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माउंटेनियर जपनीत: दुनिया के पहाड़ जीतने वाली, सरकार से हारी
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली।
Updated Tue, 08 Mar 2016 11:31 AM IST
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दुनिया के पहाड़ जीतने वाली, सरकार से हारी
- फोटो : file
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पूरी दुनिया में पंजाब के नाम का डंका बजाने वाली माउंटेनियर जपनीत कौर के सपनों की उड़ान पर राज्य सरकार ने ग्रहण लगा दिया है। जपनीत ने महज 22 साल की उम्र में यूरोप की माउंट एल्ब्रूस नाम की 5 हजार फीट ऊंची चोटी को फतेह कर भारत का तिरंगा लहराया था। शहर की इस बेटी को सरकार ने कोई आर्थिक मदद न नहीं दी। जिससे उसका भविष्य अब अधर में है। आलम यह है कि बेटी को अपने सपने को साकार करने के लिए सरकारी दफ्तरों और बाबुओं के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हालांकि जपनीत का कहना है कि वह हर हाल में अपने सपने हकीकत में बदलेगी।
जानकारी के मुताबिक जपनीत के माउंटेनियर बनने की कहानी भी दिलचस्प है। बचपन से डिफेंस में जाने का सपना था। लेकिन स्कूल टाइम में एक बार कश्मीर में होने वाले एनसीसी कैंप में उनका चयन हुआ था। वहां बर्फ में स्कींग देख एक आर्मी ऑफिसर ने कहा कि उसमें माउंटेनियर बनने की क्षमता है। उसे इसमें कैरियर बनाना चाहिए। इसके बाद डिफेंस का सपना छोड़कर पहाड़ों का सफर शुरू हो गया था।
कांगड़ी पीक से दिया था बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का संदेश
जपनीत ने अपने कैरियर की शुरुआत 2013 में की थी। लद्दाख में करीब 6 हजार फीट ऊंची चोटी कांगड़ी पीक को फतेह कर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था। उस समय वह महज 20 साल की थी। वह बताती हैं कि इस नारे का मुख्य उद्देश्य पंजाब की लड़कियों को एडवेंचर्स खेलों की ओर प्रेरित करना था। पंजाब में लोगों को माउंट क्लाइंबिग के बारे में जानकारी ही नहीं है।
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सरकार से मदद न मिलने पर टूटी उम्मीदें
जपनीत इस समय माउंट एवरेस्ट की चोटी फतेह करने का सपना देख रही हैं। इसके लिए करीब 27 लाख रुपये की जरूरत है। उसने कई बार इसके लिए सीएम प्रकाश सिंह बादल, शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा सहित इलाके के सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा से मदद की गुहार लगाई। लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं आया है। आखिर में हारकर उसने प्रतियोगिता से बाहर रहने का फैसला लिया है। जपनीत ने बताया कि सरकार से मदद मिल जाए तो वह इस प्रतियोगिता के लिए आवेदन करेंगी।
अब प्राइवेट कंपनियों पर टिकी उम्मीदें
जपनीत ने बताया कि वह फिलहाल अफ्रीका में जल्द होने वाली एक प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं। माउंट किलीमंजारो नामक इस चोटी को फतेह करने के लिए वह प्राइवेट कंपनियों से संपर्क कर रही हैं। ताकि उन्हें आर्थिक मदद मिल सके। इसके अलावा भविष्य में अमरीका की चोटी माउंट डिमाली पर चढ़ाई करने की योजना है। हालांकि प्रतियोगिता का तारीक अभी फाइनल नहीं हुआ है।
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जानकारी के मुताबिक जपनीत के माउंटेनियर बनने की कहानी भी दिलचस्प है। बचपन से डिफेंस में जाने का सपना था। लेकिन स्कूल टाइम में एक बार कश्मीर में होने वाले एनसीसी कैंप में उनका चयन हुआ था। वहां बर्फ में स्कींग देख एक आर्मी ऑफिसर ने कहा कि उसमें माउंटेनियर बनने की क्षमता है। उसे इसमें कैरियर बनाना चाहिए। इसके बाद डिफेंस का सपना छोड़कर पहाड़ों का सफर शुरू हो गया था।
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कांगड़ी पीक से दिया था बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का संदेश
जपनीत ने अपने कैरियर की शुरुआत 2013 में की थी। लद्दाख में करीब 6 हजार फीट ऊंची चोटी कांगड़ी पीक को फतेह कर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था। उस समय वह महज 20 साल की थी। वह बताती हैं कि इस नारे का मुख्य उद्देश्य पंजाब की लड़कियों को एडवेंचर्स खेलों की ओर प्रेरित करना था। पंजाब में लोगों को माउंट क्लाइंबिग के बारे में जानकारी ही नहीं है।
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सरकार से मदद न मिलने पर टूटी उम्मीदें
जपनीत इस समय माउंट एवरेस्ट की चोटी फतेह करने का सपना देख रही हैं। इसके लिए करीब 27 लाख रुपये की जरूरत है। उसने कई बार इसके लिए सीएम प्रकाश सिंह बादल, शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा सहित इलाके के सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा से मदद की गुहार लगाई। लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं आया है। आखिर में हारकर उसने प्रतियोगिता से बाहर रहने का फैसला लिया है। जपनीत ने बताया कि सरकार से मदद मिल जाए तो वह इस प्रतियोगिता के लिए आवेदन करेंगी।
अब प्राइवेट कंपनियों पर टिकी उम्मीदें
जपनीत ने बताया कि वह फिलहाल अफ्रीका में जल्द होने वाली एक प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं। माउंट किलीमंजारो नामक इस चोटी को फतेह करने के लिए वह प्राइवेट कंपनियों से संपर्क कर रही हैं। ताकि उन्हें आर्थिक मदद मिल सके। इसके अलावा भविष्य में अमरीका की चोटी माउंट डिमाली पर चढ़ाई करने की योजना है। हालांकि प्रतियोगिता का तारीक अभी फाइनल नहीं हुआ है।