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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Election 2022: Punjab Farmer Unions Announce Sanyukt Samaj Morcha to Contest Vidhan Sabha Chunav 2022

Punjab Politics: पंजाब के 22 किसान संगठनों ने बनाया संयुक्त समाज माेर्चा, बलबीर सिंह राजेवाल करेंगे नेतृत्व

Sat, 25 Dec 2021 04:46 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 25 Dec 2021 04:46 PM IST
सार

Punjab Assembly Election 2022: किसान आंदोलन के बाद से पंजाब की राजनीति में किसानों के उतरने की चर्चाएं तेज थीं। इससे पहले भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के गुरनाम सिंह चढ़ूनी पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। 

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Punjab Election 2022: Punjab Farmer Unions Announce Sanyukt Samaj Morcha to Contest Vidhan Sabha Chunav 2022
चंडीगढ़ में किसान संगठनों ने की संयुक्त समाज मोर्चा के गठन की घोषणा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन करके लौटे पंजाब के 32 किसान संगठनों का संयुक्त किसान मोर्चा शनिवार को दोफाड़ हो गया। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 32 में से 22 किसान संगठनों ने संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) का गठन कर दिया, जबकि तीन संगठन जल्द ही चुनाव लड़ने वाले गुट से जुड़ेंगे। बाकी किसान संगठनों ने राजनीति से दूर रहते हुए समाजसेवा जारी रखने का एलान किया। 

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चुनाव नहीं लड़ने का फैसला करने वाले किसान संगठनों की 9 सदस्यीय समिति के नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल और डा. दर्शन पाल ने अपील की है कि सियासी चुनाव लड़ने वाले संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नाम का इस्तेमाल न करें। शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दल्लेवाल और डा. दर्शन पाल ने कहा कि एसकेएम, देश भर में 400 से अधिक विभिन्न वैचारिक संगठनों का मंच है और किसानों के मुद्दों पर ही बना है।
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उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बहिष्कार का कोई आह्वान नहीं है और यहां तक कि चुनाव लड़ने की कोई समझ भी नहीं है। लोगों ने एसकेएम सरकार से उनका हक दिलाने के लिए बनाया है और तीन कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद संघर्ष को स्थगित कर दिया गया है, शेष मांगों पर 15 जनवरी, 2022 को होने वाली बैठक में निर्णय लिया जाएगा। पंजाब में 32 संगठनों के बारे में उन्होंने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में संयुक्त रूप से चल रही आम सहमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लिया गया है कि चुनाव में भाग लेने वाले व्यक्ति या संगठन संयुक्त किसान मोर्चा या 32 संगठनों के नामों का उपयोग नहीं कर सकते हैं। ऐसा करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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इन संगठनों ने चुनाव न लड़ने का लिया फैसला

दल्लेवाल और डा. दर्शन पाल ने बताया कि 32 संगठनों में क्रांतिकारी किसान यूनियन (डॉ. दर्शनपाल), बीकेयू क्रांतिकारी (सुरजीत फूल), बीकेयू सिद्धूपुर (जगजीत दल्लेवाल), आजाद किसान कमेटी दोआबा (हरपाल संघ), जय किसान आंदोलन (गुरबख्श बरनाला), दसूहा गन्ना संघर्ष कमेटी (सुखपाल दफ्फार), किसान संघर्ष कमेटी पंजाब (इंद्रजीत कोटबुधा), लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी (बलदेव सिरसा) और कीर्ति किसान यूनियन पंजाब (हरदेव संधू) ने चुनाव लड़ने के खिलाफ स्टैंड लिया है।

चुनाव लड़ने को 22 संगठन हुए एकजुट, तीन और जुड़ेंगे

केंद्र सरकार के खिलाफ तीन कृषि कानूनों की जंग जीत चुके 32 किसान संगठनों में से 22 किसान जत्थेबंदियों ने शनिवार को ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ (एसएसएम) का गठन करते हुए पंजाब विधानसभा के 2022 में होने वाले चुनाव में उतरने का फैसला किया है। एसएसएम प्रदेश की सभी 117 विधानसभा सीटों पर सीनियर किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा। एसएसएम में इस बात पर भी सहमति बन गई है कि राजेवाल इस मोर्चे के मुख्यमंत्री चेहरा होंगे। यहां शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में राजेवाल समेत कई किसान नेताओं ने दावा किया कि 32 में से 22 जत्थेबंदियां तो एसएसएम से जुड़ गई हैं और तीन अन्य जत्थेबंदियां अगले कुछ दिन में इसमें मिल जाएंगी।

राजेवाल ने कहा कि पंजाब जिस हालात से गुजर रहा है, उसे देखते हुए किसान जत्थेबंदियों ने मिलकर फैसला किया है कि राज्य में अब राजसी बदलाव होना चाहिए। एसएसएम राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब का कायाकल्प करने की जरूरत है। सिस्टम गंदा हो गया है, जिसे सुधारने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे रिवायती सियासी दलों की बातों में न आएं और सभी किसान गांवों में मोर्चा संभाल लें। इस मोर्चे में आम लोग ही शामिल होंगे, धनवान नहीं।

आम आदमी पार्टी से कोई बात नहीं हुई : राजेवाल

यह पूछे जाने पर कि एसएसएम आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करेगा या खुद राजेवाल आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा हो सकते हैं? उन्होंने कहा कि यह केवल मीडिया की चर्चा है। उनकी इस बारे में आप से कोई बात नहीं हुई है। आप से गठबंधन के बारे में अन्य किसान नेताओं ने कहा कि इस बारे में कोई चर्चा नहीं है और हम 117 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह भविष्य की बातें हैं, फिलहाल हम संयुक्त समाज मोर्चे का एलान कर रहे हैं। किसान नेता हरमीत सिंह कादियां ने कहा कि किसान आंदोलन और इसकी जीत के बाद लोगों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। यह फैसला दरअसल लोगों की राय और दबाव में लिया गया है।

संयुक्त किसान मोर्चा बना रहेगा : राजेवाल

विधानसभा चुनाव लड़ने के मुद्दे पर अलग-अलग हुई जत्थेबंदियों के बारे में पूछे जाने पर राजेवाल ने कहा कि शुक्रवार को मुल्लांपुर दाखा में 32 जत्थेबंदियों की बैठक में फैसला लिया गया था कि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) बना रहेगा और अगर कोई चुनाव लड़ना चाहता है तो लड़े। जो नहीं लड़ना चाहता, वह न लड़े। उन्होंने यह कहा कि डा. दर्शनपाल और लखोवाल की अगुवाई वाली चार जत्थेबंदियों ने चुनाव लड़ने का विरोध किया था। ऐसे में चुनाव लड़ने की इच्छुक जत्थेबंदियां संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले चुनाव नहीं लड़ेंगी और उन्होंने संयुक्त समाज मोर्चा बना लिया है। उधर, डा. दर्शन पाल ने कहा कि एसकेएम, देश भर में 400 से अधिक विभिन्न वैचारिक संगठनों का मंच है, जो किसानों के मुद्दों पर ही बना है। चुनाव के बहिष्कार का कोई आह्वान नहीं है। तीन कृषि कानून निरस्त होने के बाद संघर्ष स्थगित कर दिया गया है, लेकिन शेष मांगों पर 15 जनवरी, 2022 को एसकेएम की बैठक में फैसला लिया जाएगा।

राजनीति में प्रवेश नहीं करेगी भाकियू एकता उगराहां, किसी को समर्थन भी नहीं 

भले ही कई किसान संगठनों ने सियासत में हिस्सा लेने की घोषणा कर दी है लेकिन पंजाब की सबसे मजबूत भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां यूनियन सियासत में प्रवेश नहीं करने के अपने फैसले पर अडिग है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने फिर स्पष्ट किया है कि उनकी जत्थेबंदी का काम राजनीति नहीं है बल्कि उनका वास्ता किसान व जनहित मुद्दों से है। शनिवार को खास बातचीत में उगराहां ने दोहराया कि उनकी जत्थेबंदी, चुनाव में भाग नहीं लेगी।



किसी सियासी दल अथवा संगठन का समर्थन करने के बारे में उगराहां ने कहा कि भाकियू उगराहां द्वारा किसी भी संगठन का समर्थन करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। इस मुद्दे पर यूनियन का स्टैंड स्पष्ट है। लोग अपनी मर्जी से किसी दल को वोट डालें या नहीं डालें। उगराहां ने कहा कि किसानों, मजदूरों, नौजवानों व छोटे व्यापारियों की कई अहम परेशानियां हैं जिनके समाधान के लिए यूनियन अपनी आवाज बुलंद करेगी। इन मुद्दों को लेकर यूनियन किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी। नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी की वजह से किसान, मजदूर आदि खुदकुशी कर रहे हैं। छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट हो रहा है। यूनियन इन मसलों के समाधान के लिए संघर्ष करेगी।  

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