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नवजोत सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया संभलने का मौका, एक्शन लिया पर बनाए रखा सम्मान
Fri, 07 Jun 2019 11:20 AM IST
खुशबू गोयल
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 07 Jun 2019 11:20 AM IST
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सिद्धू बनाम कैप्टन
- फोटो : फाइल फोटो
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिद्धू को संभलने का एक मौका दिया है। उन्होंने एक्शन तो लिया, पर विरोधी सिद्धू का सम्मान भी बनाए रखा। कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय से चल रही जंग में कैप्टन की तरफ से सिद्धू को पहला झटका दिया गया।
सिद्धू से लोकल बॉडीज विभाग वापस लिए जाने से भले ही यह संकेत गया कि कैप्टन ने सिद्धू के पर कतर दिए हैं, लेकिन इस फैसले में भी कैप्टन ने एक अनुभवी, सह्रदय और सीनियर नेता के अपने रुतबे का ही परिचय दिया है। उन्होंने सिद्धू पर एक्शन लेते हुए भी इस बात का पूरा ध्यान रखा कि सिद्धू के सम्मान को ठेस न पहुंचे।
उन्होंने सिद्धू से एक बड़ा विभाग वापस लिया और दूसरे बड़े विभाग की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। साफ है कि कैप्टन ने अपने अधीनस्थ बड़बोले मंत्री पर बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की और उन्हें संभलने का पूरा मौका दिया है।
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सिद्धू से लोकल बॉडीज विभाग वापस लिए जाने से भले ही यह संकेत गया कि कैप्टन ने सिद्धू के पर कतर दिए हैं, लेकिन इस फैसले में भी कैप्टन ने एक अनुभवी, सह्रदय और सीनियर नेता के अपने रुतबे का ही परिचय दिया है। उन्होंने सिद्धू पर एक्शन लेते हुए भी इस बात का पूरा ध्यान रखा कि सिद्धू के सम्मान को ठेस न पहुंचे।
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उन्होंने सिद्धू से एक बड़ा विभाग वापस लिया और दूसरे बड़े विभाग की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। साफ है कि कैप्टन ने अपने अधीनस्थ बड़बोले मंत्री पर बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की और उन्हें संभलने का पूरा मौका दिया है।
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दरअसल, नवजोत सिद्धू को राहुल गांधी का करीबी माना जाता रहा है। कैप्टन के खिलाफ बार-बार की जाने वाली उनकी बयानबाजी की वजह भी यही मानी जाती रही कि सिद्धू जानते हैं कि पार्टी आलाकमान के निर्देशों के खिलाफ कैप्टन कोई कदम नहीं उठाएंगे। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद परिस्थितियां बदली नजर आने लगी हैं।
कैप्टन द्वारा बठिंडा में पार्टी की हार का मुख्य कारण सिद्धू के बयान को ठहराए जाने के बाद सिद्धू फौरन दिल्ली गए परंतु दो दिन इंतजार करने के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से देशभर के चुनाव परिणामों के उलट पंजाब में कांग्रेस को शानदार जीत दिलाने से पार्टी में उनकी छवि सबसे कद्दावर नेता की बन गई है।
इसमें संदेह नहीं कि पंजाब के मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के उनके फैसले पर आलाकमान की ओर से पूरी सहमति दी गई। यानी सिद्धू लोकल बाडीज विभाग में लगातार अपनी उपलब्धियां गिनाकर भी विभाग पर कब्जा बरकरार नहीं रख सके। फिर भी, कैप्टन ने सिद्धू को बिजली विभाग जैसा बड़ा महकमा देकर उन्हें अपने साथ जोड़े रखने का बेहतरीन मौका दिया है।
इस विभाग के जरिए भी सिद्धू आम लोगों से सीधे तौर पर जुड़े रहेंगे। देखना होगा कि कैप्टन की इस पहल का सिद्धू क्या जवाब देते हैं।
कैप्टन द्वारा बठिंडा में पार्टी की हार का मुख्य कारण सिद्धू के बयान को ठहराए जाने के बाद सिद्धू फौरन दिल्ली गए परंतु दो दिन इंतजार करने के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से देशभर के चुनाव परिणामों के उलट पंजाब में कांग्रेस को शानदार जीत दिलाने से पार्टी में उनकी छवि सबसे कद्दावर नेता की बन गई है।
इसमें संदेह नहीं कि पंजाब के मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के उनके फैसले पर आलाकमान की ओर से पूरी सहमति दी गई। यानी सिद्धू लोकल बाडीज विभाग में लगातार अपनी उपलब्धियां गिनाकर भी विभाग पर कब्जा बरकरार नहीं रख सके। फिर भी, कैप्टन ने सिद्धू को बिजली विभाग जैसा बड़ा महकमा देकर उन्हें अपने साथ जोड़े रखने का बेहतरीन मौका दिया है।
इस विभाग के जरिए भी सिद्धू आम लोगों से सीधे तौर पर जुड़े रहेंगे। देखना होगा कि कैप्टन की इस पहल का सिद्धू क्या जवाब देते हैं।
उल्लेखनीय है कि नवजोत सिद्धू और कैप्टन के बीच मनमुटाव की कड़ियां पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू की कांग्रेस में एंट्री से शुरु हो गई थीं। बात उस समय ज्यादा बिगड़ी जब कैप्टन की सलाह के बावजूद सिद्धू अपनी मरजी से पाकिस्तान में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने चले गए।
वहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख से गले मिलकर सिद्धू जहां पूरे देश में आलोचना का केंद्र बन गए वहीं कैप्टन के भीतर का सैनिक भी आहत हुआ। कैप्टन ने सिद्धू के कदम की खुलकर आलोचना की। यहां तक कहा कि अगर मैं होता तो पाक सेना प्रमुख की तरफ से मुंह फेर लेता। तब सिद्धू इस भावना को समझ नहीं पाए और उनका बयान आया- कैप्टन तो सेना के कैप्टन हैं। मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं। इस बयान ने पंजाब में सियासी भुचाल खड़ा कर दिया और राज्य के सभी मंत्री लामबंद होकर सिद्धू के इस्तीफे की मांग करने लगे।
उस समय भी कैप्टन ने सूझबूझ से इस विवाद को शांत करा दिया। लेकिन सिद्धू किसी न किसी मौके कैप्टन पर निशाना साधने के अपने अभियान में डटे रहे। ताजा विवाद लोकसभा चुनाव के दौरान बठिंडा में सिद्धू के बयान से उठा, जिसमें कैप्टन ने माना कि कांग्रेस के स्टार कैंपेनर होने के बावजूद सिद्धू के बयान के कारण बठिंडा में कांग्रेस हार गई। कैप्टन ने यह भी कहा कि लोकल बाडीज विभाग की कार्यप्रणाली अच्छी नहीं रही, जिसके कारण कांग्रेस को शहरों में कम वोट मिले। उसी समय उन्होंने विभाग के फेरबदल के संकेत भी दे दिए थे।
वहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख से गले मिलकर सिद्धू जहां पूरे देश में आलोचना का केंद्र बन गए वहीं कैप्टन के भीतर का सैनिक भी आहत हुआ। कैप्टन ने सिद्धू के कदम की खुलकर आलोचना की। यहां तक कहा कि अगर मैं होता तो पाक सेना प्रमुख की तरफ से मुंह फेर लेता। तब सिद्धू इस भावना को समझ नहीं पाए और उनका बयान आया- कैप्टन तो सेना के कैप्टन हैं। मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं। इस बयान ने पंजाब में सियासी भुचाल खड़ा कर दिया और राज्य के सभी मंत्री लामबंद होकर सिद्धू के इस्तीफे की मांग करने लगे।
उस समय भी कैप्टन ने सूझबूझ से इस विवाद को शांत करा दिया। लेकिन सिद्धू किसी न किसी मौके कैप्टन पर निशाना साधने के अपने अभियान में डटे रहे। ताजा विवाद लोकसभा चुनाव के दौरान बठिंडा में सिद्धू के बयान से उठा, जिसमें कैप्टन ने माना कि कांग्रेस के स्टार कैंपेनर होने के बावजूद सिद्धू के बयान के कारण बठिंडा में कांग्रेस हार गई। कैप्टन ने यह भी कहा कि लोकल बाडीज विभाग की कार्यप्रणाली अच्छी नहीं रही, जिसके कारण कांग्रेस को शहरों में कम वोट मिले। उसी समय उन्होंने विभाग के फेरबदल के संकेत भी दे दिए थे।