Punjab: केजरीवाल को लेकर टिप्पणी मामले में भाजपा नेता बग्गा ने कहा- राजनीति से प्रेरित है मामला
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा था कि पंजाब पुलिस दिल्ली में बग्गा के घर जाकर उनके वकील की मौजूदगी में दो पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए गई टीम में तीन से ज्यादा अधिकारी नहीं होने चाहिए।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर टिप्पणी मामले में भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा पर दर्ज एफआईआर में बुधवार को बग्गा ने कहा कि उन पर दर्ज मामला राजनीति से प्रेरित है।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा था कि पंजाब पुलिस दिल्ली में बग्गा के घर जाकर उनके वकील की मौजूदगी में दो पूछताछ कर सकती है। पूछताछ करने के लिए गई टीम में तीन से ज्यादा अधिकारी नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही सुबह दस से शाम पांच बजे के बीच किसी भी समय एक घंटे का समय पूछताछ के लिए हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट में चालान पेश करने पर भी रोक लगा दी थी।
पिछली सुनवाई पर पंजाब सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने कहा था कि पंजाब सरकार इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करना चाहती है, जिसके लिए उन्हें कुछ मोहलत दी जाए ताकि उन पुलिस अधिकारियों के बयान हाईकोर्ट के समक्ष रखें जा सकें जो बग्गा को गिरफ्तार करने गए थे और दिल्ली व हरियाणा पुलिस ने जिन्हें बंधक बनाया था।
इसके साथ ही पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपील की कि दिल्ली के जनकपुरी थाने और कुरुक्षेत्र के थाने की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित की जाए ताकि साबित हो सके कि पंजाब पुलिस को बंधक बनाया गया था।
बग्गा की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि यह मामला केवल एक ट्वीट का है और इस मामले की जांच पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह पंजाब सरकार इस मामले में हरकत कर रही है उससे साफ पता चलता है कि पुलिस रंजिशन काम कर रही है।
शनिवार रात करीब एक घंटे तक चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने बग्गा के खिलाफ किसी भी किस्म की कार्रवाई पर रोक लगाई थी उस आदेश को अब चार अगस्त तक जारी रखने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने साथ ही बग्गा को जांच में शामिल होने का आदेश दिया था।
पंजाब पुलिस को इस दौरान बग्गा के घर पर जाकर दो बार एक-एक घंटे तक पूछताछ करने की अनुमति दी थी। बग्गा के वकील ने बताया कि पंजाब पुलिस ने इस मामले में बिलकुल दिलचस्पी नहीं दिखाई और आदेश के बावजूद याची से पूछताछ भी जरूरी नहीं समझी।