फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab And Haryana High Court says that Principle of Justice Cannot be Ignored in Compensation Cases

हाईकोर्ट की नसीहत: पीड़ित परिवार को मुआवजा मिले इसलिए दयालु दृष्टिकोण जरूरी, लेकिन न्याय का सिद्धांत न भूलें ट्रिब्यूनल

Thu, 14 Oct 2021 06:00 AM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 14 Oct 2021 06:00 AM IST
सार

मोगा में हुए एक्सीडेंट में चरणदीप की मौत हुई थी और इसकी एफआईआर लिखाने में भी दो दिन की देरी हुई तथा पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया गया। सभी तथ्यों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने केवल संभावना के आधार पर बीमा कंपनी को मुआवजा जारी करने का आदेश जारी कर दिया।

विज्ञापन
Punjab And Haryana High Court says that Principle of Justice Cannot be Ignored in Compensation Cases
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मोटर एक्सीडेंट के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) द्वारा केस को केवल संभावना के आधार पर मुआवजे के लिए सही मानते हुए मुआवजा जारी करने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़ित परिवार को मुआवजा मिले इसलिए न्यायालय को दयालु दृष्टिकोण रखना चाहिए, लेकिन इसके लिए न्याय के सिद्धांत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह नसीहत पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनलों को दी।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें - ड्रग कारोबार मामला: हाईकोर्ट ने दिए पूरे मामले का सार तैयार करने के आदेश, सभी मुद्दों पर अलग-अलग होगी सुनवाई 
विज्ञापन


यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल लुधियाना द्वारा पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजा जारी करने के आदेश को चुनौती दी। याची ने बताया कि एमएसीटी के समक्ष मुआवजा याचिका वाहन मालिक और मृतक के परिवार ने एक्सीडेंट की झूठी कहानी बनाते हुए मुआवजा हासिल करने के लिए दाखिल की है। शिकायतकर्ता को यह जानकारी तक नहीं है कि उसे वाहन और वाहन मालिक के बारे में सूचना कैसे मिली। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मोगा में हुए एक्सीडेंट में चरणदीप की मौत हुई थी और इसकी एफआईआर लिखाने में भी दो दिन की देरी हुई तथा पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया गया। सभी तथ्यों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने केवल संभावना के आधार पर बीमा कंपनी को मुआवजा जारी करने का आदेश जारी कर दिया। भले ही इस तरह के मामलों में संभावनाओं के आधार पर आदेश जारी किया जा सकता है, लेकिन इससे पहले कोर्ट को पूरी तरह संतुष्ट होना चाहिए कि तथ्यों में सत्यता है और इसके लिए तथ्यों का संभावनाओं से मेल खाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनलों को नसीहत दी कि दयालु दृष्टिकोण इस तरह के मामलों में दिखाएं, लेकिन न्याय का सिद्धांत न भूलें। भले ही इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार के शक से ऊपर के आपराधिक मामलों की सिद्धांत की जरूरत नहीं है, लेकिन सिविल मामलों की तरह तथ्यों से न्यायाधिकारी की सहमति आवश्यक है।

धोखाधड़ी रोकें ट्रिब्यूनल
हाईकोर्ट ने कहा कि लगातार ऐसे केस सामने आ रहे हैं जहां हिट एंड रन मामलों में जब एक्सीडेंट करने वाले वाहन की पहचान नहीं होती है वहां मुआवजे के लिए किसी अन्य वाहन जिसका बीमा मौजूद हो उसे जोड़ दिया जाता है और बीमा कंपनी को भुगतान करना पड़ता है। साथ ही कई बार ऐसे वाहन से एक्सीडेंट हो जाता है जिसका बीमा नहीं होता है और उसे ऐसे वाहन से बदल देते हैं जिसका बीमा हो और एक्सीडेंट को बीमित वाहन से दिखा दिया जाता है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनलों को इस प्रकार के मामलों पर विशेष ध्यान देकर इन पर रोक लगाने की सलाह दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed