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मेधावी छात्रा को परेशान करना पंजाब विश्वविद्यालय को पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने लगाया एक लाख का जुर्माना
Fri, 26 Feb 2021 11:20 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 26 Feb 2021 11:20 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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मामूली गलती की वजह से पंजाब विश्वविद्यालय के यूआईएलएस की मेधावी छात्रा की छात्रवृत्ति रोकना विश्वविद्यालय को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने पीयू और यूआईएलएस पर जुर्माना लगाते हुए दोनों को 50-50 हजार रुपये छात्रा को मुआवजे के रूप में जारी करने का आदेश दिया है।
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छात्रा ईशिता उप्पल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उसने 2014-15 में 12वीं में टॉप किया था और इसके बाद उसने विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में प्रवेश लिया। वह आर्थिक पिछड़े वर्ग से थी इसलिए उसकी छात्रवृत्ति भी मंजूर हो गई।
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यह दो वर्ष तक चली लेकिन तीसरे वर्ष की फीस वापस करने से यूआईएलएस ने इनकार कर दिया। इसका कारण यह था कि छात्रा एक विषय की परीक्षा बीमार होने के चलते नहीं दे पाई थी। इस बारे में आवश्यक दस्तावेज भी पेश किए थे लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
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इसके बाद यूआईएलएस ने उसे अपने रोल से हटा दिया और इंटर्नशिप भी रद्द कर दी। इसको लेकर याची ने विभाग के निदेशक से भी गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की। इसके बाद वीसी से भी अनुरोध किया गया लेकिन बिना सुनवाई का मौका दिए उनके निवेदन को रद्द कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजाब विश्वविद्यालय को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि ईडब्ल्यूएस वर्ग की एक मेधावी छात्रा को पीयू ने मनमाने तरीके से शोषित किया। इस शोषण के चलते याची मुआवजे की हकदार है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची को छात्रवृत्ति राशि जारी करने के साथ ही मुआवजे के रूप में उसे एक लाख रुपये की राशि जारी करने के पीयू व यूआईएलएस को आदेश दिए हैं।