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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: शादी का वादा कर सहमति से संबंध बनाए तो पुरुष दुष्कर्म का पूर्ण दोषी नहीं
Fri, 30 Jul 2021 12:10 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:10 AM IST
सार
दुष्कर्म के आरोपी को जमानत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी का वादा कर यदि सहमति से संबंध बने हैं तो पुरुष पूर्ण रूप से दोषी नहीं कहा जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा इस मामले में शादी का वादा हुआ और किसी कारण से शादी नहीं हो पाई। ऐसे में यह मामला सहमति संबंध का है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शादी का वादा करने के बाद अगर विवाहित महिला की सहमति से संबंध बने हैं तो ऐसे में पुरुष को पूर्ण रूप से दोषी नहीं कहा जा सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को जमानत देते हुए यह अहम टिप्पणी की है। हालांकि ट्रायल कोर्ट को इन टिप्पणियों पर गौर किए बगैर ट्रायल पूरा करने की सलाह दी है।
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याचिका दाखिल करते हुए आरोपी ने बताया कि उस पर महिला ने 17 मार्च को कुरुक्षेत्र में दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट का मामला दर्ज करवाया था। हाईकोर्ट ने याची व सरकार की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि एफआईआर देखने से स्पष्ट होता है कि महिला से जबरन संबंध नहीं बनाए गए थे।
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आरोप के अनुसार महिला के पति के साथ संबंध सही नहीं थे। इस बीच याची ने उससे शादी का वादा किया और संबंध बनाए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में शादी का वादा हुआ और किसी कारण से शादी नहीं हो पाई, जिस कारण यह मामला सहमति संबंध का है। साथ ही महिला अभी विवाहित है और उसका पति से तलाक नहीं हुआ है तो वैसे भी अभी वह आरोपी से विवाह नहीं कर सकती है।
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ऐसे में आरोप पूर्ण रूप से साबित हो भी जाते हैं तो उसे पुरुष पूर्ण रूप से दोषी नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट लगाते हुए ऐसा कोई जिक्र नहीं किया गया, जिससे यह साबित होता हो कि जाति के कारण शिकायतकर्ता का अपमान हुआ हो या उसे पीड़ित किया गया हो।