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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Assembly Elections, Aam Admi Party Target Now Mission 2022

आम आदमी पार्टी का टारगेट अब 'मिशन 2022', पंजाब में अभी से चुनावी मोड में आ जाएंगे नेता

Mon, 10 Jun 2019 01:37 PM IST
खुशबू गोयल अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 10 Jun 2019 01:37 PM IST
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Punjab Assembly Elections, Aam Admi Party Target Now Mission 2022
भगवंत मान - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी का टारगेट अब मिशन 2022 है। पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी अभी से इलेक्शन मोड में जाने की तैयारी कर रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान आप को पंजाब में सिर्फ एक सीट मिल सकी है। संगरूर से भगवंत मान अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। जबकि, 2014 में पार्टी ने पंजाब में चार सीटें जीती थीं।
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हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में आप बीस सीटें जीत कर प्रमुख विपक्षी दल बनने में जरूर कामयाब हो गई थी। पार्टी के थिंक टैंक का मानना है कि इस चुनाव में लोगों ने छोटे दलों को नकार दिया। सुखपाल खैरा का पीडीए व अन्य पार्टियों को खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। इनके मुकाबले आप के उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
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इससे साफ है कि पंजाब में अभी भी लोग कांग्रेस और अकाली-भाजपा के बाद तीसरे विकल्प के रूप में आप को देख रहे हैं। इसलिए अगर पार्टी अभी से पूरा जोर लगाए तो 2022 में आप के लिए संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए आप ने अपने सूबे के सबसे प्रमुख स्टार कैंपेनर भगवंत मान पर दांव खेलने का मन बनाया है।
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जल्द ही मान पंजाब के गांवों का दौरा शुरू करेंगे। जब तक लोकसभा का सत्र चलेगा तो वह शनिवार और रविवार को पंजाब आएंगे। सत्र खत्म होने के बाद लगातार गांवों में जाएंगे। उनके दौरे के लिए पार्टी व्यापक रणनीति के साथ कार्यक्रम तैयार करने में लगी है। बाकी नेता भी अपने-अपने इलाकों में सक्रियता बढ़ाएंगे।

भंग हो सकता है संगठनात्मक ढांचा

आम आदमी पार्टी जल्द ही संगठनात्मक ढांचा भी भंग कर सकती है। पिछले दिनों गढ़शंकर में हुई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया था। तब यह सामने आया कि पिछले समय केदौरान जिन्हें भी पद दिए गए थे, उनमें से बहुत से लोगों ने चुनाव में कोई काम नहीं किया।

उन पर कार्रवाई के बजाय पूरा ढांचा भंग कर नए लोग लाए जाएं तो बेहतर है। पार्टी के सामने यह भी सुझाव आया है कि बहुत सारे विंग बनाने के बजाय सिर्फ किसान, यूथ और व्यापारी विंग ही रखे जाएं। बाकी काबिल नेताओं को मुख्य संगठन में जगह दें।

 
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