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चंडीगढ़ खालसा कॉलेज का स्टूडेंट 'बालवीर' में निभा रहा नेगेटिव रोल, बताया कैसे मिली सफलता

Sat, 14 Sep 2019 12:40 PM IST
खुशबू गोयल अमर कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 14 Sep 2019 12:40 PM IST
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Punjab Boy Aditya Ranvijay Sidhu playing Roll in Balveer serial
आदित्य रणविजय सिद्धू - फोटो : अमर उजाला
जुनून से भरे पंजाब के मोगा निवासी आदित्य रणविजय सिद्धू (32) इन दिनों मुंबई की माया नगरी में बेहतरीन किरदारों से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। हाल ही में सोनी सब टीवी पर शुरू हुए बालवीर सीरियल में वह एक नेगेटिव किरदार भायमार का रोल निभा रहे हैं। 2002 के आसपास चंडीगढ़ के सेक्टर 26 में स्थित खालसा कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पटाखे फोड़ने पर स्कूल के टीचर्स ने उनकी शिकायत पेरेंट्स से कर दी थी।
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इस कारण चंडीगढ़ से स्कूल छुड़ाकर उन्हें पेरेंट्स अपने साथ मेरठ लेकर चले गए थे। मुंबई में हुई एक मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष भरे दिनों के बारे में उन्होंने बताया कि छह से सात साल न जाने उन्होंने कितनी मेहनत की। कितनी बार ऑडिशंस दिए और शॉर्टलिस्ट हुए। फिर फाइनल शॉर्टलिस्ट हुए। बजट की बात होती और डेट बता दी जाती कि उन्हें कहां पर किस डेट को शूट करना है। इसके बाद कैंसल हो जाता।
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उन्हें समझ में नहीं आता था कि उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। जिंदगी में न जाने कितनी बार किनारे पर पहुंचे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। रणविजय ने करियर की शुरुआत ‘क्या हाल मिस्टर पांचाल’ से की, जिसमें उनकी मदद विपुल शाह ने की, जिनको वह बड़ा भाई मानते हैं।
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रोल पर आते ही बदल जाते हैं
रोल पर आते ही आदित्य रणविजय की भाव भंगिमा बदल जाती हैं। नसें फूल जाती हैं। आंखें भयावह लगने लगती हैं। जैसे कि वह सच में किसी अलग दुनिया में आ गए हैं। उनके मुताबिक ऐसा वह अपने माइंड सेट से कर पाते हैं। उस रोल में उन्हें पूरी तरह खो जाते हैं।

जो भी करना चाहते हो अड़े रहो

बॉलीवुड में किस्मत आजमाने के लिए मुंबई जाने वाले चंडीगढ़ के यूथ को आदित्य रणविजय का संदेश है कि आप लाइफ में जो भी करना चाहते हो, उसके लिए कभी हार मत मानो। चाहे कितनी भी बार गिरो। 8 बार, 10 बार, सौ बार, हजार बार। लेकिन खड़े होने की क्षमता जरूर रखो। दूसरों की कभी मत सुनो। जो करना है उस पर अड़े रहो और करते रहो, लेकिन ईमानदारी से।

क्रिकेटर बनना चाहते थे
आदित्य क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। अपनी उपलब्धियों के चलते वह अंडर-19 रणजी लिए अप्लाई करना चाहते थे, लेकिन खेल के दौरान हुई घुटने की इंजरी के कारण क्रिकेट का सपना टूट गया और कॉलेज में थिएटर मंचन में भाग लेने लगे।

पंजाबी जाट आदित्य ने मेरठ कॉलेज से किया है ग्रेजुएशन
पंजाबी जाट आदित्य के पिता आर्मी ऑफिसर थे। मूलरूप से पंजाब के मोगा निवासी आदित्य के पिता की पोस्टिंग मेरठ में थी। इसलिए 2004 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई मेरठ कॉलेज से पूरी की। हालांकि पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। मां मेरठ में ही मवाना डिग्री कॉलेज में बतौर प्रिंसिपल बच्चों को पढ़ाती थीं। उन्हें रिटायर हुए लगभग 10 साल हो गए हैं। परिवार ने मेरठ के शास्त्रीनगर में घर बना लिया है और वहीं पूरी तरह सेटल हो गया है। हालांकि वर्तमान में वह अपनी माता और बड़ी बहन के साथ मुंबई में रहते हैं।

नेगेटिव रोल के लिए फिट मानते हैं खुद को
आदित्य नेगेटिव रोल में खुद को काफी कंफर्टेबल फील करते हैं। उनका कहना है कि पॉजिटिव रोल के लिए उन्हें काफी मेंटेन करना पड़ता है। यही कारण है कि वह खुद को नेगेटिव रोल के लिए फिट मानते हैं। बालवीर सीरियल में वह भायमार का नेगेटिव किरदार निभा रहे हैं। यह एक ऐसा किरदार है जो अपने वसूलों पर चलता है। वह काल लोक का सेनापति है और अपने लोक के खिलाफ नहीं जाता। कभी पीछे से वार नहीं करता, जो भी करता है सामने से करता है।
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