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एसआई भर्ती: हाईकोर्ट ने कहा- सीएम के ट्वीट के आधार पर नहीं दिया जा सकता आयु सीमा बढ़ाने का आदेश

Sat, 04 Sep 2021 02:59 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 04 Sep 2021 02:59 AM IST
सार

56 लोगों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एसआई भर्ती के आवेदन की अधिकतम आयु बढ़ाने की अपील की। इसके लिए याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के ट्वीट को आधार बनाया। हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के ट्वीट को आधार मानकर आयु बढ़ाने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। 

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Punjab and Haryana High Court said order to increase age limit cannot be given on the basis of CM tweet
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गत वर्ष जुलाई में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा किए गए ट्वीट को आधार बनाकर एसआई भर्ती के लिए आवेदक की अधिकतम आयु सीमा 28 साल से बढ़ाकर 32 वर्ष करने का निर्देश जारी करने की अपील पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि सीएम के ट्वीट के आधार पर सरकार को आयु सीमा बढ़ाने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता है।

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56 लोगों ने एडवोकेट प्रद्युम्न गर्ग के माध्यम से याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि सब-इंस्पेक्टरों के पद पर पिछले पांच साल से भर्ती नहीं की गई है। पिछले साल मुख्यमंत्री ने एलान किया था कि एसआई की भर्ती में आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा 28 साल से बढ़ाकर 32 कर दी जाएगी। अब जब सरकार ने 560 पदों के लिए आवेदन मांगे तो अधिकतम आयु सीमा 32 साल न करके पूर्व की भांति 28 वर्ष ही रखी। 
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याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि कई वर्ष बाद भर्ती हो रही है और याचिकाकर्ता आयु को छोड़कर अन्य सभी योग्यता मानकों पर खरे उतरते हैं। देरी से निकाली गई इन भर्ती के चलते अब वह अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं। याची ने कहा कि अब मुख्यमंत्री के वादे के अनुसार आयु सीमा को 32 वर्ष किया जाना चाहिए। सिंगल बेंच ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था जिसको खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई। जस्टिस राजन गुप्ता पर आधारित खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सीएम के ट्वीट को आधार बनाकर आयु सीमा बढ़ाने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता। आयु सीमा बढ़ाने के लिए नियमों में संशोधन आवश्यक है जो मंत्रिमंडल को करना है न की अकेले सीएम को। 
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साथ ही याची ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के चलते पैदा हुए हालात के चलते अगले आदेश तक की अवधि को शून्य अवधि मानने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल याचिका दाखिल करने में होने वाली देरी को माफ करने के अदालती संदर्भ में है न की आयु सीमा के संदर्भ में।

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