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एसी जोशी पुस्तकालय न खुलने और ऑफलाइन कक्षाएं शुरू नहीं होने से पीयू विद्यार्थी पिछड़े

Mon, 11 Jan 2021 02:38 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2021 02:38 AM IST
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PU students backward due to AC Joshi library not opening and offline classes not being started
चंडीगढ़। एसी जोशी पुस्तकालय न खुलने और ऑफलाइन कक्षाएं शुरू नहीं होने से पंजाब यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी परेशान हो चुके हैं। वे कई बार यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। विद्यार्थियों का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे अधिक समस्या पुस्तकालय की आ रही है। बिना किताबों के पढ़ाई संभव नहीं है। दूसरा प्रायोगिक विषय की भी पढ़ाई भी ऑनलाइन समझ में नहीं आ रही है।
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आर्ट्स और विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों ने बताया कि पीयू ने एसी जोशी पुस्तकालय अब तक डिजिटल नहीं हो सकी है। इस वजह से वे पुराने विद्यार्थियों से नोट्स लेकर काम चला रहे हैं। संगीत और इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर करने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि लॉकडाउन में इमरजेंसी के लिए ऑनलाइन कक्षाएं ठीक थीं ताकि कुछ पाठ्यक्रम पूरा हो सके। लेकिन अब पूरी तरह ऑनलाइन कक्षाओं पर निर्भर होने से विद्यार्थियों का नुकसान हो रहा है, क्योंकि इंजीनियरिंग कोर्स के विद्यार्थियों का प्रयोगशालाओं में ही काम होता है। अब प्रयोगशाला के शोध को ऑनलाइन कैसे करेंगे। वहीं संगीत में एमए इंस्ट्रूमेंट वाले विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ना बड़ी ही जटिल प्रक्रिया है। संगीत के विद्यार्थी ने बताया कि जब तक गुरु साथ में बैठकर यंत्र पकड़ना नहीं सिखाएगा, तब तक उसे बजाने की प्रक्रिया तो शुरू ही नहीं हो पाएगी। ऑनलाइन में हम स्वर और ताल सीखने के लिए फिर भी प्रयास कर सकते हैं। पंजाबी साहित्य से एमए कर रहे हरनाज ने बताया उनके विभाग ने विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए विभागीय पुस्तकालय को खोल दिया है, अब साहित्य की किताबें पढ़ने के लिए मिल रही हैं।
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क्या कहते हैं विद्यार्थी
जनवरी में नहीं लगी कोई ऑनलाइन कक्षा
हमारी अंतिम ऑनलाइन कक्षा दिसंबर के आखिरी हफ्ते में लगी थी। जनवरी में अभी तक कोई भी ऑनलाइन कक्षा नहीं लगी है। ऑनलाइन कक्षाएं बीच में ठीक जा रही थी, लेकिन नए बैच के आने के बाद अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षा नहीं लग रही है। इसके अलावा ऑनलाइन में पढ़ाई के अलावा कोई अन्य गतिविधि नहीं हो रही है। असाइनमेंट आदि बनाने के लिए सीनियर विद्यार्थियों से नोट्स मांग रहे हैं। पीयू ने विद्यार्थियों को पुस्तकालय की सुविधा नहीं दी है। अब विभागों को पहले की तरह सामान्य कर देना चाहिए, विद्यार्थियों के पूरे सेमेस्टर की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
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-बेनजीर, पीयू कानून विभाग, अंतिम वर्ष छात्रा
संगीत गुरमुखी विद्या, ऑनलाइन हो रही खानापूर्ति
संगीत गुरु के साथ सामने बैठकर सीखी जाने वाली गुरमुखी विद्या है। यह ऑनलाइन नहीं पढ़ाई जा सकती। हमें राग, स्वर आदि के बारे में पढ़ाया और सिखाया जाता है, थोड़ा सा नेटवर्क कमजोर होने पर कुछ समझ नहीं आता। हमारी कक्षाओं में अगर कुछ नहीं समझ आए तो हम कक्षा के बाद पीडीएफ भी नहीं साझा कर सकते। संगीत पूरी तरह से प्रयोगिक है। इसलिए हम चाहते हैं कि अब हम विभाग में जाकर कक्षाएं लगाएं। - मुकुल, पीयू एमए संगीत, द्वितीय वर्ष छात्र
ऑनलाइन पढ़ाई महज खानापूर्ति.. बिना प्रयोग नहीं होंगे सफल
इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए प्रयोग का बहुत महत्व होता है। पिछले इतने समय से सिर्फ थ्योरी पढ़ रहे हैं जबकि यूनिवर्सिटी को फीस हम प्रयोगिक शिक्षा की देते हैं। मैकेनिकल और बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए तो ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ खानापूर्ति हैं, जब तक हम प्रयोगशाला में जाकर उस थ्योरी को लागू करना नहीं सीखेंगे तब तक हमारी पढ़ाई सफल नहीं है। इसके अलावा ऑनलाइन में भी पढ़ने के लिए किताबें नहीं हैं। यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप में किताबें भी नहीं उपलब्ध करवाई है।

-निखिल, एमई छात्र, पीयू बायोटेक्नोलॉजी
व्हाट्सएप ग्रुप में साझा रहे किताबों की प्रतियां
हमारे कोर्स में ज्यादा प्रायोगिक नहीं है, इसलिए विज्ञान संकाय की तुलना में हमारी कक्षाएं ठीक चल रही हैं। लेकिन विद्यार्थी और शिक्षक के बीच में संवाद और समझ लगभग खत्म सी हो गई है। ऑनलाइन कक्षा में एकतरफा संवाद होता है। नेटवर्क की कमजोरी के कारण आधे विद्यार्थी तो सिर्फ हाजिरी ही लगा पाते हैं, लेक्चर ढंग से समझ नहीं पाते। वहीं हम यूनिवर्सिटी की पुस्तकालय से किताबें नहीं ले सकते हैं। इसलिए हम इंटरनेट से ही पढ़ाई कर रहे हैं। उसके अलावा जिन विद्यार्थियों ने किताबें खरीदी है वे उनकी प्रति व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर देते हैं।- मनप्रीत, एमए पीयू गांधीयन स्टडीज, छात्र
कोट्स
मुझे अभी पंजाब यूनिवर्सिटी के विभागों को ऑफलाइन खोलने के विषय पर कोई जानकारी नहीं है। - प्रो आरके सिंगला, डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शंस, पीयू
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