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'आप' के लिए आसान नहीं आगे की राह, 3 धड़ों में बंटी पार्टी कैसे लड़ेगी निगम चुनाव?
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 11 May 2017 09:10 AM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : File Photo
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आम आदमी पार्टी में एक तरफ दिल्ली में चल रहे घटनाक्रम से हाईकमान कमजोर हो गया है। दूसरी ओर, पंजाब में पार्टी पूरी तरह से बिखर चुकी है। ऐसे में आने वाले चुनाव में आप की राह आसान नहीं है।
दिल्ली में पूर्वमंत्री कपिल मिश्रा के आरोपों के बाद पार्टी सकते में है। राष्ट्रीय कनवीनर अरविंद केजरीवाल ने अब तक कपिल के आरोपों का जवाब नहीं दिया है। दिल्ली में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व कमजोर हो गया है। इसी वजह से है पंजाब में तमाम विरोध के बावजूद हाईकमान ने भगवंत मान को चुना। क्योंकि पार्टी नेतृत्व यह नहीं चाहता कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब से भी कोई बगावती सुर उठे। मान न तो ऐसा करेंगे और न ही ऐसा करने की स्थिति में हैं।
ऐसे में पार्टी पंजाब को भूलकर दिल्ली के संकट का हल आसानी से निकाल सकती है, लेकिन पार्टी के इस कदम से पंजाब इकाई पूरी तरह बिखर चुकी है। पूर्व सूबा कनवीनर गुरप्रीत घुग्गी ने पार्टी छोड़ दी। सुखपाल खैरा ने सारे पद छोड़ दिए, पर पार्टी नहीं छोड़ी। लेकिन मान की नियुक्ति पर सवाल उठा कर उन्होंने एक तरह से राष्ट्रीय नेतृत्व को चुनौती दे दी है।
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दिल्ली में पूर्वमंत्री कपिल मिश्रा के आरोपों के बाद पार्टी सकते में है। राष्ट्रीय कनवीनर अरविंद केजरीवाल ने अब तक कपिल के आरोपों का जवाब नहीं दिया है। दिल्ली में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व कमजोर हो गया है। इसी वजह से है पंजाब में तमाम विरोध के बावजूद हाईकमान ने भगवंत मान को चुना। क्योंकि पार्टी नेतृत्व यह नहीं चाहता कि मौजूदा परिस्थितियों में पंजाब से भी कोई बगावती सुर उठे। मान न तो ऐसा करेंगे और न ही ऐसा करने की स्थिति में हैं।
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ऐसे में पार्टी पंजाब को भूलकर दिल्ली के संकट का हल आसानी से निकाल सकती है, लेकिन पार्टी के इस कदम से पंजाब इकाई पूरी तरह बिखर चुकी है। पूर्व सूबा कनवीनर गुरप्रीत घुग्गी ने पार्टी छोड़ दी। सुखपाल खैरा ने सारे पद छोड़ दिए, पर पार्टी नहीं छोड़ी। लेकिन मान की नियुक्ति पर सवाल उठा कर उन्होंने एक तरह से राष्ट्रीय नेतृत्व को चुनौती दे दी है।
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चार महीने बाद होने हैं चार बड़े निगमों के चुनाव
Navjot singh sidhu
- फोटो : File Photo
एचएस फूलका फिलहाल शांत हैं। फूलका को केजरीवाल का करीबी माना जाता है। यह भी माना जाता है कि वह केजरीवाल के फैसले पर सवाल नहीं उठाएंगे। पर अंदरखाते मान की नियुक्ति से वह भी खुश नहीं हैं। ऐसे में मान केसमानांतर खैरा और फूलका के गुट बनने के आसार बन गए हैं।
चार माह बाद चार बड़े निगमों के चुनाव होने हैं। फिर गुरदासपुर लोकसभा उप चुनाव है। पार्टी ने निकायों की जंग को देखते हुए ही अमन अरोड़ा को सह-कनवीनर बनाया है ताकि विधानसभा चुनाव केदौरान बनी छवि को बदला जा सके, लेकिन बिखराव पार्टी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।
सितंबर से पहले होंगे निगम चुनाव : सिद्धू
स्थानीय निकायमंत्री नवजोत सिद्धू ने कहा है कि नगर निगमों के चुनाव सितंबर से पहले करवा लिए जाएंगे। पत्रकारों से बातचीत में सिद्धू ने कहा कि चुनाव को लेकर वार्डबंदी और वोटर लिस्टों का काम होना है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का इशारा मिलते ही प्रक्रिया शुरू करवा दी जाएगी। चुनाव जुलाई में भी करवाए जा सकते हैं।
चार माह बाद चार बड़े निगमों के चुनाव होने हैं। फिर गुरदासपुर लोकसभा उप चुनाव है। पार्टी ने निकायों की जंग को देखते हुए ही अमन अरोड़ा को सह-कनवीनर बनाया है ताकि विधानसभा चुनाव केदौरान बनी छवि को बदला जा सके, लेकिन बिखराव पार्टी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।
सितंबर से पहले होंगे निगम चुनाव : सिद्धू
स्थानीय निकायमंत्री नवजोत सिद्धू ने कहा है कि नगर निगमों के चुनाव सितंबर से पहले करवा लिए जाएंगे। पत्रकारों से बातचीत में सिद्धू ने कहा कि चुनाव को लेकर वार्डबंदी और वोटर लिस्टों का काम होना है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का इशारा मिलते ही प्रक्रिया शुरू करवा दी जाएगी। चुनाव जुलाई में भी करवाए जा सकते हैं।