लोकसभा चुनाव: पंजाब का बड़ा मुद्दा; विदेश जाने की हसरत में लुट रहे अरमां, 2021 के मुकाबले 2024 में 74% बढ़ोतरी
विदेश जाकर सुनहरा भविष्य बनाने की हसरत लिए विदेश जा रहे युवाओं के अरमां लुट रहे हैं। पंजाब से करीब 1.5 लाख युवा हर साल विदेश जा रहे हैं। इससे ब्रेन ड्रेन को बढ़ावा मिल रहा है, दूसरी तरफ विदेश जाने के नाम पर ठगी का शिकार होने पर उन्हें हताश होना पड़ रहा है।
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विस्तार
पंजाब के घर और गांव युवाओं से खाली हो रहे हैं। यहां का हर दूसरा युवा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूके जाकर ही शिक्षा लेना चाहता है। शिक्षा लेना तो एक आसान रास्ता है, जिसके माध्यम से युवा स्थायी नागरिकता (पीआर) लेने का सपना पूरा करते हैं। हालात यह हैं कि इस ब्रेन ड्रेन ने पंजाब के शिक्षा संस्थानों को वीरान करना शुरू कर दिया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों की आधे से अधिक सीट खाली रह रही हैं।
यहां दाखिला लेने वालों की कमी है। एक अनुमान के मुताबिक पंजाब के युवा हर साल 75 हजार करोड़ की राशि विदेश में शिक्षा के लिए युवा खर्च कर रहे हैं। इससे पंजाब को जबरदस्त आर्थिक चोट भी पहुंच रही है। पंजाब में यह सिलसिला 2008 के बाद से काफी रफ्तार से चल रहा है। पंजाब के 103 इंजीनियरिंग कॉलेजों की सीटें आधी से ज्यादा खाली जा रहीं हैं, जबकि कनाडा के कॉलेजों में अगले साल की सीट भी फुल हो चुकी हैं। चुनाव में शोर मचता है, लेकिन पंजाब से युवाओं के पलायन का स्थायी रास्ता नहीं निकल पाया है।
कनाडा की उदार नीतियां...
पंजाब से सबसे ज्यादा युवा कनाडा ही जाते हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह कनाडा की उदार नीतियां हैं। यहां की नागरिकता लेना सबसे ज्यादा आसान है। कनाडा में कैलगरी ब्रैम्प्टन, वैंकुवर जैसे 20 से ज्यादा शहर ऐसे हैं, जहां हर चौथा शख्स पंजाबी है। कनाडा में पांच साल तक आप्रवासी के तौर पर रहने वाला शख्स वहां की नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकता है, इस अवधि में उसे कम से कम तीन साल तक लगातार देश में रहना होगा। पंजाब से टूरिस्ट वीजा पर जाने वालों की लंबी कतार है। 20 लाख खर्च कर टूरिस्ट कनाडा में एलएमआईए लेकर वहां पर वर्क परमिट हासिल कर लेता है, जिसके बाद पीआर का रास्ता खुल जाता है।
पढ़ाई के साथ नौकरी का मौका...
पंजाब से कनाडा जाने वाले युवाओं में सबसे ज्यादा वे छात्र होते हैं, जो 12वीं के बाद ही वहां जाना चाहते हैं. दरअसल विदेश में पढ़ाई कराना बहुत महंगा है। छात्रों के रहने-खाने, कॉलेज की फीस में ही अभिभावकों का तकरीबन 25 से 30 लाख रुपया हर साल खर्च होता है। कनाडा में जाने से फायदा ये है कि वहां पर छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ पार्टटाइम जॉब का ऑप्शन भी दिया जाता है।
यह पार्टटाइम जॉब सप्ताह में 10 से 20 घंटे की होती है। ओवरसीज स्टडी की एसोसिएशन ऑफ कंसल्टेंट की एक साल पहले जारी रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के 75% अभिभावक भी चाहते हैं कि उनके बच्चे विदेश में जाकर ही पढ़ें। इसका सबसे बड़ा कारण पंजाब में बढ़ रही बेरोजगारी और नशे की लत को माना गया है। ये पैरेंट्स मानते हैं कि यदि बच्चा पंजाब में रुका तो वह नशे की लत का शिकार हो सकता है। 2021 के मुकाबले 2024 में विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वालों की संख्या में 74 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
पंजाब देश में दूसरे नंबर पर
पढ़ाई के लिए विदेश जाने की बात करें तो देश में पंजाब दूसरे नंबर पर है, इस मामले में सबसे आगे चंडीगढ़ है, जिसमें प्रति लाख आबादी पर तकरीबन 10150 लोग विदेश में है। पंजाब में प्रति लाख आबादी पर यह आंकड़ा 859 और दिल्ली में 825 है। यदि उस राज्य की बात करें, जिससे सबसे कम युवा विदेश पलायन कर रहे हैं, तो उनमें त्रिपुरा का नंबर सबसे पहले आता है, जहां प्रति लाख आबादी पर महज 11 युवा ही विदेश गए हैं।इसके बाद बिहार का नंबर है जहां ये आंकड़ा 13 हो जाता है।
काॅन्ट्रैक्ट मैरिज ने संस्कृति को पहुंचाई चोट
युवाओं में विदेश जाने का इतना क्रेज है कि अक्सर जल्दबाजी में युवा ठगी का शिकार हो जाते हैं। इसी के बीच जालसाजों ने अनपढ़ युवाओं को कनाडा व अन्य देशों में पहुंचाने का नया रास्ता खोज निकाला, जो था काॅन्ट्रैक्ट मैरिज। यानी एक फर्जी शादी, जिसके लिए कनाडा में शिक्षा ग्रहण करने जा रहा विद्यार्थी अपनी फर्जी शादी कर अपने स्पाउस को विदेश ले जाने में कामयाब हो रहा था। इसने पंजाब की संस्कृति की नींव हिला दी। शादी के फर्जी फेरे होने लगे।
जालसाज सारा काॅन्ट्रैक्ट तैयार करवाने लगे, जिसमें वर पक्ष और वधु पक्ष की सहमति से लड़के और लड़की की शादी हो रही है। लड़की ने आइलेट्स किया है और वह विदेश जाने वाली है। विदेश भेजने के लिए वर पक्ष, वधु पक्ष पर 25 से लेकर 40 लाख रु. खर्च करता है। इसमें वीजा फीस, इंस्टीट्यूशन फीस और सिक्योरिटी मनी भी शामिल होती है।
इसमें शर्त होती है कि विदेश पहुंचने के बाद लड़की लड़के को वहां बुला लेगी, लेकिन हालात यह बने कि वहां पर दुल्हनें फुर्र होने लगी, अपने जीवनसाथी को बुलाना तो दूर फोन तक उठाना बंद कर दिया। जालंधर के सब इंस्पेक्टर रघुवीर सिंह बेटे गुरविंदर सिंह की शादी परनीत से हुई। लड़की के विदेश जाने का खर्च एसआई के परिवार ने उठाया। 23 लाख खर्च कर बहू को विदेश भेजने के बाद उसने फोन उठाना ही बंद कर दिया और बाद में तलाक मांगने लगी।
700 युवाओं को डिपोर्ट करने का नोटिस
कनाडाई सीमा सुरक्षा एजेंसी ने ऐसे 700 युवाओं को डिपोर्ट करने का नोटिस दिया है, जिनके वीजा दस्तावेज फर्जी निकले हैं। ये सभी 700 छात्र जालंघर की एक एजुकेशन माइग्रेशन वीजा कंपनी के जरिए कनाडा पहुंचे थे। इन छात्रों से कनाडा के एक कॉलेज में प्रवेश के नाम पर 16 से 20 लाख रुपये लिए गए थे।
हर साल 3.5 लाख युवा देते हैं आइलेट्स की परीक्षा
सूबे में हर साल 3.5 लाख युवा आईईएलटीएस (इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम) की परीक्षा देते हैं। एग्जाम फीस 210 से 225 डॉलर (15 हजार रुपये) हैं। यह भी है कि सभी पूरे बैंड हासिल नहीं कर पाते, जिससे वे दोबारा तैयारी करते हैं। युवाओं में विदेश जाने की रुचि को देखते हुए लोग कॉलेज खोलने की बजाय आइलेट्स सेंटर खोलने लगे हैं।
पंजाब में हर चौराहे पर आइलेट्स सेंटर खुले हुए हैं। यहां के युवा 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई करने के बजाय आइलेट्स सेंटर में जाने की रुचि रखते हैं। इस वजह से पंजाब में आइलेट्स सेंटर एक बिजनेस मॉड्यूल बन चुका है। तैयारी और एग्जाम फीस को मिलाकर प्रति व्यक्ति पर 30 से 35 हजार रुपये का खर्च पड़ता है। 38 हजार वीजा आवेदन कनाडा के पास अभी भी पड़े हैं और एक साल पहले ही कनाडा व यूके के तमाम कॉलेजों की सीटें फुल हो रहीं हैं।
सरकारें आती-जाती रहीं, युवाओं को कोई नहीं रोक पाया
पंजाब में विदेश स्टडी का चलन 2008 के बाद अचानक तेजी से बढा है। पहले यूके ने 2008 में स्टडी के लिए दरवाजे खोले, तो पंजाब में बिना वेरिफिकेशन के धड़ाधड़ स्टूडेंट्स वीजा जारी किए गए, जिसमें हजारों अनपढ़ युवा फर्जी दस्तावेज लेकर यूके स्टडी के लिए पहुंचे, लेकिन वहां पर जाते ही फुर्र हो गए। यूके दूतावास ने गंभीरता से लिया और कई एजेंटों पर केस दर्ज करवाए, लेकिन स्थानीय सरकारों ने कोई सहयोग नहीं किया लिहाजा स्टडी वीजा संचालकों के हौसले बुलंद होते गए।
इसके बाद पंजाब में नशे ने पैर पसारना शुरू किया, तो पंजाब से युवाओं को उनके अभिभावकों ने विदेश में स्टडी के लिए भेजना शुरू कर दिया। हालात यह बन गए कि 2014 तक पंजाब से युवा तेजी से भागने लगे और आंकड़ा दोगुना हो गया। संख्या 60 हजार को क्रॉस कर गई, जो 2018 तक 80 हजार तक पहुंची और मौजूदा दौर में 1.5 लाख युवा स्टडी के लिए विदेश भाग रहे हैं।
एक्सपर्ट की राय... पंजाब में उद्योग ही बेहतर हल
पंजाब से ब्रेन ड्रेन के बारे में एमएमचवी कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन का कहना है कि पंजाब को इंडस्ट्री की काफी जरूरत है। हमारे यहां किन्नू से लेकर आलू का बेहतरीन उत्पादन है, इसलिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट अधिक से अधिक आने चाहिए। पंजाब में आईटी से लेकर अन्य इंडस्ट्री की काफी जरूरत है। तकनीकी शिक्षा के साथ साथ जब बच्चों को यहां पर रोजगार व अपनी इंडस्ट्री के लिए बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी, तो पंजाब की तस्वीर जरूर बदलेगी। पंजाब में युवा बेहतर भविष्य के लिए जा रहा है लेकिन यह सब कुछ पंजाब में हो जाए तो जरूरत नहीं पड़ेगी।