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बादलों की बसों पर सरकार ने कसा शिकंजा, नई ट्रांसपोर्ट नीति को दी मंजूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 06 Jul 2017 09:16 AM IST
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Punjab Cabinate meeting
- फोटो : File Photo
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सरकार ने बादलों द्वारा नियंत्रित ट्रांसपोर्ट पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को नई ट्रांसपोर्ट नीति को मंजूरी दे दी। प्रवक्ता ने बताया कि नई नीति के मुताबिक सरकार बादलों द्वारा नियंत्रित लग्जरी बस सेवाओं में स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग का हिस्सा बढ़ाएगी, ताकि इन पर सरकार का नियंत्रण हो सके।
अंतरराज्यीय, प्वाइंट टु प्वाइंट सुपर इंटीगरल कोच सर्विस में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी ताकि ज्यादा राजस्व वाले रूटों पर माफिया का नियंत्रण खत्म किया जा सके।विजिलेंस और पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जोकि दो माह में सड़कों पर दौड़ रही अवैध बसों पर लगाम कसेगी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशानुसार तैयार की गई ड्राफ्ट ट्रांसपोर्ट स्कीम 2017 पर तीस दिन तक लोगों केसुझाव लिए जाएंगे।
सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए अदालत से तीन माह का समय लेगी, ताकि सड़कों से बड़ी संख्या में बसें हट जाने केकारण लोगों को परेशानी न हो। स्कीम लागू होने के बाद 5432 बसों के रूट एक्सटेंशन, डाइवर्जन, 6700 मिनी बस और 78 लग्जरी कोच के परमिट कैंसिल करके नए सिरे से अलॉट किए जाएंगे। नए नियमों से बसों का टाइम टेबल तय किया जाएगा, एसटीयू व निजी बसों को बस स्टैंड पर रुकने के लिए बराबर का समय दिया जाएगा।
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निजी ऑपरेटरों केलिए सिंगल रूट पर मासिक रोस्टर बनाया जाएगा। एक साल में इसके लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर तैयार किया जाएगा। परमिट में रजिस्ट्रेशन नंबर होगा, परमिट की कॉपी वाहन में लगानी जरूरी होगी। अगर किसी एक रूट के लिए निर्धारित परमिट से ज्यादा आवेदन आते हैं तो ड्रॉ केजरिए अलॉटमेंट की जाएगी। किसी एक रूट पर कुल परमिट के 25 प्रतिशत से ज्यादा किसी एक कंपनी को नहीं दिए जाएंगे। परमिट पांच साल के लिए मान्य होगा। रिन्युअल के बाद फिर वह पांच साल तक मान्य होगा। बस बदलने या परमिट होल्डर की मौत केअलावा परमिट ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। रूट में बदलाव या बढ़ोतरी नहीं हो सकेगी। ऑपरेटर तीन माह केनोटिस पर परमिट सरेंडर कर सकेगा।
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अंतरराज्यीय, प्वाइंट टु प्वाइंट सुपर इंटीगरल कोच सर्विस में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी ताकि ज्यादा राजस्व वाले रूटों पर माफिया का नियंत्रण खत्म किया जा सके।विजिलेंस और पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जोकि दो माह में सड़कों पर दौड़ रही अवैध बसों पर लगाम कसेगी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशानुसार तैयार की गई ड्राफ्ट ट्रांसपोर्ट स्कीम 2017 पर तीस दिन तक लोगों केसुझाव लिए जाएंगे।
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सरकार इस स्कीम को लागू करने के लिए अदालत से तीन माह का समय लेगी, ताकि सड़कों से बड़ी संख्या में बसें हट जाने केकारण लोगों को परेशानी न हो। स्कीम लागू होने के बाद 5432 बसों के रूट एक्सटेंशन, डाइवर्जन, 6700 मिनी बस और 78 लग्जरी कोच के परमिट कैंसिल करके नए सिरे से अलॉट किए जाएंगे। नए नियमों से बसों का टाइम टेबल तय किया जाएगा, एसटीयू व निजी बसों को बस स्टैंड पर रुकने के लिए बराबर का समय दिया जाएगा।
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निजी ऑपरेटरों केलिए सिंगल रूट पर मासिक रोस्टर बनाया जाएगा। एक साल में इसके लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर तैयार किया जाएगा। परमिट में रजिस्ट्रेशन नंबर होगा, परमिट की कॉपी वाहन में लगानी जरूरी होगी। अगर किसी एक रूट के लिए निर्धारित परमिट से ज्यादा आवेदन आते हैं तो ड्रॉ केजरिए अलॉटमेंट की जाएगी। किसी एक रूट पर कुल परमिट के 25 प्रतिशत से ज्यादा किसी एक कंपनी को नहीं दिए जाएंगे। परमिट पांच साल के लिए मान्य होगा। रिन्युअल के बाद फिर वह पांच साल तक मान्य होगा। बस बदलने या परमिट होल्डर की मौत केअलावा परमिट ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। रूट में बदलाव या बढ़ोतरी नहीं हो सकेगी। ऑपरेटर तीन माह केनोटिस पर परमिट सरेंडर कर सकेगा।
पंजाब से डीटीओ सिस्टम खत्म
Punjab Cabinate
पंजाब में सौ करोड़ से बनेगा रोड सेफ्टी फंड
पंजाब कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सौ करोड़ से रोड सेफ्टी फंड स्थापित करने को मंजूरी दी है। पुलिस व ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा वसूले जाने वाले जुर्माने में से पचास प्रतिशत राशि इस फंड में जाएगी। केरल द्वारा 2007 में बनाए फंड की तर्ज पर यह फंड स्थापित किया जाएगा।
जागरूकता के अलावा इससे वाहनों की तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग को पकड़ने में मदद की जाएगी। जीपीएस, ऑटोमेटिक व्हीकल फिटनेस सर्टिफिकेट मशीनें और अन्य डिवाइस लगाई जाएंगी। दुर्घटना के बाद बचाव कार्य के लिए भी फंड प्रयोग किया जाएगा। कैबिनेट ने ट्रांसपोर्ट नीति को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत ऑपरेटरों को परमिट लेने केछह माह में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। टोल प्लाजा में व्यावसायिक वाहनों की अलग लेन होगी, जहां ओवरलोडिंग का खुद ही पता चल जाएगा।
पंजाब से डीटीओ सिस्टम खत्म
कैबिनेट ने ट्रांसपोर्ट विभाग का पुनर्गठन करते हुए जिला ट्रांसपोर्ट अफसर (डीटीओ) सिस्टम खत्म करने को स्वीकृति दी है। अब निजी वाहनों का रजिस्ट्रेशन एसडीएम करेंगे। जबकि, 32 ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक में ड्राइविंग लाइसेंस असिस्टेंट ट्रांसपोर्ट अफसर जारी करेंगे। व्यावसायिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, परमिट, टैक्स का काम 11 रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी दफ्तर देखेंगे। सेक्रेटरी आरटीए की छह अतिरिक्त पोस्ट सृजित की जाएंगी, ताकि डीटीओ के 22 पद खत्म होने के बाद गैप भरा जा सके। सेक्रेटरी आरटीए के दफ्तर में दस असिस्टेंट आरटीओ होंगे।
सभी टेस्ट ट्रैक में भी एक-एक तैनात होंगे। बठिंडा, फिरोजपुर, पटियाला, संगरूर, गुरदासपुर, अमृतसर, लुधियाना, मोहाली, जालंधर व होशियारपुर में सेक्रेटरी के नए पद सृजित किए जाएंगे। जो ट्रांसपोर्ट वाहनों केलिए आरसी, डीएल, कंडक्टर लाइसेंस, प्राइवेट सर्विस व्हीकल परमिट, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट, प्रदूषण चेकिंग सेंटर, टैक्स कलेक्शन, नियमों केउल्लंघन पर कार्रवाई का काम देखेंगे। सेक्रेटरी आरटीए को ट्रांसपोर्ट वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट की इंस्पेक्शन के बोर्ड का चेयरमैन बनाया जाएगा।
पंजाब कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सौ करोड़ से रोड सेफ्टी फंड स्थापित करने को मंजूरी दी है। पुलिस व ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा वसूले जाने वाले जुर्माने में से पचास प्रतिशत राशि इस फंड में जाएगी। केरल द्वारा 2007 में बनाए फंड की तर्ज पर यह फंड स्थापित किया जाएगा।
जागरूकता के अलावा इससे वाहनों की तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग को पकड़ने में मदद की जाएगी। जीपीएस, ऑटोमेटिक व्हीकल फिटनेस सर्टिफिकेट मशीनें और अन्य डिवाइस लगाई जाएंगी। दुर्घटना के बाद बचाव कार्य के लिए भी फंड प्रयोग किया जाएगा। कैबिनेट ने ट्रांसपोर्ट नीति को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत ऑपरेटरों को परमिट लेने केछह माह में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। टोल प्लाजा में व्यावसायिक वाहनों की अलग लेन होगी, जहां ओवरलोडिंग का खुद ही पता चल जाएगा।
पंजाब से डीटीओ सिस्टम खत्म
कैबिनेट ने ट्रांसपोर्ट विभाग का पुनर्गठन करते हुए जिला ट्रांसपोर्ट अफसर (डीटीओ) सिस्टम खत्म करने को स्वीकृति दी है। अब निजी वाहनों का रजिस्ट्रेशन एसडीएम करेंगे। जबकि, 32 ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक में ड्राइविंग लाइसेंस असिस्टेंट ट्रांसपोर्ट अफसर जारी करेंगे। व्यावसायिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, परमिट, टैक्स का काम 11 रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी दफ्तर देखेंगे। सेक्रेटरी आरटीए की छह अतिरिक्त पोस्ट सृजित की जाएंगी, ताकि डीटीओ के 22 पद खत्म होने के बाद गैप भरा जा सके। सेक्रेटरी आरटीए के दफ्तर में दस असिस्टेंट आरटीओ होंगे।
सभी टेस्ट ट्रैक में भी एक-एक तैनात होंगे। बठिंडा, फिरोजपुर, पटियाला, संगरूर, गुरदासपुर, अमृतसर, लुधियाना, मोहाली, जालंधर व होशियारपुर में सेक्रेटरी के नए पद सृजित किए जाएंगे। जो ट्रांसपोर्ट वाहनों केलिए आरसी, डीएल, कंडक्टर लाइसेंस, प्राइवेट सर्विस व्हीकल परमिट, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट, प्रदूषण चेकिंग सेंटर, टैक्स कलेक्शन, नियमों केउल्लंघन पर कार्रवाई का काम देखेंगे। सेक्रेटरी आरटीए को ट्रांसपोर्ट वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट की इंस्पेक्शन के बोर्ड का चेयरमैन बनाया जाएगा।