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Chandigarh: हाईकोर्ट ने हटाई 60 की उम्र में रिटायर होने पर लगी रोक, पीयू ने 58 शिक्षकों को किया सेवामुक्त

Fri, 23 Sep 2022 11:03 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 23 Sep 2022 11:03 AM IST
सार

पीयू के प्रोफेसरों ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग की थी। प्रोफेसरों की इस मांग को मानने से पंजाब और केंद्र सरकार ने इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ पीयू के 50 से अधिक प्रोफेसर हाईकोर्ट पहुंचे और सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की थी।

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Punjab and Haryana High Court lifted stay on order to retire professors of Panjab University in 60 years age
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

60 वर्ष की आयु पूरी करते ही चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को सेवानिवृत्त करने के सिंगल बेंच के आदेश पर लगी रोक को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हटा लिया है। 60 की उम्र के बाद भी सेवा देने की आस लगाए बैठे पीयू के प्रोफेसरों के लिए यह बड़ा झटका है। उधर, हाईकोर्ट का आदेश मिलते ही विवि ने गुरुवार शाम 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके 58 प्रोफेसरों को सेवामुक्त (रिलीव) करने का आदेश जारी कर दिया।

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पीयू के प्रोफेसरों ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग की थी। प्रोफेसरों की इस मांग को मानने से पंजाब और केंद्र सरकार ने इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ पीयू के 50 से अधिक प्रोफेसर हाईकोर्ट पहुंचे और सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की थी। सिंगल बेंच ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था और 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रोफेसरों को तत्काल सेवानिवृत्त करने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच के फैसले को शिक्षकों ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे दी थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन प्रोफेसरों को पुन: रोजगार व्यवस्था के जरिए सेवा में लेने और वेतन जारी करने का आदेश दिया था। 
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से लगाई गई रोक के कारण 61 प्रोफेसर ऐसे हैं जो 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी सेवा दे रहे हैं। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अब अपने ही रोक को हटाते हुए कहा कि अब रोक को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने उन शिक्षकों से किसी प्रकार की रिकवरी नहीं करने का आदेश दिया है, जो 60 वर्ष के बाद भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हाईकोर्ट अब इस मामले में अपील पर जनवरी 2023 में सुनवाई होगी।

शिक्षकों की भारी कमी, गेस्ट फैकल्टी और जेआरआफ स्कॉलर्स के सहारे कई विभाग

पंजाब यूनिवर्सिटी में पहले ही शिक्षकों की भारी कमी है। 58 शिक्षकों को सेवामुक्त करने के बाद पीयू के पास नियमित शिक्षक लगभग 580 के करीब ही रह गए हैं। आगामी दिनों में पीयू में नैक का दौरा होना है। ऐसे में शिक्षकों की कमी का खामियाजा पीयू प्रशासन को टीम के समक्ष भी झेलना होगा। पीयू के आर्ट्स और लैंग्वेज के विभिन्न संकायों में नाममात्र के नियमित शिक्षक बचे हैं, विभाग गेस्ट फैकल्टी और जेआरआफ स्कॉलर्स के सहारे चलाए जा रहे हैं। पीयू शिक्षक वर्ग का कहना है कि पंजाब यूनिवर्सिटी को 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके प्रोफेसरों की री-इंप्लायमेंट होनी चाहिए जिससे शिक्षकों की कमी से बचा जा सके। इससे पीयू की अकादमिक व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी। अगर ऐसा नहीं करना है तो जल्द ही नियमित शिक्षकों की भर्ती करवाई जाए।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षकों को सेवामुक्त करने के आदेश वीरवार शाम को जारी कर दिए गए हैं।  - प्रो वाईपी वर्मा, रजिस्ट्रार, पंजाब विवि

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