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पंजाब: एक बेटे ने लिया पिता की हार का बदला, दूसरे ने पिता की सीट गंवाई

Sun, 12 Mar 2017 09:33 AM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Sun, 12 Mar 2017 09:33 AM IST
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Punjab assembly elections 2017, jalandhar news
Punjab Election - फोटो : अमर उजाला
जालंधर में चार सीटें ऐसी थीं, जिनमें परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। नार्थ विधानसभा सीट पर दिलचस्प मुकाबला था। यहां पूर्व कैबिनेट मंत्री अवतार हेनरी के बेटे बावा हेनरी और विधायक केडी भंडारी में मुकाबला था। गौरतलब है कि केडी भंडारी दो बार अवतार हेनरी को शिकस्त दे चुके हैं। पहली बार वर्ष 2007 में और दूसरी बार 2012 में उनको हराया। इस बार भंडारी के खासमखास नेता अनुपम शर्मा ने हेनरी के वोटों को काटा।
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अवतार हेनरी के बेटे बावा हेनरी को टिकट मिल गया था। बावा हेनरी ने 32 हजार 291 वोट से विधायक केडी भंडारी को हराकर साथ ही पिता के रिकार्ड को ध्वस्त किया। बावा हेनरी ने पिता के वर्ष 2002 के रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया, जिसमें उनके पिता अवतार हेनरी ने तत्कालीन मेयर सुरेश सहगल को 20 हजार मतों से हराया था।  
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मोहिंदर भगत भाजपा विधायक दल के नेता और वन मंत्री चुन्नी लाल के बेटे हैं। भगत मोहिंदर को पिता चुन्नी लाल के स्थान पर इसलिए सीट दी गई थी क्योंकि वह बुजुर्ग हो गए थे। भगत चुन्नी लाल वेस्ट से तीन बार विधायक बन चुके हैं और पिछली दो बार से विधायक हैं। उन्होंने कांग्रेसी दिग्गज मोहिंदर केपी को हराया। पिता चुन्नी लाल ने केपी की पत्नी सुमन केपी को 11 हजार 343 वोटों से हराया था, बेटे मोहिंदर भगत ने यह सीट इस बार गंवा दी। वह सुशील रिंकू से 17 हजार 334 मत से हार गए। 
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सांसद पुत्र भी अपनी जिंदगी का पहला चुनाव हारे

Punjab assembly elections 2017, jalandhar news
बाबा हेनरी की जीत के बाद पिता व पूर्व मंत्री अवतार हैनरी व बावा हेनरी खुशी मे रोते हुए - फोटो : अमर उजाला
चौधरी सुरिंदर सिंह ने करतारपुर की सीट जीतकर अपने दादा मास्टर गुरबंता सिंह और पिता चौधरी जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि दी। इस सीट से उनके दादा के अलावा पिता पांच बार विधायक व पंजाब के मंत्री रह चुके हैं।

2007 व 2012 में चौधरी जगजीत सिंह चुनाव हार गए। 2012 में चौधरी जगजीत सिंह शिअद के सरवण सिंह फिल्लौर से 823 वोटों से चुनाव हार गए। इसके बाद उनका देहांत हो गया तो पिता व दादा की सीट पर वर्क चौधरी सुरिंदर ने शुरू कर दिया। सुरिंदर ने इस बार 6020 वोटों से चुनाव जीतकर पैतृक सीट पर कब्जा कर लिया।

चौथी सीट फिल्लौर की थी, जहां चौधरी संतोख सिंह खड़े होते आए हैं। चौधरी संतोख 2014 में सांसद बन गए तो यह सीट इस बार उनहोंने अपने बेटे विक्रम को दिला दी। वहां पर बसपा के प्रदेश प्रधान अवतार सिंह करीमपुरी के कारण चार महारथियों में मुकाबला था। हालांकि सांसद चौधरी संतोख सिंह खुद डेरा डालकर बैठे रहे पर उनका बेटा विक्रम वहां से चुनाव नहीं जीत पाया। वह 3477 वोट से चुनाव हार गए। 
 
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