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जन सुनवाई सत्र रद्द, प्रशासक आज नहीं सुनेंगे समस्याएं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 03 Mar 2014 09:45 AM IST
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यूटी के प्रशासक शिवराज पाटिल के पास शहर के लोगों के लिए समय नहीं है। लगभग दो महीने से पाटिल ने जन सुनवाई सत्र में लोगों की समस्याओं को नहीं सुना है।
3 मार्च को यूटी सचिवालय में आयोजित होने वाला जन सुनवाई सत्र को भी रद्द कर दिया गया है। इसके बाद तीसरे सोमवार को यानी 17 मार्च को होली की छुट्टी है। ऐसे में तीसरे सोमवार को भी सत्र नहीं लगेगा।
पाटिल के समक्ष अपनी समस्याओं को रखने के लिए शहर के लोगों को 7 अप्रैल तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं आईटी विभाग के पास एक दर्जन से ज्यादा लोगों की शिकायतें पहुंच चुकी हैं।
पहले और तीसरे सोमवार को लगता है सत्र:
शहर के लोगों का कहना है कि जब जन सुनवाई सत्र के लिए दिन निर्धारित है तो पाटिल को उस दिन किसी और कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए।
ध्यान रहे कि जन सुनवाई सत्र पहले और तीसरे सोमवार को ही लगता है। अगर पाटिल चाहें तो किसी और सोमवार को भी सत्र का आयोजन हो सकता है।
पांच महीने में सिर्फ दो बार सुनीं लोगों की समस्याएं:
- इससे पहले पाटिल का जन सुनवाई सत्र 6 जनवरी को हुआ था।
- उसके बाद 20 जनवरी को नहीं हो पाया।
- फरवरी में एक भी सत्र नहीं हुआ।
- पिछले साल नवंबर और दिसंबर में भी सत्र नहीं आयोजित हुए थे। यानी पिछले पांच महीने में पाटिल के सिर्फ दो ही जन सुनवाई सत्र हुए हैं जबकि 10 होने चाहिए थे।
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3 मार्च को यूटी सचिवालय में आयोजित होने वाला जन सुनवाई सत्र को भी रद्द कर दिया गया है। इसके बाद तीसरे सोमवार को यानी 17 मार्च को होली की छुट्टी है। ऐसे में तीसरे सोमवार को भी सत्र नहीं लगेगा।
पाटिल के समक्ष अपनी समस्याओं को रखने के लिए शहर के लोगों को 7 अप्रैल तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं आईटी विभाग के पास एक दर्जन से ज्यादा लोगों की शिकायतें पहुंच चुकी हैं।
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पहले और तीसरे सोमवार को लगता है सत्र:
शहर के लोगों का कहना है कि जब जन सुनवाई सत्र के लिए दिन निर्धारित है तो पाटिल को उस दिन किसी और कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए।
ध्यान रहे कि जन सुनवाई सत्र पहले और तीसरे सोमवार को ही लगता है। अगर पाटिल चाहें तो किसी और सोमवार को भी सत्र का आयोजन हो सकता है।
पांच महीने में सिर्फ दो बार सुनीं लोगों की समस्याएं:
- इससे पहले पाटिल का जन सुनवाई सत्र 6 जनवरी को हुआ था।
- उसके बाद 20 जनवरी को नहीं हो पाया।
- फरवरी में एक भी सत्र नहीं हुआ।
- पिछले साल नवंबर और दिसंबर में भी सत्र नहीं आयोजित हुए थे। यानी पिछले पांच महीने में पाटिल के सिर्फ दो ही जन सुनवाई सत्र हुए हैं जबकि 10 होने चाहिए थे।
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