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दिल्ली सरकार द्वारा जो आबकारी नीति लागू की थी, उसे ही पंजाब में भी आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने लागू किया था। दिल्ली सरकार ने पूरी दिल्ली के 32 जोनों के लिए एल-1 लाइसेंस केवल एक कंपनी को सौंपा था, ठीक उसी तरह पंजाब सरकार ने भी एक ही कंपनी को पूरे राज्य में शराब की सप्लाई का उक्त लाइसेंस जारी किया।
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इस कंपनी ने बीते साल करीब 10 हजार करोड़ रुपये की शराब राज्य में सप्लाई की। केवल एक कंपनी को लाइसेंस जारी करने के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य के वित्त मंत्री भी यह दावा कर चुके हैं कि वर्ष 2022-23 के दौरान पंजाब सरकार को शराब की बिक्री से 8841.40 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था और 2023-24 के लिए राजस्व का यह लक्ष्य 10145.95 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
पंजाब में शराब सप्लाई कर रही उक्त कंपनी द्वारा एल-1 लाइसेंस के लिए दोबारा किए गए आवेदन को पटियाला के एक्साइज उपायुक्त ने इस आधार पर रद्द कर दिया है कि कंपनी के दो निदेशकों बरिंदर पाल सिंह और अमनदीप सिंह ढल के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है, इस कारण कंपनी को दोबारा एल-1 लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता है। पटियाला के एक्साइज उपायुक्त द्वारा इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया गया है।
इसी कड़ी में ईडी ने बीते दिनों, पंजाब में एल-1 लाइसेंस हासिल करने वाली उक्त कंपनी के अधिकारियों के घरों पर भी छापे मारे थे। ईडी की तरफ से अब यह दावा किया जा रहा है कि कंपनी के अधिकारियों के घरों से उन्हें अहम दस्तावेज मिले हैं, जिससे पता चला है कि लाइसेंस देने में 100 करोड़ की रिश्वत दी गई।