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Punjab: एक बार नहीं... 100 बार राष्ट्रपति शासन लगाओ, मुझे कुर्सी की परवाह नहीं, भगवंत मान ने क्यों कही ये बात
Wed, 21 Feb 2024 10:32 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 21 Feb 2024 10:32 PM IST
सार
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने बुधवार को किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसान शुभकरण की मौत पर दुख जताया। उन्होंने केंद्र और हरियाणा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा सरकार किसानों को नहीं रोकती तो शायद शुभकरण सिंह आज जिंदा होता।
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पंजाब के सीएम भगवंत मान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल)
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विस्तार
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर बुधवार को जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के साथ खड़ी है। राष्ट्रपति शासन लगाने की जो चेतावनी दी जा रही है, वह उससे डरते नहीं है। वह कार्रवाई से नहीं डरते नहीं है। एक बार नहीं 100 बार राष्ट्रपति शासन लगाओ उनको कुर्सी की परवाह नहीं है।
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मान ने कहा कि इस ओर ध्यान देना चाहिए कि किसान इस समय प्रदर्शन पर क्यों उतारू हो रखे हैं। शुभकरण की मौत का बहुत अफसोस है। सभी मांगे मानी जानी चाहिए। मांगों पर गौर किया जाना चाहिए और केंद्र सरकर को जिद्द छोड़नी चाहिए।
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चार में से तीन बैठकों में देर रात तक खुद हिस्सा लिया और केंद्र सरकार से मांग की है कि किसानों की मांगें पूरी करें ताकि वह खेतों में वापस पहुंच सकें। किसानों की सभी मांगें केंद्र सरकार से संबंधित है और केंद्र को ही इन्हें पूरा करना है। इसके अलावा इन मांगों पर सहमति बनाना किसान यूनियनों का काम है। हर बार ही वह ये कहते रहे हैं कि किसानों को संघर्ष का रास्ता न अपनाना पड़े। बॉर्डर पर एक घटना हुई, जिसमें 21 वर्षीय नौजवान की मौत हो गई। उसकी माता की पहले ही मौत हो चुकी है और दादी ने उसका पालना पोषण किया।
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दो बहनों का अकेला भाई था। मान ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर ही वहां पहुंचा था। अगर किसानों को वहां नहीं रोका जाता तो आज शायद वह जिंदा होता, क्योंकि सिर्फ मांगों को लेकर दिल्ली कूच करना चाहते हैं। मान ने कहा कि आजादी में भी किसानों ने सबसे ज्यादा शहादत दी हैं।
किसानों का हरियाणा के साथ कोई झगड़ा ही नहीं है तो फिर उन्हें पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर रोकने का क्या तुक बनता है। किसान बिना कोई नुकसान शंभू समेत अन्य बॉर्डर पहुंच गए हैं। अगर हरियाणा सरकार उनको न रोकती तो वह आगे दिल्ली की ओर बढ़ जाते और इस तरह की कोई घटना नहीं होती। तीन साल से मोदी सरकार ने किसानों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया बल्कि वह दूसरों पार्टियों के नेताओं को तोड़ने का काम करती रही।