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हरसिमरत के इस्तीफे पर कैप्टन बोले- इस्तीफा अकाली दल की नौटंकी, क्यों नहीं छोड़ा एनडीए का साथ
Thu, 17 Sep 2020 10:42 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 17 Sep 2020 10:42 PM IST
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हरसिमरत कौर बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय कैबिनेट से हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को अकाली दल की एक और नौटंकी करार दिया है। उन्होंने कहा कि कृषि बिलों पर केंद्र सरकार की तरफ से अकालियों के मुंह पर तमाचा मारने के बावजूद अकाली दल ने अभी तक सरकार से गठबंधन से नाता नहीं तोड़ा। सीएम ने कहा कि हरसिमरत का इस्तीफा पंजाब के किसानों को मूर्ख बनाने के ढकोसले से अधिक और कुछ नहीं।
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कैप्टन ने कहा- अकाली दल किसान जत्थेबंदियों को गुमराह करने में सफल नहीं होंगे।’ उन्होंने इस कार्रवाई को अपर्याप्त और बहुत देर से उठाया कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसिमरत का केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा बहुत देरी से लिया फैसला है, जिससे पंजाब के किसानों की किसी किस्म की मदद नहीं होगी।
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उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल ने इससे पहले रुख अपनाया होता और इन अध्यादेशों के विरुद्ध राज्य सरकार का समर्थन किया होता तो शायद यह बिल पास होने के हालात पैदा न होते और केंद्र को यह अध्यादेश लाने और किसान विरोधी बिलों को संसद में रखने से पहले 10 बार सोचना पड़ता।
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सीएम ने कहा कि अभी भी अकाली दल का केंद्रीय कैबिनेट से अपनी अकेली मंत्री का इस्तीफा दिलाने के फैसले का किसानों से कोई सरोकार नहीं बल्कि अपना राजनैतिक भविष्य बचाने और बादलों के छिन चुके राजनीतिक करिअर को बचाने की कवायद है। कैप्टन ने कहा कि किसानों का रोष और राज्य की किसान जत्थेबंदियों का दबाव ही था, जिन्होंने बादलों को अपने पहले स्टैंड से पलटने के लिए मजबूर कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘क्या सुखबीर और हरसिमरत और उनकी मंडली ने इस बात की तरफ ध्यान ही नहीं दिया कि यह कानून पंजाब की कृषि और अर्थव्यवस्था तक किस हद तक नुकसान पहुंचा देंगे। सत्ता की लालसा में वह इतने अंधे हो गए कि उन्होंने इन अध्यादेशों के खतरों से जानबूझ कर आंखें बंद कर ली।’
कैप्टन ने कहा कि अब इनका सुनियोजित खेल पूरी तरह जगजाहिर हो चुका है और पंजाब में अपना वोट बैंक बचाने के लिए कृषि अध्यादेशों के विरुद्ध सार्वजनिक स्टैंड लिए बिना अकालियों के पास और कोई चारा नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने अकालियों को पहले भी नकार किया और फिर से उनको नकार देंगे।