जिंदगी की जंग हारा मासूम फतेहवीर, जगह-जगह गुस्साए लोगों ने बाजार किए बंद, सड़क भी की जाम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मासूम फतेहवीर सिंह की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग इतने नाराज थे कि सुबह सात बजे ही पटियाला बठिंडा मुख्य मार्ग पर यातायात बाधित कर दिया। इसके अलावा सभी बाजारों में रोष मार्च निकाला गया।
नया बाजार, पीरां वाला चौक, बस स्टैंड, पुरानी अनाज मंडी, सिनेमा रोड, माता मोदी रोड आदि इलाकों में रोष प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा गांव छाजली में भी लोगों ने धरना लगाकर सरकार के रवैये के खिलाफ रोष जताया।
सीपीआईएमएल लिबरेशन, भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां, भाकियू लक्खोवाल, विभिन्न संगठनों और व्यापारियों समेत तमाम वर्गों ने इस आंदोलन का समर्थन किया। लोगों ने सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन को फतेहवीर की मौत का जिम्मेदार ठहराया।
भड़के लोगों ने कहा कि तसलों से मिट्टी उठाने वाली सरकारें डिजिटल इंडिया की बात किस मुंह से कर रही हैं। यदि किसी वीआईपी का बेटा होता तो कई देशों की तकनीक चंद घंटों में यहां पहुंच जाती।
उनके वोट से आराम की जिंदगी जी रहे नेताओं को सबक सिखाने का वक्त आ गया है। सत्ता पर आते ही ये नेता, आम लोगों के हितों को भूल जाते हैं। लोगों ने मांग की कि प्रदेश सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यदि ऑपरेशन के पहले ही दिन कोई उचित फैसला लिया होता तो नन्हा फतेहवीर आज सबके बीच होता।
फतेहवीर की मौत के बाद बरनाला में प्रदर्शन
फतेहवीर सिंह को बचाने में जिला प्रशासन और सरकार की नाकामी के बाद बरनाला के विभिन्न क्षेत्रों महलकलां, पक्खो कैचियां, धनौला सहित अन्य क्षेत्रों में धरना प्रदर्शन कर रोड जाम किया गया। धनौला के यूथ क्लब द्वारा नेशनल हाईवे बरनाला संगरूर पर जाम करके धरना लगाया गया।
बस स्टैंड धनौला में लगाए गए धरने के दौरान यूथ क्लब के प्रधान जसप्रीत सिंह जस्सी ने कहा कि सियासत के नाम पर एक दूसरे पर क्रेडिट मैच खेलते हुए बच्चे की जान दांव पर लगा दी। उन्होंने मांग की कि डीसी संगरूर का तबादला किया जाए, अगर डीसी संगरूर का तबादला नहीं हुआ तो संघर्ष को तेज किया जाएगा।
महलकलां विधानसभा हलका में पंजाब एकता पार्टी के जिला प्रधान के नेतृत्व में बरनाला लुधियाना मुख्य मार्ग पर धरना लगाया गया। बरनाला मोगा नेशनल हाईवे, बरनाला बाजाखाना रोड पर धरना प्रदर्शन लगा जाम लगाया गया।
इस अवसर पर शशिकांत, इकबाल सिंह, हैप्पी, लाभ सिंह, गुरप्रीत सिंह ने कहा कि इंसानियत को छोड़ राजनीति करते हुए पंजाब सरकार व जिला प्रशासन संगरूर की नाकाम कोशिश के कारण आज बच्चे की मौत हो गई।
आप ने निकाला कैंडिल मार्च
पटियाला में आम आदमी पार्टी ने फतेहवीर की आत्मा की शांति के लिए गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब से लेकर बस स्टैंड तक कैंडिल मार्च निकाला। फतेहवीर की मौत के लिए संगरूर के प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा एनडीआरएफ को जिम्मेदार बताया। उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की।
फतेहवीर की मौत पर गुस्सा, निकाला रोष मार्च
तरनतारन में संगरूर के गांव भगवानपुरा में गुरुवार शाम को बोरवेल में गिरे फतेहवीर सिंह को मंगलवार को निकाला गया। सरकार व स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण फतेहवीर सिंह जिंदगी की जंग हार गया। सरकार के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए नौजवान सभा ने शहर में रोष मार्च निकाला।
उन्होंने कहा कि पांच दिन के रेस्क्यू के बाद भी प्रशासन फतेहवीर को बोरवेल से जिंदा बाहर निकालने में नाकामयाब रहा। फतेह के बोरवेल में गिरने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री ने एक बार भी संगरूर में जाकर स्थिति का जायजा नहीं लिया। फतेहवीर की आत्मा की शांति लिए बुधवार शाम को बोहड़ी चौक में कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा।
ये था मामला
घटना 6 जून दिन गुरुवार शाम चार बजे की है। संगरूर जिले में सुनाम के गांव भगवानपुरा निवासी सुखविंदर सिंह का दो साल का बेटा फतेहवीर खेत में बने बोरवेल में गिर गया था। पुराने बोरवेल को कट्टे से ढककर रखा गया था लेकिन बारिश पड़ने से वह कमजोर हो चुका था।
खेलते-खेलते बच्चे का पैर उस पर आ गया और उसके दबाव से कट्टा बोरवेल में धंसता चला गया। उसके साथ फतेहवीर भी बोरवेल में गिरता चला गया।
फतेहवीर के चिल्लाने की आवाज सुनकर मां-बाप दौड़कर आए। मां गगनदीप ने भागकर बच्चे को पकड़ने की कोशिश भी की थी लेकिन वह फतेहवीर को केवल छू ही सकी थीं। उसके हाथ में रद्दी हो चुके कट्टे का टुकड़ा आया।
परिजनों ने बताया कि फतेहवीर उनकी इकलौती संतान है। सुखविंदर सिंह और गगनदीप कौर की शादी करीब सात साल पहले हुई थी, जिसके पांच साल बाद कई मन्नतों के बाद फतेहवीर सिंह का जन्म हुआ था।
10 जून को फतेहवीर दो साल का हो गया था। एनडीआरएफ और डेरा समर्थक टीम (शाह सतनाम फोर्स) ने मोर्चा संभाला हुआ था लेकिन 109 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद फतेहवीर आखिर हार गया।