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पानी के मसले पर शांतिपूर्ण संघर्ष को तैयार रहें लोग: बादल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Wed, 16 Mar 2016 10:33 AM IST
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प्रकाश सिंह बादल, पंजाब सीएम
- फोटो : amar ujala
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पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि बिना मेहनत के इंसाफ नहीं मिलता। पानी के अहम मुद्दे पर इंसाफ के लिए पंजाब के लोगों को शांतिपूर्ण व लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। बादल विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि राइपेरियन सिद्धांतों के अधीन हमें बुनियादी अधिकार से वंचित करनेे वाले किसी भी फैसले को लागू करने का सवाल ही नहीं उठता। यह हमारे बच्चों के भविष्य और राज्य के हित में कुर्बानियां देने को तैयार रहने का समय है। उन्होंने कहा कि वह राज्य के बाहर पानी की एक बूंद नहीं जाने देंगे, इसके लिए खून का एक-एक कतरा बहाने को तैयार हैं।
राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस को समेटते हुए बादल ने कहा कि कुर्बानियों के बिना इंसाफ नहीं मिल सकता। न ही घर बैठे रहने या बिना मेहनत किए यह मिलता है। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एसवाईएल के लिए एक्वायर जमीन को डी-नोटीफाई करने की कोई जरूरत नहीं थी, अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह 2004 में ऐसा कर लेते।
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इस फैसले के लिए कांग्रेस द्वारा खुद को जिम्मेदार ठहराने के जवाब में बादल ने कहा कि अगर ऐसा है तो यह फैसला कांग्रेस कार्यकाल में क्यों नहीं लिया गया। सीएम ने कहा कि पानी का मसला सिर्फ किसानों का नहीं, हर वर्ग इससे प्रभावित होता है।
उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण को ऐतिहासिक बताया। बादल ने कहा कि आजादी के समय से ही पंजाब ने अन्याय और अत्याचार का सामना किया है। चंडीगढ़ पंजाब को देने का मामला रद्द कर दिया गया। बादल ने फिर संघीय ढांचे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्यों को शक्तिशाली बनाने को योजना आयोग खत्म कर दिया।
इससे पहले सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने नशों के मुद्दे पर बिक्रम मजीठिया और बेअदबी के मामले में डिप्टी सीएम सुखबीर बादल का इस्तीफा मांगा। चन्नी ने किसानों की बर्बादी और युवाओं के नशों की गिरफ्त में आने के मुद्दे उठाए। साथ ही कहा कि एनडीए सरकार बनने के बाद पंजाब के मसलों का क्या हल हुआ।
चन्नी ने कहा कि बादल ने ही 1978 में हरियाणा सरकार को पत्र लिख कर नहर निर्माण को तीन करोड़ रुपये मांगे। सत्ताधारियों ने वह पत्र सदन में रखने को लेकर चन्नी को घेरा।
चन्नी ने कहा कि एसवाईएल की जमीन एक्वायर करने का नोटिफिकेशन भी बादल ने जारी किया। 1997 से 2002 तक इनकी ही सरकार में सारे केस हारे गए। क्योंकि मजबूती से पैरवी नहीं की गई। चन्नी ने बिजली और इंडस्ट्री के मुद्दे पर भी सरकार पर हमला बोला।
इससे पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अपने भाषण की शुरुआत में सिखी से जुड़े मुद्दे पर कुछ बोला, जिससे अकाली विधायक भड़क उठे। उन्होंने वड़िंग से सदन से माफी मांगने की मांग रखी। वड़िंग बोलते रहे कि उन्होंने ऐसा कुछ आपत्तिजनक नहीं कहा है, पर अकाली नहीं माने। आखिर हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। उसके बाद वड़िंग ने माफी मांगी तो अकालियों ने उन्हें बोलने दिया। वड़िंग ने भी सत्ताधारियों पर तीखे वार किए। खडूर साहिब उप चुनाव, 1984 के दंगों, नशों और ऑर्बिट बसों से हादसों में लोगों की मौतों जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा।
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उन्होंने कहा कि राइपेरियन सिद्धांतों के अधीन हमें बुनियादी अधिकार से वंचित करनेे वाले किसी भी फैसले को लागू करने का सवाल ही नहीं उठता। यह हमारे बच्चों के भविष्य और राज्य के हित में कुर्बानियां देने को तैयार रहने का समय है। उन्होंने कहा कि वह राज्य के बाहर पानी की एक बूंद नहीं जाने देंगे, इसके लिए खून का एक-एक कतरा बहाने को तैयार हैं।
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राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस को समेटते हुए बादल ने कहा कि कुर्बानियों के बिना इंसाफ नहीं मिल सकता। न ही घर बैठे रहने या बिना मेहनत किए यह मिलता है। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एसवाईएल के लिए एक्वायर जमीन को डी-नोटीफाई करने की कोई जरूरत नहीं थी, अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह 2004 में ऐसा कर लेते।
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इस फैसले के लिए कांग्रेस द्वारा खुद को जिम्मेदार ठहराने के जवाब में बादल ने कहा कि अगर ऐसा है तो यह फैसला कांग्रेस कार्यकाल में क्यों नहीं लिया गया। सीएम ने कहा कि पानी का मसला सिर्फ किसानों का नहीं, हर वर्ग इससे प्रभावित होता है।
उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण को ऐतिहासिक बताया। बादल ने कहा कि आजादी के समय से ही पंजाब ने अन्याय और अत्याचार का सामना किया है। चंडीगढ़ पंजाब को देने का मामला रद्द कर दिया गया। बादल ने फिर संघीय ढांचे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्यों को शक्तिशाली बनाने को योजना आयोग खत्म कर दिया।
इससे पहले सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने नशों के मुद्दे पर बिक्रम मजीठिया और बेअदबी के मामले में डिप्टी सीएम सुखबीर बादल का इस्तीफा मांगा। चन्नी ने किसानों की बर्बादी और युवाओं के नशों की गिरफ्त में आने के मुद्दे उठाए। साथ ही कहा कि एनडीए सरकार बनने के बाद पंजाब के मसलों का क्या हल हुआ।
चन्नी ने कहा कि बादल ने ही 1978 में हरियाणा सरकार को पत्र लिख कर नहर निर्माण को तीन करोड़ रुपये मांगे। सत्ताधारियों ने वह पत्र सदन में रखने को लेकर चन्नी को घेरा।
चन्नी ने कहा कि एसवाईएल की जमीन एक्वायर करने का नोटिफिकेशन भी बादल ने जारी किया। 1997 से 2002 तक इनकी ही सरकार में सारे केस हारे गए। क्योंकि मजबूती से पैरवी नहीं की गई। चन्नी ने बिजली और इंडस्ट्री के मुद्दे पर भी सरकार पर हमला बोला।
इससे पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अपने भाषण की शुरुआत में सिखी से जुड़े मुद्दे पर कुछ बोला, जिससे अकाली विधायक भड़क उठे। उन्होंने वड़िंग से सदन से माफी मांगने की मांग रखी। वड़िंग बोलते रहे कि उन्होंने ऐसा कुछ आपत्तिजनक नहीं कहा है, पर अकाली नहीं माने। आखिर हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। उसके बाद वड़िंग ने माफी मांगी तो अकालियों ने उन्हें बोलने दिया। वड़िंग ने भी सत्ताधारियों पर तीखे वार किए। खडूर साहिब उप चुनाव, 1984 के दंगों, नशों और ऑर्बिट बसों से हादसों में लोगों की मौतों जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा।