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पंजाब को मिल सकता नया DGP: वीके भावरा ने किया तीन माह की छुट्टी का आवेदन, केंद्र भेजने का भी आग्रह... अब चार अधिकारी रेस में
Fri, 01 Jul 2022 10:54 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 01 Jul 2022 10:54 PM IST
सार
मौजूदा डीजीपी को हटाने की अटकलों के पीछे राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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पंजाब के डीजीपी वीके भावरा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब के डीजीपी वीके भावरा ने हटाए जाने की अटकलों के बीच तीन माह की छुट्टी पर जाने का आवेदन कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से डेपुटेशन पर केंद्र भेजने का आग्रह भी किया है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी पत्र लिखा है। डीजीपी भावरा अगले हफ्ते पांच जुलाई से छुट्टी पर जा सकते हैं।
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सूत्रों के अनुसार डीजीपी को बदले जाने की अटकलें के तेज होने के साथ ही कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नए डीजीपी की दौड़ में हैं। इनमें एसटीएफ के डीजीपी हरप्रीत सिंह सिद्धू, डीजीपी (प्रशासन) व मुख्यमंत्री के विशेष प्रिंसिपल सेक्रेटरी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे गौरव यादव, डीजीपी (सुरक्षा) शरद सत्य चौहान और स्पेशल डीजीपी संजीव कालरा का नाम प्रमुख है।
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मगर नए डीजीपी का फैसला तभी हो सकेगा, जब भावरा की जगह नए डीजीपी के लिए पंजाब सरकार आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल केंद्र सरकार को भेजेगी। फिलहाल, दौड़ में शामिल अधिकारियों में से हरप्रीत सिद्धू और संजीव कालरा का पलड़ा भारी माना जा रहा है।
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कहीं इस वजह से तो नहीं हटाने की अटकलें
मौजूदा डीजीपी को हटाने की अटकलों के पीछे राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सीएमओ के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इन मामलों को लेकर डीजीपी से नाराज चल रहे हैं और यही कारण भी है कि जब वह सिद्धू मूसेवाला के घर पहुंचे थे तो डीजीपी उनके साथ नहीं थे।
इस बीच, डीजीपी भावरा अगर हटाए जाते हैं तो पंजाब में बीते छह महीने के दौरान यह चौथा बदलाव होगा। पिछली कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के समय दिनकर गुप्ता राज्य के डीजीपी रहे लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनते ही गुप्ता भी लंबी छुट्टी पर चले गए। तब मुख्यमंत्री चन्नी ने इकबालप्रीत सिंह सहोता को डीजीपी नियुक्त किया। मगर चन्नी और तत्कालीन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू में ठन गई।
बाद में सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को डीजीपी बनाया गया लेकिन विधानसभा चुनाव निकट आते ही वीके भावरा को डीजीपी लगा दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने पर डीजीपी पर कोई बदलाव नहीं किया गया लेकिन सूबे में बढ़ी आपराधिक घटनाओं के बाद और संगरूर लोकसभा सीट पर मिली हार को लेकर आप सरकार राज्य पुलिस के ढुलमुल कामकाज को मुख्य वजह मान रही है और इसके लिए डीजीपी भावरा पर गाज गिरना तय है।