फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab and Haryana high court said live in relationship not illegal

हाईकोर्ट ने कहा: लिव-इन रिलेशनशिप गैर कानूनी नहीं, महिला साथी सुरक्षा व गुजारा भत्ता की भी पात्र

Tue, 08 Jun 2021 09:10 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 08 Jun 2021 09:10 PM IST
सार

अपनी जाति के बाहर जाकर विवाह करने के मामलों में सबसे ज्यादा ऑनर किलिंग के मामले सामने आते हैं। अगर किसी की शादी नहीं हुई है और इस आधार पर सुरक्षा से इनकार किया जाता है तो इसके प्रेमी जोड़े को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

विज्ञापन
Punjab and Haryana high court said live in relationship not illegal
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लिव-इन रिलेशनशिप (सहमति संबंध) में रहने वाले प्रेमी जोड़े की सुरक्षा याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि साथी चुनने का हर किसी को अधिकार है। साथी के चयन का मूल्यांकन करना अदालत का काम नहीं है। न्यायालय का कार्य संविधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। ऐसे में अगर सुरक्षा से इनकार किया गया और जोड़ा ऑनर किलिंग का शिकार हो गया तो यह न्याय का उपहास होगा।

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप गैर-कानूनी नहीं है। घरेलू हिंसा अधिनियम में कहीं भी पत्नी शब्द नहीं है और ऐसे में सुरक्षा और गुजारा भत्ता के लिए भी महिला साथी पात्र होती है।
विज्ञापन


मामला बठिंडा से जुड़ा हुआ है, जहां के एक प्रेमी जोड़े ने सहमति संबंध में सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। लड़की की आयु 17 वर्ष तीन माह और लड़के की आयु 20 वर्ष थी। पंजाब सरकार ने सुरक्षा याचिका का विरोध किया और कहा कि कई बेंच सहमति संबंध के मामले में सुरक्षा से इनकार कर चुकी हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सहमति संबंध हर किसी को स्वीकार्य हों यह आवश्यक नहीं है लेकिन यह गैर-कानूनी भी नहीं है। बिना शादी के साथ रहना हमारे देश में अपराध नहीं है। संसद ने सहमति संबंध में रहने वाली महिला और उनसे पैदा हुए बच्चों को भी सुरक्षित रखा है। घरेलू हिंसा अधिनियम में कहीं भी पत्नी शब्द नहीं है और ऐसे में सुरक्षा और गुजारा भत्ता के लिए भी महिला साथी पात्र होती है।


हाईकोर्ट ने कहा कि देश के उत्तरी हिस्से में और खास तौर पर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ऑनर किलिंग के मामले बहुत अधिक हैं। किसी की शादी नहीं हुई और न्यायालय ने इस आधार पर किसी को सुरक्षा से इनकार किया तो देश के नागरिकों को संविधान के लिए जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहेगा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने बठिंडा के एसएसपी को इस मामले में सुरक्षा के लिए दाखिल मांगपत्र पर निर्णय लेने और आवश्यक हो तो सुरक्षा मुहैया करवाने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed