पंजाबः बादल की बस का मोगा के बाद एक और कांड
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मोगा कांड के बाद मुख्यमंत्री बादल की कंपनी की बस का सड़क पर उतरते ही एक और मामला सामने आ गया है। इस बार ऑर्बिट बस ने एक बाइक सवार को टक्कर मार दी। घायल को तपा के सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया है। लोगों के रोष जताने के बाद पुलिस बस को थाने में ले आई। बाद में बस को छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार जावेद खां नामक व्यक्ति बाइक पर बरनाला-बंठिडा मुख्यमार्ग से जा रहा था। बठिंडा की तरफ से आ रही एक ऑर्बिट बस ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में जख्मी जावेद खां को मिनी सहारा क्लब के वालंटियरों ने सिविल अस्पताल, तपा में भर्ती करवाया।
सूचना पाकर मौके पर पहुंची तपा पुलिस ने बस को कब्जे में लेकर डीएसपी तपा के दफ्तर के बाहर खड़ा कर दिया। थाना तपा के प्रभारी मलकीत सिंह चीमा ने कहा कि जावेद खां नाबालिग है। जब वह सड़क पर बाइक लेकर आया तो बस को देखकर घबरा गया और लड़खड़ाकर गिर गया।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद जावेद को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि परिजनों ने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से इनकार के बाद बस को छोड़ दिया गया।
सच्चाई जानने के लिए इश्तहार का सहारा
ऑर्बिट बस कांड की सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने इश्तहार का सहारा लिया है। इस मामले के बारे में चल रही चर्चाओं और घटना के समय बस में सफर कर रहे कुछ लोगों के सामने आने के बाद पुलिस ने नए तरीके से जांच शुरू की है। पुलिस ने बस की सवारियों से अखबारों के जरिये सामने आने की अपील की है।
सवारियों को इश्तिहार में लिखे गए पुलिस अफसरों के फोन नंबरों और ईमेल पर तथ्यों सहित सूचना देने की अपील की गई है। एक निजी अस्पताल में काम करने वाले एक नौजवान ने इस घटना के दौरान बस में सफर करने का दावा करते फोन पर बताया कि मीडिया में घटना के बारे में छप रही जानकारी सच्चाई से कोसों दूर है।
इस नौजवान ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि इस घटना की सारी सच्चाई कुछ दिन में सामने आ जाएगी। पुलिस का खुफिया विंग भी घटना के समय बस में सफर कर रहे लोगों को पता लगाने में जुटा है। जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार के घर की सुरक्षा के लिए एक एएसआई की निगरानी में पांच पुलिस कर्मी तैनात कर दिए हैं। परिवार के घर से बाहर जाते समय गाड़ी के अलावा पुलिस की तरफ से जवान भेजे जाते हैं।
पुलिस पहले ही कर चुकी है शिनाख्त परेड का दावा
मामले में गिरफ्तार बस चालक रणजीत सिंह, कंडक्टर सुखविंदर सिंह, हेल्पर (हाकर) गुरदीप सिंह निवासी मोगा और अमर राम उर्फ दाना को अदालत ने 21 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
इन आरोपियों के शिनाख्त परेड करवाने से सहमत न होने के कारण अदालत ने सरकारी पक्ष की शिनाख्त परेड के लिए दी अर्जी भी रद्द कर दी थी। जबकि डीसी दफ्तर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस अधिकारी मृतका अर्शदीप के नाबालिग भाई आकाशदीप से शिनाख्त परेड करवाने और बस में करीब 14-15 सवारियां होने का दावा भी कर चुके हैं।