Punjab Election 2022: जनता के मुद्दों से दूर परस्पर उलझे रहे नेता, रोजगार से शुरू हुआ प्रचार धर्म-क्षेत्रवाद पर थमा
इस बार पंजाब में चुनाव प्रचार की शुरुआत रोजगार के मुद्दे से हुई जो कि प्रचार खत्म होने तक धर्म और क्षेत्रवाद के मुद्दे पर उलझ कर रह गया। सूबे में चुनाव प्रचार की शुरुआत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने से मानी जाएगी। लेकिन असलियत में यह शुरुआत दिसंबर में उस समय हो गई थी।
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पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 के लिए करीब तीन महीने तक जोरशोर से चला प्रचार समाप्त होने के बाद रविवार को सूबे की जनता दोपहर होते-होते पूरे मूड के साथ वोट डालने घर से निकल आई। इस बार पंजाब में चुनाव प्रचार की शुरुआत रोजगार के मुद्दे से हुई जो कि प्रचार खत्म होने तक धर्म और क्षेत्रवाद के मुद्दे पर उलझ कर रह गया।
हालांकि सूबे में चुनाव प्रचार की शुरुआत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने से मानी जाएगी। लेकिन असलियत में यह शुरुआत दिसंबर में उस समय हो गई थी जब प्रदेश के बेरोजगार और कांट्रैक्ट टीचर पानी की टंकियों पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने पंजाब का दौरा करके आम लोगों के लिए गारंटियों की झड़ी लगा दी।
केजरीवाल ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी के साथ ही नाराज कांट्रैक्ट टीचरों को पक्का करने का वादा कर अपने साथ जोड़ा तो सत्ताधारी कांग्रेस समेत सभी सियासी दल हरकत में आ गए। शिअद ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया तो कांग्रेस ने सूबे में तुरंत प्रभाव से बिजली बिल माफ करने का एलान कर दिया।
इसके बाद, महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये, बुढ़ापा पेंशन, बेरोजगारी भत्ता बढ़ाने, किसान के कर्ज माफी का दायरा बढ़ाने जैसे ढेरों वादों के साथ सभी सियासी दल चुनाव प्रचार में कूद गए। हालांकि आम लोगों के बीच ‘मुफ्त’ को लेकर आलोचना भी हुई, लेकिन सभी की नजरें सियासी दलों द्वारा किए जा रहे वादों पर टिक गईं।
इस बीच, प्रदेश में आम आदमी पार्टी का प्रचार अभियान रंग लाया और बाकी दलों की चिंता बढ़ने लगी। विभिन्न मीडिया सर्वे भी आप को सबसे ज्यादा सीटें मिलती दिखाने लगे। कुछ सर्वे में पंजाब में अगली सरकार आप की बनना तय बताया गया।
फरवरी आरंभ होने तक हालात यह दिखाई देने लगे कि इस बार सूबे में मुख्य चुनावी मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच होगा, जबकि शिअद-बसपा और भाजपा-पीएलसी-संयुक्त अकाली दल के गठबंधन तीसरे-चौथे स्थान पर खिसक जाएंगे। हालांकि मतदान का दिन करीब आते-आते पूरा दृश्य बदल गया।
केजरीवाल का यह बयान कि पंजाब के हिंदू डरे हुए हैं, को कांग्रेस ने हाथोंहाथ लिया और आप पर पंजाब के हिंदू-सिखों को धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाया। भाजपा और कई हिंदू संगठन भी इस मुद्दे पर आप के खिलाफ प्रचार में उतर आए। इस तरह पूरा चुनाव प्रचार जनता के मुद्दों को पीछे छोड़ सियासी दलों और नेताओं के बीच कुर्सी की खींचतान की शक्ल ले गया।
कुमार विश्वास के बयान के बाद केजरीवाल पर चौतरफा हमला
इसी बीच, पंजाब के चुनाव प्रचार के माहौल में कवि कुमार विश्वास की एंट्री हुई। विश्वास ने केजरीवाल पर खालिस्तानी संगठनों से साठगांठ के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद सभी सियासी दल आप के खिलाफ लामबंद हो गए। इस दौरान पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के राहुल और प्रियंका गांधी प्रचार कर रहे थे। उन्होंने केजरीवाल पर आरोपों को आतंकवाद से जोड़ते हुए हवा दी। हालांकि कुमार विश्वास अपने आरोपों का कोई सबूत पेश नहीं किया, लेकिन विपक्षी दलों ने आप को घेरने के लिए विश्वास के बयान को ही हथियार बना लिया। इसी दौरान मुख्यमंत्री चन्नी ने भी यूपी-बिहार के पंजाब में बसे लोगों का मुद्दा उठाया, जिसे सिख वोटों के ध्रुवीकरण की संज्ञा दी गई।