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याचिका खारिज: राजद्रोह कानून के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, सांविधानिक वैधता पर उठे थे सवाल 

Sat, 31 Jul 2021 10:06 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 31 Jul 2021 10:06 AM IST
सार

याची ने कहा था कि राजद्रोह का कानून अंग्रेजों के समय में देश के लोगों को दबाने के लिए बनाया गया दमनकारी कानून था, जिसका स्वतंत्र भारत में कोई स्थान नहीं है। वर्तमान समय में इस कानून का उपयोग किसानों के खिलाफ किया जा रहा है।

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Punjab and Haryana High Court refuses Petition Against Sedition Law
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किसानों पर राजद्रोह का मामला दर्ज करने को डराने का प्रयास बताते हुए तथा राजद्रोह कानून की सांविधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर उसे खारिज कर दिया है। यह याचिका हरियाणा प्रोग्रेसिव किसान यूनियन की तरफ से दाखिल की गई थी। 

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हरियाणा प्रोग्रेसिव फार्मर्स यूनियन के संयोजक रमेश पंघाल ने एडवोकेट प्रदीप रापड़िया के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए राजद्रोह कानून की सांविधानिक वैधता पर सवाल उठाया था। याची ने कहा कि यह कानून पूरी तरह से असांविधानिक है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हनन करता है, जो मौलिक अधिकार है। 
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याची ने बताया कि कृषि कानूनों का किसान विरोध कर रहे हैं। इस दौरान 11 जुलाई को रणबीर गंगवा पर हमला होने और उनके वाहन के क्षतिग्रस्त होने की खबर आई। इस घटना के बाद 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के उपरांत राजद्रोह की धारा जोड़ दी गई। 5 किसानों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सेशन जज ने कहा था कि इस मामले में राजद्रोह का आरोप संदिग्ध प्रतीत होता है।
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याची ने कहा कि राजद्रोह का कानून अंग्रेजों के समय में देश के लोगों को दबाने के लिए बनाया गया दमनकारी कानून था, जिसका स्वतंत्र भारत में कोई स्थान नहीं है। वर्तमान समय में इस कानून का उपयोग किसानों के खिलाफ किया जा रहा है। याची ने कहा कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट भी इस कानून के दुरुपयोग पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुका है। याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और ऐसे में हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। 

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