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दिल्ली से आहत लौटे अमरिंदर सिंह: हाईकमान ने पक्ष तो सुना लेकिन माना नहीं, एक जुलाई पंजाब कांग्रेस के लिए अहम

Thu, 24 Jun 2021 02:48 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 24 Jun 2021 02:48 AM IST
सार

पंजाब कांग्रेस में जारी मतभेद खत्म होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस बार पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का पक्ष तो सुना लेकिन उनकी बात नहीं मानी। वहीं हाईकमान ने सिद्धू के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने से भी इनकार कर दिया है। इसके बाद मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह काफी आहत हुए हैं।

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Punjab CM Captain Amarinder Singh returns to Chandigarh after meet to high command
कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

पार्टी हाईकमान से मिलकर लौटे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस बार काफी आहत दिखाई दे रहे हैं। पिछली बार उन्हें हाईकमान ने जैसे पूरी ताकत सौंप दी थी लेकिन इस बार हाईकमान का रवैया उनके प्रति बदला-बदला नजर आया है। पता चला है कि कैप्टन ने इस बार जो भी मांगें कमेटी के सामने रखीं, उन्हें ध्यानपूर्वक सुना तो गया लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।

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कैप्टन की मुख्य मांग विधायक नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर थी। कैप्टन ने सिद्धू की तीखी बयानबाजी से पार्टी का अनुशासन बिगड़ने का हवाला भी दिया लेकिन हाईकमान फिलहाल सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई करने के मूड में नहीं है और न ही कमेटी ने इस संबंध में कोई हामी भरी। उधर, कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने दावा किया है कि एक जुलाई को पार्टी मामले को सुलझा लेगी। 
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जानकारी के अनुसार कैप्टन ने कमेटी के समक्ष साफ कर दिया है कि वे सिद्धू को अपने साथ लेकर नहीं चल सकते और अपनी सरकार में उन्हें कोई भी पद नहीं देंगे। इसके अलावा कैप्टन ने सिद्धू को पार्टी से अलग-थलग करने की मांग भी की लेकिन कमेटी ने इससे स्पष्ट इनकार कर दिया, जिससे कैप्टन न सिर्फ आहत हुए हैं बल्कि उन्होंने कमेटी को साफ कह दिया कि विवाद का हल जल्द से जल्द निकाला जाए और वह इस मामले को लेकर बार-बार दिल्ली नहीं आ सकते। 

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उन्होंने कमेटी के सामने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने नवजोत सिद्धू को लेकर कैप्टन की शिकायत का खुलासा तो नहीं किया लेकिन साफ कर दिया कि सिद्धू के बारे में फैसला सोनिया गांधी लेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेता पार्टी का हिस्सा हैं और इन नेताओं की पार्टी को जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी नेताओं को पूरा सम्मान दिया जाता है और यह परंपरा बरकरार रहेगी। उन्होंने सिद्धू को पार्टी के निकाले जाने संबंधी अटकलों से भी इनकार किया और कहा कि पूरा मामला पार्टी अध्यक्ष के ध्यान में है। तीन सदस्यीय कमेटी एक बार फिर सिद्धू को बुलाकर पूरे विवाद को समाप्त करने का निर्णायक प्रयास करने वाली है।

एक जुलाई तक समाधान संभव: रावत
पंजाब कांग्रेस में मचा घमासान आगामी एक जुलाई तक शांत हो जाएगा। यह दावा पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने किया है। उन्होंने कहा कि विधायकों के बेटों ने अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी की पेशकश को अस्वीकार कर दिया है। वहीं, आलाकमान की तीन सदस्यीय समाधान समिति नवजोत सिंह सिद्धू को एक बार फिर से दिल्ली बुलाकर बातचीत करेगी और पूरे विवाद को इसी हफ्ते समाप्त कर लिया जाएगा।

विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी के फैसले से बढ़ी थी तकरार

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के प्रकरण को अलग कर दिया जाए तो कैप्टन द्वारा हाल ही में दो कांग्रेस विधायकों के बेटों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की पेशकश ने पंजाब कांग्रेस में भुचाल ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रधान समेत अनेक मंत्री और विधायक कैप्टन के इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए।  

कैप्टन ने भी कुछ मंत्रियों के जरिये अपने फैसले के समर्थन में बयान जारी करवाकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। आखिरकार बीते सोमवार को सांसद प्रताप बाजवा विवाद सुलझाने आगे आए और उन्होंने अपने भाई फतेहजंग बाजवा और विधायक राकेश पांडे को पत्र भेजकर आग्रह किया कि वे मुख्यमंत्री द्वारा उनके बेटों को अनुकंपा के आधार पर दी गई नौकरी की पेशकश को अस्वीकार कर दें। 

बाजवा के इस पत्र के बाद माना जा रहा था कि दोनों विधायक इसे स्वीकार कर लेंगे और प्रदेश कांग्रेस में यह विवाद समाप्त हो जाएगा। हरीश रावत के बुधवार के बयान से साबित हो गया कि दोनों विधायक मान गए हैं और गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वे मुख्यमंत्री की पेशकश को लौटा देंगे।

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