पंजाब चुनाव: दिग्गजों के सामने साख बचाने की चुनौती, कैप्टन का कद, सुखबीर व नवजोत का तय होगा सियासी भविष्य
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में करीब 50 सीटें ऐसी हैं, जहां पर अनुसूचित जाति का वोट निर्णायक है। दोआबा में 37 फीसदी, मालवा में 31 फीसदी और माझा में 29 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है। इस तरह सबसे अधिक अनुसूचित जाति की आबादी वाला क्षेत्र मालवा है। खास बात यह है कि यह आबादी विभिन्न धार्मिक डेरों से जुड़ी है और अपने डेरों के निर्देश पर अंतिम क्षणों में सियासी समीकरण बदलने की ताकत रखते हैं।
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चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही पंजाब के 2022 में होने जा रहे सियासी रण की बिसात बिछ गई है। इस रण में पंजाब के कई दिग्गजों की साख बचाना चुनौती साबित होने वाली है। कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू सहित आप के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल के लिए यह चुनाव बेहद अहम होने वाला है। हालांकि पहली बार शिअद के बिना चुनाव मैदान में उतरी भाजपा के लिए भी पंजाब की राह आसान नहीं होने वाली है। कुल मिलाकर इस बार पंजाब का चुनाव अब तक के चुनावी इतिहास का सबसे रोचक मुकाबला होने जा रहा है।
इस बार पंजाब का चुनाव परंपरागत चुनाव से अलग होगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस चुनाव में कांग्रेस, शिअद और आप के बजाय दो अन्य दल भी चुनाव मैदान में उतरेंगे। परंपरागत राजनीतिक दलों के अतिरिक्त त्रिकोणीय गठबंधन और किसान आंदोलन फतह कर चुके सूबे के 22 किसान संगठन भी सियासत में उतरेंगे।
किसानों ने चुनाव में उतरने के लिए संयुक्त समाज मोर्चा का गठन भी किया है। ऐसे में कांग्रेस से इस्तीफा देकर पंजाब लोक कांग्रेस खड़ी करके पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव मैदान में उतरे हैं। यह चुनाव कैप्टन का अभी तक का सियासी कद भी तय करने वाला है। कैप्टन की तरह कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के लिए भी यह विधानसभा चुनाव बेहद अहम होगा।
वह लगातार सरकार और सरकार के दिग्गज नेताओं को अपने भाषण में घेर रहे हैं, ऐसे में सियासत में उनके दुश्मन भी अपने ही हो गए हैं। इन सब के बीच पार्टी की जीत उनके लिए पंजाब में उनका कद निर्धारित करेगी। इस बार भाजपा के लिए भी हालात कुछ अच्छे नहीं होने वाले हैं। पहली बार भाजपा अकाली दल से अलग होकर चुनाव लड़ रही है। हालांकि इस बार भाजपा को पंजाब की अच्छी समझ रखने वाले कैप्टन का साथ जरूर मिला है लेकिन किसानों की नाराजगी के कारण हालात कुछ अच्छे नहीं दिख रहे हैं। इन सियासी दिग्गजों के अलावा केंद्रीय कृषि कानूनों पर जीत के बाद पहली बार चुनाव मैदान में उतरे किसान नेता बलबीर राजेवाल का भी सियासी भविष्य तय करेगा।
सुखबीर का भविष्य तय करेगा यह चुनाव
अभी तक सूबे के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही शिअद को सुखबीर के रूप में नया नेतृत्व मिला है। यह पहली बार होगा कि अकाली दल सुखबीर बादल की अगुवाई में चुनाव लड़ेगा। इसलिए यह चुनाव पंजाब में उनका सियासी भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
2017 की भूल नहीं करेगी आप
पंजाब में आम आदमी पार्टी का यह दूसरा चुनाव होगा। 2017 में आप ने धमाकेदार एंट्री की थी लेकिन कुछ सियासी गलतियों के कारण वह सत्ता से दूर गई। इस चुनाव में आप के नेता पुरानी सियासी गलतियां नहीं दोहराकर पंजाब की सत्ता हासिल करने का प्रयास करेंगे।