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हरियाणा: हाईकोर्ट ने स्कूल में दर्ज जन्मतिथि को नहीं लड़की के बयान को माना अहम, दुष्कर्म के आरोपी को किया बरी

Wed, 08 Dec 2021 01:18 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 08 Dec 2021 01:18 AM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक आरोपी को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने स्कूल में दर्ज जन्मतिथि को मान कर 20 साल की सजा सुनाई थी। वहीं हाईकोर्ट ने लड़की के बयान को अहम मना। इसी आधार पर अपना फैसला सुनाया। 

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Punjab and Haryana High Court acquits misdeed accused
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए दुष्कर्म के आरोपी को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला लड़की की उम्र के लिए स्कूल में दर्ज तिथि को न मान कर उसके द्वारा बताई गई आयु को अहमियत देते हुए सुनाया गया है। 

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हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दस्तावेज का स्वीकार्य होने और उसका संभावित प्रयोग अलग-अलग है। पलवल निवासी नवीन को नूंह की ट्रायल कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। लड़की के पिता ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसकी 14 साल की बेटी को स्कूल जाते हुए नवीन प्रताड़ित करता है और एक दिन उसने बेटी के साथ दुष्कर्म किया। 
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ट्रायल कोर्ट ने स्कूल में दर्ज जन्मतिथि को आधार बनाकर नवीन को पोक्सो एक्ट में दोषी मानकर सजा सुनाई। वहीं, नवीन ने बताया कि ट्रायल के दौरान पीड़ित और उसके पिता दोनों ने दुष्कर्म की बात को अस्वीकार किया था। ट्रायल कोर्ट ने इसके बावजूद वस्त्रों पर याची के वीर्य के निशान को आधार बनाकर सजा सुना दी। 
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नवीन यह भी बताया कि लड़की ने सहमति से संबंध बनने की बात कही थी और यह भी कहा था कि जब यह सब हुआ तो वह बालिग थी। पीड़ित के पिता ने बताया था कि उसने स्कूल में दाखिले के समय आयु कम लिखवाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल का रिकॉर्ड स्वीकार्य है लेकिन इसे जन्मतिथि को मानने के लिए संभावित ठोस आधार नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में लड़की कह रही है कि उसकी आयु 19 साल थी तो उसके बयान को संभावित ठोस आधार बनाया जा सकता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए याची नवीन को बरी कर दिया।

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