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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab and Haryana High Court impose fine on petitioners

जीवन साथियों को छोड़ लिव इन में रहने की मांगी सुरक्षा, हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार जुर्माना

Wed, 30 Sep 2020 03:14 AM IST
ajay kumar विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 30 Sep 2020 03:14 AM IST
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Punjab and Haryana High Court impose fine on petitioners
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

अपने-अपने जीवन साथी को छोड़ उच्च न्यायलय में सुरक्षा की गुहार लगाना याचिकाकर्ता प्रेमी जोड़े को भारी पड़ गया। न्यायालय ने याचिका को आधार विहीन बताते हुए खारिज कर दोनों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिका दाखिल करते हुए जोड़े की ओर से उच्च न्यायालय से सुरक्षा की गुहार लगाई गई थी। 

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याची महिला ने कहा कि उसका विवाह 2002 में हुआ था और उसके बाद से ही उसकी सास उस पर अत्याचार करती थी। इसके चलते 2016 में उसे उसकी ससुराल से निकाल दिया गया। इसको लेकर उसने घरेलू हिंसा की शिकायत 2018 में दी थी। उसका एक 16 साल का बेटा है और वह वर्तमान में अपने बेटे को साथ लेकर प्रेमी के साथ रह रही है। 
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याची ने बताया कि उसका विवाह 2006 में हुआ था और वह भी अपनी पत्नी के साथ सुखी नहीं था। इसके चलते उसने याची महिला के साथ रहने का फैसला लिया जिसके बाद वह सुखी परिवार के तौर पर सहमति संबंध (लिव इन रिलेशनशिप) में रह रहे थे। इसी बीच याची के पति ने एक दिन उनके घर आकर उनकी पिटाई की और याची ने बड़ी मुश्किल से भाग कर अपनी जान बचाई। 
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न्यायालय ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह याचिका आधार विहीन है क्योंकि हिंसा के आरोप लगाए गए हैं लेकिन इससे जुड़ा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया। न्यायालय ने कहा कि 2016 से महिला अपने ससुराल में नहीं थी और 2018 में जाकर उसने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करवाई जो शंका पैदा करने वाला है। 


न्यायालय ने कहा कि यह याचिका और कुछ नहीं बल्कि कानून का दुरुपयोग करने का प्रयास है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अपने जीवन साथी को छोड़कर अपने अपवित्र रिश्ते के लिए इस प्रकार का प्रयास वह भी बिना तलाक या ऐसी किसी याचिका के कानून की नजर में अपराध साबित हो सकता है। यह टिप्पणी करते हुए उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर 50 हजार जुर्माना लगाते हुए संगरूर के सीजेएम को वसूली का आदेश दिया है। 

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