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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी- भले ही हरिद्वार जाओ, फिर भी पत्नी को देना पड़ेगा गुजारा भत्ता
Wed, 25 Sep 2019 01:00 AM IST
ajay kumar
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 25 Sep 2019 01:00 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए पति ने हाईकोर्ट में दलील दी कि खाने तक को नहीं है, सोच रहा हूं हरिद्वार चला जाऊं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा चाहे हरिद्वार चले जाओ, लेकिन पत्नी को गुजारा भत्ता देना ही होगा। हिसार की फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को 4 हजार तथा बच्चे को 1 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश को चुनौती देते हुए पति ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
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याची ने कहा था कि उसकी शादी 2014 में हुई थी। उसके बाद से ही उसकी पत्नी उसे परेशान करती थी। अक्सर घर छोड़कर चली जाती थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि पति होकर आपने कभी पत्नी को वापस लाने की पहल नहीं की, इसलिए पत्नी को गलत कहना सही नहीं है। इन हरकतों के कारण वह गुजारा भत्ता की हकदार है।
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हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए याची ने कहा था कि उसके पास कमाई का कोई नियमित जरिया नहीं है और ऐेसे में वह गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। सुनवाई के दौरान पति ने कोर्ट में कहा कि हालात ऐसे हो चुके हैं कि वह सोच रहा है कि हरिद्वार चला जाऊं।
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि चाहे हरिद्वार जाओ या कैसे भी जीवन जिओे लेकिन अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी का सेक्शन 125 कोई दंड प्रावधान नहीं है बल्कि यह तो पत्नी की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का माध्यम है।
घरेलू हिंसा मामले में बरी होना भी बचने का आधार नहीं
याची ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसकी पत्नी ने उस पर घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाया था, जिसके चलते याची को ट्रायल झेलना पड़ा । लेकिन आखिरकार वह बरी हो गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही याची केस में बरी हो गया हो लेकिन यह भी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने का आधार नहीं है।