विधानसभा में 1984 सिख दंगे और ड्रग रैकेट की गूंज
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1984 के सिख विरोधी दंगों की बात राज्यपाल के अभिभाषण का अहम हिस्सा रही। उन्होंने इन दंगों के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को केंद्रीय कैबिनेट में ऊंचे ओहदे दिए गए हैं। उन्होंने दंगों के आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने पर भी जोर दिया। चंडीगढ़ पर पंजाब के दावे, नदियों के पानी का रायपेरियन सिद्धांत के अनुसार बंटवारा, प्रदेश को औद्योगिक पैकेज और केंद्रीय करों में राज्यों के लिए अधिक हिस्से आदि मुद्दे राज्यपाल के अभिभाषण का मुख्य हिस्सा रहे। अपने अभिभाषण में दंगों से संबंधित कई अन्य पैरे उन्होंने नहीं पढ़े और भाषण के अंत में कहा कि इन्हें भी पढ़ा हुआ समझा जाए।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र
राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान पंजाब को मिले बठिंडा रिफाइनरी प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए जहां अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार की उपलब्धियां गिनाई गईं, वहीं केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए, प्रदेश से पक्षपात करने की बात भी कही। राज्यपाल पाटिल ने कहा कि राज्य से संबंधित बहुत से मुद्दे अभी अनसुलझे हैं। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के समय राज्य को इसकी राजधानी चंडीगढ़ से वंचित रखा गया और पंजाबी भाषी क्षेत्र भी पंजाब से बाहर रखे गए।
चंडीगढ़ पंजाब को सौंपे जाने की याद दिलाई
भारत सरकार ने चंडीगढ़ पंजाब को सौंपे जाने के लिए 26 जनवरी, 1986 की तिथि निर्धारित की थी, लेकिन इसके बावजूद अभी तक इसे प्रदेश को नहीं सौंपा गया है। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की सेवाओं में पंजाब और हरियाणा के प्रतिनिधित्व संबंधी अनुपातक सहमति कायम रखने पर भी बल दिया। केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से को मौजूदा 30 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की बात भी की। राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने मोहाली में प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन सहित सभी क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख किया।
विपक्ष का राज्यपाल के अभिभाषण का बायकॉट
सत्र आरंभ होते ही विपक्ष ने राज्यपाल शिवराज पाटिल के अभिभाषण का बायकॉट कर दिया। राज्यपाल ने जैसे ही बोलना शुरू किया, कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। सदन के बाहर विपक्षी नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि ड्रग रैकेट में अकाली मंत्रियों और उनके रिश्तेदारों के नाम आए हैं। लेकिन, सीएम और डिप्टी सीएम दोनों मंत्रियों को क्लीन चिट दे रहे हैं। एक ओर जहां कांग्रेस कैबिनेट मंत्रियों बिक्रम सिंह मजीठिया और अनिल जोशी के खिलाफ मोर्चा खोला हुए थी वहीं दूसरी ओर दोनों मंत्री सदन से ही नदारद रहे। हालांकि कांग्रेस के निशाने पर रहे तीसरे मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर सदन में मौजूद थे।