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पीयू थिएटर के छात्रों को मलाल, सिर्फ डिग्री ले पाए, रंगमंच के गुर नहीं सीख पाए
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के इंडियन थिएटर विभाग में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का थिएटर सीखना मात्र सपना ही रह गया। विद्यार्थियों को गुरु का सानिध्य तो मिला, लेकिन ऑनलाइन गुरु के सामने वे रंगमंच की कला को नहीं सीख पाए। विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि आखिरी थिएटर प्रोडक्शन मई 2019 में हुई थी। इसके बाद कोरोना आ गया। विद्यार्थियों को इस बात का मलाल है कि वह सिर्फ डिग्री ही ले पाए और रंगमंच कला के गुर नहीं सीख पाए।
17 नवंबर से विभाग तो खुला, लेकिन एमए के 19 में से चार-पांच विद्यार्थी ही आए, क्योंकि हॉस्टल की समस्या थी। कुछ समय बाद दिसंबर में छुट्टियां हो गईं और अब फिर से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। बता दें पीयू के थिएटर विभाग में बहुत ही चुनिंदा विद्यार्थियों को दाखिला मिलता है। थिएटर के जगत में उत्तर भारत में इसे बेहतरीन विभाग माना जाता है। विभाग में एमए और पीएचडी का कोर्स करवाया जाता है।
एमए में होती थी आठ से दस प्रोडक्शन
2021 में ही एमए पास करने वाले अवतार ने बताया कि एक सेमेस्टर ही ऑफलाइन पढ़ाई की। मार्च में हम प्रोडक्शन कर रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण उसे बीच में छोड़ना पड़ा, क्योंकि हम एकत्रित नहीं हो सकते थे। एमए के कोर्स में परिस्थितियों के मुताबिक आठ से दस प्रोडक्शन होती थी। इसमें एक वार्षिक प्रोडक्शन और अन्य विद्यार्थियों की ओर से हर सेमेस्टर में की जाती थी। इसके अलावा पूरे देश से एनएसडी और प्रसिद्ध रंगमंच के गुरु वर्कशॉप के लिए आते थे, जिसमें हमें अभिनय, लाइटनिंग, वेशभूषा आदि का प्रेक्टिकल ज्ञान दिया जाता था। कोरोना महामारी के कारण थिएटर के विद्यार्थी सिर्फ डिग्री ही ले पाए हैं, रंगमंच कला के गुर नहीं सीख पाए। शिक्षकों की ओर से ऑनलाइन थ्योरी का हिस्सा बहुत अच्छे से करवाया गया, ऑनलाइन अभिनय सिखाने की भी कोशिश की जाती, लेकिन वो सफल नहीं है। रंगमंच के विद्यार्थियों के लिए स्टडी टूर भी आयोजित किया जाता था, जिसमें हमें दूसरे राज्य की कला और संस्कृति को जानने और सीखने का मौका मिलता था।
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पीएचडी शोधार्थियों के लिए खुला विभाग, एमए के छात्रों का ज्यादा हुआ नुकसान
थिएटर विभाग से पीएचडी कर रहे नितिन ने बताया कि पीएचडी शोधकर्ताओं के लिए यूनिवर्सिटी के आदेशानुसार विभाग खोल दिए गए थे, लेकिन हमारा ज्यादा ग्राउंड वर्क है तो विभाग कम जाना होता है। एमए के विद्यार्थियों का अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि उनकी प्रोडक्शन नहीं हुई और थिएटर कोर्स में अधिकांश भाग प्रेक्टिकल लर्निंग का होता है।
दूसरे वर्ष के लिए खोला है विभाग
पंजाब यूनिवर्सिटी के निर्देशानुसार थिएटर विभाग अभी एमए दूसरे वर्ष के विद्यार्थियों के लिए खुला है। - डॉ. नवदीप कौर, चेयरपर्सन, थिएटर विभाग
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17 नवंबर से विभाग तो खुला, लेकिन एमए के 19 में से चार-पांच विद्यार्थी ही आए, क्योंकि हॉस्टल की समस्या थी। कुछ समय बाद दिसंबर में छुट्टियां हो गईं और अब फिर से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। बता दें पीयू के थिएटर विभाग में बहुत ही चुनिंदा विद्यार्थियों को दाखिला मिलता है। थिएटर के जगत में उत्तर भारत में इसे बेहतरीन विभाग माना जाता है। विभाग में एमए और पीएचडी का कोर्स करवाया जाता है।
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एमए में होती थी आठ से दस प्रोडक्शन
2021 में ही एमए पास करने वाले अवतार ने बताया कि एक सेमेस्टर ही ऑफलाइन पढ़ाई की। मार्च में हम प्रोडक्शन कर रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण उसे बीच में छोड़ना पड़ा, क्योंकि हम एकत्रित नहीं हो सकते थे। एमए के कोर्स में परिस्थितियों के मुताबिक आठ से दस प्रोडक्शन होती थी। इसमें एक वार्षिक प्रोडक्शन और अन्य विद्यार्थियों की ओर से हर सेमेस्टर में की जाती थी। इसके अलावा पूरे देश से एनएसडी और प्रसिद्ध रंगमंच के गुरु वर्कशॉप के लिए आते थे, जिसमें हमें अभिनय, लाइटनिंग, वेशभूषा आदि का प्रेक्टिकल ज्ञान दिया जाता था। कोरोना महामारी के कारण थिएटर के विद्यार्थी सिर्फ डिग्री ही ले पाए हैं, रंगमंच कला के गुर नहीं सीख पाए। शिक्षकों की ओर से ऑनलाइन थ्योरी का हिस्सा बहुत अच्छे से करवाया गया, ऑनलाइन अभिनय सिखाने की भी कोशिश की जाती, लेकिन वो सफल नहीं है। रंगमंच के विद्यार्थियों के लिए स्टडी टूर भी आयोजित किया जाता था, जिसमें हमें दूसरे राज्य की कला और संस्कृति को जानने और सीखने का मौका मिलता था।
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पीएचडी शोधार्थियों के लिए खुला विभाग, एमए के छात्रों का ज्यादा हुआ नुकसान
थिएटर विभाग से पीएचडी कर रहे नितिन ने बताया कि पीएचडी शोधकर्ताओं के लिए यूनिवर्सिटी के आदेशानुसार विभाग खोल दिए गए थे, लेकिन हमारा ज्यादा ग्राउंड वर्क है तो विभाग कम जाना होता है। एमए के विद्यार्थियों का अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि उनकी प्रोडक्शन नहीं हुई और थिएटर कोर्स में अधिकांश भाग प्रेक्टिकल लर्निंग का होता है।
दूसरे वर्ष के लिए खोला है विभाग
पंजाब यूनिवर्सिटी के निर्देशानुसार थिएटर विभाग अभी एमए दूसरे वर्ष के विद्यार्थियों के लिए खुला है। - डॉ. नवदीप कौर, चेयरपर्सन, थिएटर विभाग