{"_id":"56ece7c14f1c1bbc588b4d7e","slug":"punjab-assembly-session-sukhbir-badal-charanjit-singh-channi-punjab-congress-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखबीर के सवालों में उलझे चन्नी, नहीं गिना पाए कांग्रेसी उपलब्धियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखबीर के सवालों में उलझे चन्नी, नहीं गिना पाए कांग्रेसी उपलब्धियां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Mar 2016 02:24 PM IST
विज्ञापन
सुखबीर बादल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब विधानसभा में बजट पर बहस के दौरान डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी को उलझा दिया। चन्नी का भाषण होना था, इसके बावजूद ज्यादातर कांग्रेस विधायक चले गए थे। अकेले पड़े चन्नी सुखबीर के सवालों में फंस गए। सुखबीर ने पहले मजबूत अर्थ व्यवस्था की तसवीर पेश की। फिर चन्नी ने बजट और आर्थिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। आखिर में सुखबीर, चन्नी की ओर से उठाए मुद्दों पर जवाब देने को उठे तो कांग्रेसी बहस का बायकॉट करके जाने लगे। सुखबीर ने चुनौती दी कि अगर हिम्मत है तो जवाब सुन कर जाओ। तब चन्नी बैठ गए और यही उनसे गलती हो गई।
सुखबीर ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल का एक भी प्रोजेक्ट बताएं। चन्नी ने कहा कि भाखड़ा डैम। सुखबीर बोले, कैप्टन अमरिंदर के कार्यकाल का कोई प्रोजेक्ट बताओ। तो चन्नी ने कहा कि पैच वर्क कराए, धान समय पर उठाया और पानी-सीवरेज के बिल माफ कराए। इस पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे।
बात संभालते हुए चन्नी ने कहा कि सोमवार को इस मुद्दे पर बहस करा लें, वह भी अपने आंकड़े लेकर आएंगे। क्योंकि सदन में मौजूद तीनों विधायक कैप्टन के कार्यकाल में नहीं थे। सुखबीर ने कहा कि एक भी फैक्ट्री बता दें, जो कैप्टन केराज में लगी हो, पर कांग्रेसी जवाब नहीं दे सके। आखिर वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा केभाषण से पहले कांग्रेसी बायकॉट करके चले गए।
विज्ञापन
सुखबीर ने पेश की आर्थिक तसवीर
इससे पहले सुखबीर ने कहा कि पंजाब के खिलाफ लगातार दिवालिए होने का प्रचार किया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। जब 2007 में गठबंधन ने सत्ता संभाली तो रेवेन्यू ग्रोथ नहीं थी, पे-कमीशन लागू होने के बाद वेतन का बोझ पड़ा, लेकिन सरकार ने संसाधन बनाए और विकास कराया। उन्होंने आंकड़ों के जरिए पहले कैप्टन अमरिंदर के कार्यकाल में एक्साइज, वैट, जीडीपी और मौजूदा स्थिति के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार कर्ज में एक बार भी डिफॉल्टर नहीं हुई। देश में सबसे ज्यादा कर्ज मुकेश अंबानी पर 1.5 लाख करोड़ है। पंजाब सरकार ने भी बुनियादी ढांचे में सुधार को कर्ज लिया है। भारत और यूएस पर इससे कई गुना ज्यादा कर्ज है। पंजाब में कर्ज की ग्रोथ सबसे कम है। पंजाब की पर-कैपिटा-इनकम कई गुना बढ़ी है। कैग ने कहा है कि सरकार करीब 22 फीसदी रकम ब्याज में दे रही है, कांग्रेस के समय 41 प्रतिशत था। कांग्रेस न तो गरीबों केलिए कोई स्कीम लाई, न बड़ा प्रोजेक्ट और न ही विरसे की संभाल के लिए कुछ किया। सूबे में जितने भी बड़े प्रोजेक्ट, एयरपोर्ट आए, सभी बादल सरकार में आए।
चन्नी ने बोला सरकार पर हमला
चन्नी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 13वें वित्त आयोग ने कहा था कि राजस्व घाटा खत्म करो, पर वह बढ़ गया। कांग्रेस की सरकार के समय रेवेन्यू सरप्लस था, जो आज इतने घाटे में है। तब कर्ज चालीस हजार करोड़ था, आज सारे आंकड़े जोड़ें तो कर्ज करीब सवा दो लाख करोड़ है। 2007 से अब तक 21,189 औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं। प्रोग्रेसिव समिट पर बीस करोड़ खर्च हो गए, पर निवेश कोई आए नहीं। एक ऐसे कंपनी ने एमओयू साइन किया, जो अभी इनकॉरपोरेटेड ही नहीं है। साठ हजार सेल्स टैक्स नंबर लोगों ने वापस कर दिए।
पिछले बीस सालों में सबसे अच्छे आर्थिक हालात
वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा ने बजट पर बहस के दौरान कहा कि आज इतने अच्छे आर्थिक हालात हैं, वे पिछले बीस सालों में नहीं रहे। कर्ज का आकार अर्थव्यवस्था से जोड़ कर देखा जाता है। कर्ज 1.25 लाख करोड़ हुआ है तो जीडीपी भी 4.08 लाख करोड़ रुपये हुई है। कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ा है, वास्तविक रेवेन्यू डेफिसिट सिर्फ तीन हजार करोड़ है। जायदाद बेचने व गिरवी रखने की बातें भी गलत हैं। नई जेल व मेंटल अस्पताल बनाने केबाद पुरानी की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कंडी एरिया के किसानों को कंटीली तार पर पचास फीसदी सब्सिडी देने को दस करोड़ और सेवा केंद्रों केलिए पचास करोड़ का प्रावधान बजट में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही अनिल जोशी की मांग पर कच्ची हल्दी को वैट मुक्त करने और कुछ मसालों पर वैट घटाने का प्रस्ताव भी रखा।
विज्ञापन
सुखबीर ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल का एक भी प्रोजेक्ट बताएं। चन्नी ने कहा कि भाखड़ा डैम। सुखबीर बोले, कैप्टन अमरिंदर के कार्यकाल का कोई प्रोजेक्ट बताओ। तो चन्नी ने कहा कि पैच वर्क कराए, धान समय पर उठाया और पानी-सीवरेज के बिल माफ कराए। इस पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे।
विज्ञापन
बात संभालते हुए चन्नी ने कहा कि सोमवार को इस मुद्दे पर बहस करा लें, वह भी अपने आंकड़े लेकर आएंगे। क्योंकि सदन में मौजूद तीनों विधायक कैप्टन के कार्यकाल में नहीं थे। सुखबीर ने कहा कि एक भी फैक्ट्री बता दें, जो कैप्टन केराज में लगी हो, पर कांग्रेसी जवाब नहीं दे सके। आखिर वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा केभाषण से पहले कांग्रेसी बायकॉट करके चले गए।
विज्ञापन
सुखबीर ने पेश की आर्थिक तसवीर
इससे पहले सुखबीर ने कहा कि पंजाब के खिलाफ लगातार दिवालिए होने का प्रचार किया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। जब 2007 में गठबंधन ने सत्ता संभाली तो रेवेन्यू ग्रोथ नहीं थी, पे-कमीशन लागू होने के बाद वेतन का बोझ पड़ा, लेकिन सरकार ने संसाधन बनाए और विकास कराया। उन्होंने आंकड़ों के जरिए पहले कैप्टन अमरिंदर के कार्यकाल में एक्साइज, वैट, जीडीपी और मौजूदा स्थिति के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार कर्ज में एक बार भी डिफॉल्टर नहीं हुई। देश में सबसे ज्यादा कर्ज मुकेश अंबानी पर 1.5 लाख करोड़ है। पंजाब सरकार ने भी बुनियादी ढांचे में सुधार को कर्ज लिया है। भारत और यूएस पर इससे कई गुना ज्यादा कर्ज है। पंजाब में कर्ज की ग्रोथ सबसे कम है। पंजाब की पर-कैपिटा-इनकम कई गुना बढ़ी है। कैग ने कहा है कि सरकार करीब 22 फीसदी रकम ब्याज में दे रही है, कांग्रेस के समय 41 प्रतिशत था। कांग्रेस न तो गरीबों केलिए कोई स्कीम लाई, न बड़ा प्रोजेक्ट और न ही विरसे की संभाल के लिए कुछ किया। सूबे में जितने भी बड़े प्रोजेक्ट, एयरपोर्ट आए, सभी बादल सरकार में आए।
चन्नी ने बोला सरकार पर हमला
चन्नी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 13वें वित्त आयोग ने कहा था कि राजस्व घाटा खत्म करो, पर वह बढ़ गया। कांग्रेस की सरकार के समय रेवेन्यू सरप्लस था, जो आज इतने घाटे में है। तब कर्ज चालीस हजार करोड़ था, आज सारे आंकड़े जोड़ें तो कर्ज करीब सवा दो लाख करोड़ है। 2007 से अब तक 21,189 औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं। प्रोग्रेसिव समिट पर बीस करोड़ खर्च हो गए, पर निवेश कोई आए नहीं। एक ऐसे कंपनी ने एमओयू साइन किया, जो अभी इनकॉरपोरेटेड ही नहीं है। साठ हजार सेल्स टैक्स नंबर लोगों ने वापस कर दिए।
पिछले बीस सालों में सबसे अच्छे आर्थिक हालात
वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा ने बजट पर बहस के दौरान कहा कि आज इतने अच्छे आर्थिक हालात हैं, वे पिछले बीस सालों में नहीं रहे। कर्ज का आकार अर्थव्यवस्था से जोड़ कर देखा जाता है। कर्ज 1.25 लाख करोड़ हुआ है तो जीडीपी भी 4.08 लाख करोड़ रुपये हुई है। कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ा है, वास्तविक रेवेन्यू डेफिसिट सिर्फ तीन हजार करोड़ है। जायदाद बेचने व गिरवी रखने की बातें भी गलत हैं। नई जेल व मेंटल अस्पताल बनाने केबाद पुरानी की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कंडी एरिया के किसानों को कंटीली तार पर पचास फीसदी सब्सिडी देने को दस करोड़ और सेवा केंद्रों केलिए पचास करोड़ का प्रावधान बजट में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही अनिल जोशी की मांग पर कच्ची हल्दी को वैट मुक्त करने और कुछ मसालों पर वैट घटाने का प्रस्ताव भी रखा।