पंजाब चुनाव: युवा कैप्टंस से रूबरू हुए कांग्रेस के कप्तान अमरिंदर सिंह
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प्रशांत किशोर की टीम आई-पैक ने कॉफी विद कैप्टन के दौरान कॉलेज व डिस्ट्रिक्ट कैप्टन बनाए थे। रविवार को जीएमसीएच-32 ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह इन कैप्टन्स के साथ रूबरू हुए।
पंजाब भर से आए करीब एक हजार नौजवानों ने कैप्टन से मिल कर पंजाब के लिए उनके विजन का समर्थन किया। साथ ही अपने विचार सांझे किए कि कैसे 2017 विधानसभा के लिए वे कैप्टन की मुहिम का हिस्सा बन कर अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कैप्टन के साथ सेल्फी भी लीं। कैप्टन ने नौजवानों के मुद्दों पर चर्चा करते हुए अपनी सलाह दी। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में यूथ बहुत अहम भूमिका निभाएंगे। उन्हें युवाओं को अपने साथ देख कर बहुत खुशी हो रही है। वह युवाओं के साथ हैं और तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक युवाओं का एक बार फिर से सिस्टम पर विश्वास कायम नहीं हो जाता।
उन्होंने कहा कि पार्टी और उन्होंने हमेशा ही चुनाव में युवाओं के योगदान पर काफी ध्यान दिया है। इस बार भी 35-40 फीसदी सीटों पर नौजवान ही चुनाव लड़ेंगे। जालंधर से आई एक युवती ने कहा कि वह सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए अपना योगदान देगी। वहीं, महिंद्रा कॉलेज के एक छात्र का कहना था कि बादल परिवार ने राज नहीं सेवा के नाम पर पंजाब के सारे कारोबार पर कब्जा कर लिया है। सिर्फ कैप्टन ही पंजाब में एक बार फिर से खुशहाली वाले दिन ला सकते हैं। इससे पहले आई-पैक की आउटरीच व डिजिटल मीडिया टीम ने इन नौजवानों को विशेष ट्रेनिंग दी।
आई-पैक की टीमों ने कॉलेजों में जाकर युवाओं को कैप्टन बनाया था
गौरतलब है कि कॉफी विद कैप्टन कैंपेन के दौरान आई-पैक की टीमों ने कॉलेजों में जाकर युवाओं को कैप्टन बनाया था। वहीं, पंजाब दा कैप्टन फेसबुक पेज के जरिए भी लोग जुड़े थे।
हैरानी हुई कि कांग्रेस भी कैंपस में आती है
ट्रेनिंग सेशन के दौरान लुधियाना के एक छात्र ने कहा कि जब भी कोई सियासी पार्टी कैंपस में आती थी तो लगता था कि अकाली होंगे या आम आदमी पार्टी वाले। जब आई-पैक का नाम सुना तो लगा कि कोई नई सियासी पार्टी होगी।
फिर पता चला कि कांग्रेस है तो हैरानी हुई कि कांग्रेस भी कैंपस में आती है। इस पर पूरा ऑडिटोरियम ठहाकों से गूंज उठा। उसने कहा कि वह कैप्टन के लिए आया है और उन्हें सीएम बनते देखना चाहता है। आई-पैक के वॉलंटियर्स ने उसे समझाया कि ऐसा नहीं है, एनएसयूआई कैंपस में काम करती है।