पंजाब के डीजीपी बने रहेंगे दिनकर गुप्ता, कैट के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक जारी
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता की नियुक्ति रद्द करने के 17 जनवरी के फैसले पर रोक जारी रखते हुए यूपीएससी की अपील पर सभी प्रतिवादी पक्षों को 5 मार्च के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) ने कैट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
याचिका में कहा है कि पंजाब के डीजीपी पद पर इंपैनलमेंट कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार ही दिनकर गुप्ता की नियुक्ति की थी। ऐसे में यह कहना कि दिनकर गुप्ता की डीजीपी के तौर पर नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, गलत है। पंजाब के मुख्य सचिव करन अवतार सिंह ने जवाब दायर कर बताया कि सरकार ने इस पद पर नियुक्ति के लिए यूपीएससी को 12 अधिकारियों के नामों की सूची भेजी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत नामों को कम कर 8 कर दिया गया। यूपीएससी ने सभी के नामों पर गौर करने के बाद नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी।
पंजाब सरकार पहले ही कैट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील में कह चुकी है कि कैट के इस फैसले के चलते राज्य के डीजीपी पद पर दिनकर गुप्ता की नियुक्ति रद्द होने से राज्य में यह पद रिक्त हो गया है और पंजाब बॉर्डर राज्य है, जिसकी पाकिस्तान से 553 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। पाकिस्तान से आतंकवाद, तस्करी और ड्रग्स का खतरा बना रहता है, ऐसे में पुलिस को बिना मुखिया के नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार ने कहा था कि पंजाब पुलिस बिना डीजीपी के इन समस्याओं से निपट नहीं सकती। ऐसे में कैट का फैसला सही नहीं है।
कैट ने दिनकर गुप्ता की नियुक्ति की थी रद्द
गत वर्ष 7 फरवरी को डीजीपी के पद पर दिनकर गुप्ता की नियुक्ति को पंजाब की एंटी ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स के डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा और पीएसपीसीएल के डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने कैट में चुनौती दे दी थी। कैट ने 17 जनवरी को दोनों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए डीजीपी के पद पर दिनकर गुप्ता की नियुक्ति को अवैध करार दिया था। कैट के इसी फैसले को पंजाब सरकार और दिनकर गुप्ता ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी।