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पीसीए की मुश्किलें बढ़ीं, फिजियोथेरेप्सिट ने लगाए गंभीर आरोप
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली।
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:16 AM IST
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पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन
- फोटो : file
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पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं। पीसीए की निलंबित महिला फिजियोथेरेपिस्ट ने मैनेजमेंट व हरासमेंट व गलत तरीके से नौकरी से निकालने का आरोप लगाया है। इस मामले में महिला ने राष्ट्रीय महिला आयोग को भी शिकायत दी थी। आयोग ने 8 जनवरी 2016 को मोहाली डीसी को इस मामले की जांच कर रिपोर्ट के आदेश दिए थे। लेकिन अस्सी दिन के बाद भी बात सिरे नहीं चढ़ पाई है।
वहीं, पीडि़त महिला के वकील पंकज चांदगोठिया ने इस संबंधी डीसी मोहाली व पीसीए को कानूनी नोटिस भेजा है। साथ ही साफ किया है कि 15 दिन में यदि उनके क्लाइंट को पिछली सैलरी के साथ बहाल नहीं किया जाता है। साथ ही मामले की जांच नहीं हुई तो वह तो वह इस मामले को लेकर आयोग और अदालत की शरण लेंगे।
इस संबंधी सिल्वर सिटी थीम्स निवासी रूचि सैनी के वकील ने बताया कि उन्हें पीसीए ने एक जुलाई 2015 को एक साल के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर नियुक्त किया था। उनके क्लाइंट ने जल्दी ही अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली। लेकिन नौकरी ज्वाइन करते समय उन्हें जो जॉब प्रोफाइल व जिम्मेदारियां बताई गई थी। यहां तक जो शर्ते नियुक्ति पत्र पर लिखी गई थी। उहें वह नहीं दी गई। ऐसे में पीसीए ने उन्हें जानबूझकर अन्य कामों में लगाए रखा गया।
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इसके बाद उनसे ऐसे काम करवाए गए। जिससे एक महिला की मर्यादा की गरिमा को ठेस पहुंचती है। उसे पीसीए ने योग्यता व क्षमा के आधार पर फिजियोथेरेप्सिट नियुक्त किया था। एक महिला फिजियोथेरेप्सिट केवल महिलाओं को अटैंड करती है।
बॉल थ्रो व फिल्डिंग का काम करवाया गया
इसके बाद भी उसे परेशान करने से पीसीए वाले नहीं हटे। उसकी जॉब प्रोफाइल से हटकर काम करवाए गए। जिसमें उसे बॉल थ्रो करना व फिल्डिंग जैसे काम करवाए गए। जो कि ट्रेनर की देखरेख में होते है। इससे पहले उसे कहा गया कि एक अलग महिला ट्रेनर भी मुहैया करवाई जाएगी। लेकिन जब उन्होंने आवाज तो उन्होंने उसके मुंह को बंद करने की कोशिश की।
कोई वूमेन सेफ्टी सेल नहीं
वकील ने बताया कि पीसीएम में को भी वूमेन सेफ्टी सेल व कोई हरामेंट कमेटी नहीं है। जो कि नियमों का सरासर उल्ंघन है। ऐेस में वहां पर महिला कि स के पास अपना पक्ष रखे।
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वहीं, पीडि़त महिला के वकील पंकज चांदगोठिया ने इस संबंधी डीसी मोहाली व पीसीए को कानूनी नोटिस भेजा है। साथ ही साफ किया है कि 15 दिन में यदि उनके क्लाइंट को पिछली सैलरी के साथ बहाल नहीं किया जाता है। साथ ही मामले की जांच नहीं हुई तो वह तो वह इस मामले को लेकर आयोग और अदालत की शरण लेंगे।
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इस संबंधी सिल्वर सिटी थीम्स निवासी रूचि सैनी के वकील ने बताया कि उन्हें पीसीए ने एक जुलाई 2015 को एक साल के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर नियुक्त किया था। उनके क्लाइंट ने जल्दी ही अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली। लेकिन नौकरी ज्वाइन करते समय उन्हें जो जॉब प्रोफाइल व जिम्मेदारियां बताई गई थी। यहां तक जो शर्ते नियुक्ति पत्र पर लिखी गई थी। उहें वह नहीं दी गई। ऐसे में पीसीए ने उन्हें जानबूझकर अन्य कामों में लगाए रखा गया।
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इसके बाद उनसे ऐसे काम करवाए गए। जिससे एक महिला की मर्यादा की गरिमा को ठेस पहुंचती है। उसे पीसीए ने योग्यता व क्षमा के आधार पर फिजियोथेरेप्सिट नियुक्त किया था। एक महिला फिजियोथेरेप्सिट केवल महिलाओं को अटैंड करती है।
बॉल थ्रो व फिल्डिंग का काम करवाया गया
इसके बाद भी उसे परेशान करने से पीसीए वाले नहीं हटे। उसकी जॉब प्रोफाइल से हटकर काम करवाए गए। जिसमें उसे बॉल थ्रो करना व फिल्डिंग जैसे काम करवाए गए। जो कि ट्रेनर की देखरेख में होते है। इससे पहले उसे कहा गया कि एक अलग महिला ट्रेनर भी मुहैया करवाई जाएगी। लेकिन जब उन्होंने आवाज तो उन्होंने उसके मुंह को बंद करने की कोशिश की।
कोई वूमेन सेफ्टी सेल नहीं
वकील ने बताया कि पीसीएम में को भी वूमेन सेफ्टी सेल व कोई हरामेंट कमेटी नहीं है। जो कि नियमों का सरासर उल्ंघन है। ऐेस में वहां पर महिला कि स के पास अपना पक्ष रखे।
सीनियर लड़कों की करवाते थे फिजियोथेरिपी
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन
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निलंबित महिला फिजियोथेरेपिस्ट ने बताया कि पीसीए ने उनसे ट्रेनर की जॉब के साथ लड़कों की फिजियोथेरेपी भी करवाई। उसे विभिन्न आयु वर्ग के लड़के जिनमें सीनियर भी शामिल है। जब उसे सीनियर लड़कों के साथ काम करना होता था उस समय शारीरिक उत्पीडऩ और शर्मीदगी का विषय था। कई उन्होंने इसका विरोध किया। लेकिन हर बार नौकरी से निकालने की धमकी देकर उनकी आवाज को बंद किया गया।
पीसीए में हुई घायल, रिकॉर्ड में दिखाया गैर हाजिर
इक्कीस अक्तूबर 2015 को उसका दायां सही टखने में मौच और फ्रैक्चर आ गया। यह उस समय हुआ जब उससे महिला टीम के साथ फिजियोथेरेपिस्ट की जगह ट्रेनर के रूप में काम करवाया जा रहा था। उसने टीम को कई प्रकार की एक्सरसाइज करवाई। जो कि ट्रेनर का काम है। इस दौरान एक सेशन में गिर गई। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई। वह डयूटी के दौरान घायल हुई। हालांकि पीसीए ने इस चीज मे भी गेम कर दी । रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर कहा कि वह उस दिन डयूटी पर नही थी। यह उसकी सेवाओं को खत्म करने का ड्रॉमा था। ताकि पीसीए वाले इंजुरी के आरोप से बच जाए।
बिना पक्ष सुने निकाल दिया नौकरी से
उसकी चोट इतनी अधिक थी कि उसे इलाज के लिए फोर्टिस अस्पताल में भरती करवाया गया। उसे अपने खर्चे पर प्लास्टर व अन्य दवाई ली। जबकि पीसीए मैनेजमेंट ने किसी भी प्रकार की कोई सहायता नहीं । अभी तक वह समस्या का सामना ही कररही थी। कि 31 अक्तूबर 2015 को उन्हें हटा दिया।
पीसीए में हुई घायल, रिकॉर्ड में दिखाया गैर हाजिर
इक्कीस अक्तूबर 2015 को उसका दायां सही टखने में मौच और फ्रैक्चर आ गया। यह उस समय हुआ जब उससे महिला टीम के साथ फिजियोथेरेपिस्ट की जगह ट्रेनर के रूप में काम करवाया जा रहा था। उसने टीम को कई प्रकार की एक्सरसाइज करवाई। जो कि ट्रेनर का काम है। इस दौरान एक सेशन में गिर गई। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई। वह डयूटी के दौरान घायल हुई। हालांकि पीसीए ने इस चीज मे भी गेम कर दी । रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर कहा कि वह उस दिन डयूटी पर नही थी। यह उसकी सेवाओं को खत्म करने का ड्रॉमा था। ताकि पीसीए वाले इंजुरी के आरोप से बच जाए।
बिना पक्ष सुने निकाल दिया नौकरी से
उसकी चोट इतनी अधिक थी कि उसे इलाज के लिए फोर्टिस अस्पताल में भरती करवाया गया। उसे अपने खर्चे पर प्लास्टर व अन्य दवाई ली। जबकि पीसीए मैनेजमेंट ने किसी भी प्रकार की कोई सहायता नहीं । अभी तक वह समस्या का सामना ही कररही थी। कि 31 अक्तूबर 2015 को उन्हें हटा दिया।