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SYL मामला: हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली को पंजाब भेजेगा पानी का बिल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:13 PM IST
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एसवाईएल पर आरपार के मूड में पंजाब
- फोटो : अमर उजाला
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एसवाईएल मुद्दे पर पंजाब सरकार अब आरपार के मूड में हैं। सरकार राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से पानी की कीमत वसूलेगी। बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र में प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में रखे गए प्रस्ताव को सदन की मंजूरी मिल गई। संसदीय कार्य मंत्री मदन मोहन मित्तल ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए बताया कि 1 नवंबर, 1966 से अब तक राजस्थान को दिए पानी की कीमत 80 हजार करोड़ रुपये बनती है जबकि हरियाणा और दिल्ली को दिए गए पानी की कीमत का सही आकलन कर केंद्र सरकार के जरिए इन राज्यों से पानी का बिल वसूला जाना चाहिए।
कांग्रेस सदस्यों की गैरहाजिरी के बीच बुधवार को मित्तल ने सदन में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि आजादी से पहले जब भी किसी सूबे ने किसी अन्य राज्य को रिपेरियन सिद्धांत के अनुसार पानी दिया तो उसकी कीमत और रायल्टी वसूल की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में दो बार पंजाब की नदियों का पानी दूसरे सूबों को दिया गया। पहले 1873 में सतलुज का पानी पटियाला, नाभा व जींद रियासतों को दिया गया। लेकिन इसके लिए साफ तौर पर तय किया गया था कि चूंकि पंजाब रिपेरियन सूबा है इसलिए पानी पर केवल पंजाब का ही हक है।
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कांग्रेस सदस्यों की गैरहाजिरी के बीच बुधवार को मित्तल ने सदन में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि आजादी से पहले जब भी किसी सूबे ने किसी अन्य राज्य को रिपेरियन सिद्धांत के अनुसार पानी दिया तो उसकी कीमत और रायल्टी वसूल की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में दो बार पंजाब की नदियों का पानी दूसरे सूबों को दिया गया। पहले 1873 में सतलुज का पानी पटियाला, नाभा व जींद रियासतों को दिया गया। लेकिन इसके लिए साफ तौर पर तय किया गया था कि चूंकि पंजाब रिपेरियन सूबा है इसलिए पानी पर केवल पंजाब का ही हक है।
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राज्य सरकार के दोनों प्रस्तावों को विधानसभा में मिली मंजूरी
एसवाईएल पर आरपार के मूड में पंजाब
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में उक्त तीनों रियासतों को पानी के बदले पंजाब को भुगतान करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि दूसरी बार 1873 में ही बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के आग्रह पर उनकी रियासत को गंग नहर के जरिए पानी दिया गया और उसके एवज में बीकानेर रियासत से कीमत वसूली गई थी। मित्तल ने कहा कि पंजाब के रिपेरियन राज्य होने के बावजूद देश की आजादी के बाद से गैर रिपेरियन राज्यों को मुफ्त में पानी दिया जा रहा है, जिस पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार समेत राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली राज्यों को अब तक पंजाब से दिए गए पानी के बिल भेजे जाएं।
प्रस्ताव का समर्थन करते हुए जस्टिस निर्मल सिंह समेत शिअद विधायकों ने स्पीकर से मांग की कि पंजाब को अपनी नदियों के पानी की कीमत वसूलने का हक मिलना चाहिए। बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्षी सदस्य सिमरनजीत सिंह बैंस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वे पिछले सत्र में भी ऐसा ही प्राइवेट बिल लाए थे, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि राजस्थान 1965 से पंजाब से पानी ले रहा है, जिसके लिए 16 लाख करोड़ रुपये वसूले जाने चाहिए लेकिन सरकार ने इस मांग को अनदेखा कर दिया।
प्रस्ताव का समर्थन करते हुए जस्टिस निर्मल सिंह समेत शिअद विधायकों ने स्पीकर से मांग की कि पंजाब को अपनी नदियों के पानी की कीमत वसूलने का हक मिलना चाहिए। बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्षी सदस्य सिमरनजीत सिंह बैंस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वे पिछले सत्र में भी ऐसा ही प्राइवेट बिल लाए थे, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि राजस्थान 1965 से पंजाब से पानी ले रहा है, जिसके लिए 16 लाख करोड़ रुपये वसूले जाने चाहिए लेकिन सरकार ने इस मांग को अनदेखा कर दिया।