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कैप्टन की सरदारी पर सवाल: पंजाब में नाराज खेमे को हल्के में लेना पड़ा भारी, सीएम के खिलाफ लामबंदी शुरू
Sat, 12 Jun 2021 02:33 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 12 Jun 2021 02:33 PM IST
सार
पंजाब कांग्रेस में कलह को खत्म करने के लिए पार्टी हाईकमान ने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। ये समिति नाराज विधायकों से लेकर सीएम तक से बातचीत कर चुकी है। इसके बाद पार्टी अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंप दी गई है।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
कांग्रेस आलाकमान की तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में क्लीनचिट मिलते ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर नाराज नेताओं के हमले तेज हो गए हैं। बेअदबी और कोटकपूरा फायरिंग मामले में मुख्यमंत्री की कार्यक्षमता पर सवाल उठाने वाला विरोधी खेमा अब भ्रष्टाचार के मुद्दे उठा कैप्टन की छवि को धूमिल करने में जुट गया है।
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विधायक परगट सिंह द्वारा उठाए भ्रष्टाचार के मुद्दे और कैप्टन की कार्यप्रणाली पर सवाल इतने गंभीर हैं कि खुद कैप्टन को अपने ट्वीटर हैंडल पर इनका खंडन करना पड़ा। जालंधर छावनी हलके से विधायक परगट सिंह हालांकि इस कद के नेता नहीं हैं कि कैप्टन से सीधे टक्कर ले सकें, लेकिन उनकी प्रेस कांफ्रेंस से यह साबित हो गया कि पूरा विरोधी खेमा परगट के पीछे खड़ा है।
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इस बीच, कैप्टन समर्थक मंत्री और विधायक खामोश हैं, जिसके चलते कैप्टन को खुद मुकाबले में उतरना पड़ा है। विरोधी खेमे के कुछ करीबियों का कहना है कि कैप्टन सरकार द्वारा जनता से किए वादे पूरे नहीं करने के अलावा उनके निकटतम अफसरों और नेताओं द्वारा बनाई गई संपत्तियों के मुद्दे को और उठाया जाएगा। सिद्धू और प्रताप बाजवा की फिलहाल खामोशी के बारे में कहा गया है कि समिति की रिपोर्ट पर आलाकमान के फैसले का इंतजार है। अगर विरोधी खेमे के नेताओं की अनदेखी हुई तो विवाद और गरमाएगा।
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कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत द्वारा विधायक परगट सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने को लेकर भी प्रदेश कांग्रेस में नई चर्चा छिड़ गई है। परगट सिंह कांग्रेस में युवा वर्ग का प्रतिनिधि चेहरा हैं और चुनाव के करीब उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई पार्टी को ही नुकसान पहुंचा सकती है। दरअसल परगट सिंह हमेशा से नवजोत सिद्धू के सबसे अधिक करीबी रहे हैं। माना जा रहा है कि कैप्टन के खिलाफ सिद्धू जहां सोशल मीडिया के जरिए ही हमलावर रहे हैं, वहीं परगट के जरिए वे सार्वजनिक तौर पर कैप्टन को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। परगट के ताजा आरोपों से साफ है कि विरोधी खेमा अब कैप्टन के खिलाफ फिर से लामबंद होने लगा है।